Navratri Special: छत्तीसगढ़ के ये देवी मंदिर के पाकिस्तान ले जुड़थे नाता! पीढ़ी दर पीढ़ी चलत हे मां हिंगलाजिन के पूजा परंपरा
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल म देवी-देवता मन के प्रति आस्था अऊ विश्वास सदियों ले चले आवत हवय। इहां के धार्मिक परंपरा म ग्राम देवी अऊ शक्ति स्वरूपा माता मन के पूजा-पाठ के खास महत्व हवय। अइसने एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जगदलपुर ले करीब 30 किलोमीटर दूर बकावंड विकासखंड के गिरोला गांव म स्थित मां हिंगलाजिन माता के धाम आय।
- पीढ़ी दर पीढ़ी चलत हे मां हिंगलाजिन के पूजा परंपरा
- पाकिस्तान के हिंगलाज माता शक्तिपीठ ले जुड़थे नाम
- माता सती के पौराणिक कथा ले जुड़े हवय शक्तिपीठ के मान्यता
- छोटे कुटिया ले भव्य मंदिर तक बदलिस मां के धाम के स्वरूप
- नवरात्रि म उमड़थे श्रद्धालु मन के भीड़, ओडिशा ले घलो पहुंचथें भक्त
- बस्तर के धार्मिक अऊ सांस्कृतिक पहचान के हिस्सा आय मां हिंगलाजिन धाम
- धार्मिक धरोहर के इतिहास ला सहेजे के जरूरत
मां हिंगलाजिन के ये मंदिर श्रद्धालु मन के गहरी आस्था अऊ विश्वास के केंद्र बने हवय। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, एक समय इहां छोटे से कुटिया अऊ साधारण मंदिर रहिस, फेर समय के संग मंदिर के स्वरूप बदलत गीस अऊ आज ये एक भव्य धार्मिक स्थल बन गे हवय। सबले खास बात ये हवय कि मां हिंगलाजिन के नाम के संबंध पाकिस्तान के बलूचिस्तान म स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता शक्तिपीठ ले घलो जोड़े जाथे। हालांकि, गिरोला के मंदिर अऊ पाकिस्तान के हिंगलाज धाम के बीच सीधा ऐतिहासिक संबंध के पुख्ता प्रमाण अभी सामने नइ आए हवय।
पीढ़ी दर पीढ़ी चलत हे मां हिंगलाजिन के पूजा परंपरा
बस्तर के गिरोला गांव म स्थित मां हिंगलाजिन माता के धाम स्थानीय धार्मिक अऊ सांस्कृतिक परंपरा ले गहराई से जुड़े हवय। इहां कई पीढ़ी ले माता के पूजा-अर्चना करे जात हवय। बस्तर म ग्राम देवी मन के आराधना के विशेष महत्व हवय अऊ मां हिंगलाजिन के पूजा ला घलो ये परंपरा के हिस्सा माने जाथे। स्थानीय श्रद्धालु मन के मानना हवय कि माता ह शक्ति अऊ आस्था के प्रतीक आंय। माता के दरबार म पहुंचके भक्त मन अपन परिवार के सुख-शांति अऊ खुशहाली बर प्रार्थना करथें। नवरात्रि के बेरा इहां श्रद्धालु मन के खास उत्साह देखे बर मिलथे।
पाकिस्तान के हिंगलाज माता शक्तिपीठ ले जुड़थे नाम
मां हिंगलाजिन माता के नाम के संबंध पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत म स्थित प्रसिद्ध हिंगलाज माता मंदिर ले जोड़े जाथे। बलूचिस्तान के हिंगलाज माता धाम हिंदू धार्मिक मान्यता म एक प्रमुख शक्तिपीठ के रूप म प्रसिद्ध हवय। मान्यता के मुताबिक, हिंगलाज माता ह शक्ति स्वरूपा देवी आंय अऊ उनकर आराधना कई पीढ़ी ले करे जात हवय। गिरोला के मां हिंगलाजिन माता ला घलो श्रद्धालु मन शक्ति के स्वरूप मानके पूजा करथें। हालांकि, पाकिस्तान के हिंगलाज माता मंदिर अऊ बस्तर के गिरोला स्थित मां हिंगलाजिन धाम के बीच ऐतिहासिक संबंध के पुष्टि बर अभी अऊ दस्तावेजी प्रमाण के जरूरत हवय।
माता सती के पौराणिक कथा ले जुड़े हवय शक्तिपीठ के मान्यता
हिंदू धार्मिक मान्यता के मुताबिक, माता सती के कथा ले शक्तिपीठ मन के उत्पत्ति जुड़े हवय। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष ह एक यज्ञ के आयोजन करे रहिन। ये यज्ञ म भगवान शिव के अपमान होए ले माता सती ह दुखी होके अपन प्राण त्याग दे रहिन। एकर बाद भगवान शिव ह माता सती के शरीर ला लेके विचरण करे लगिन। मान्यता हवय कि सृष्टि के संतुलन बनाए रखे बर भगवान विष्णु ह अपन सुदर्शन चक्र ले माता सती के शरीर ला कई भाग म विभाजित कर दिस। जेन-जेन जगह म माता सती के अंग गिरे, वो स्थान मन ला शक्तिपीठ के रूप म पूजा जाए लगिस। पाकिस्तान के बलूचिस्तान म स्थित हिंगलाज माता धाम ला घलो अइसने एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ माने जाथे। बस्तर के गिरोला म मां हिंगलाजिन के आराधना करे वाले श्रद्धालु मन घलो माता ला शक्ति स्वरूपा मानथें। हालांकि, ये पौराणिक मान्यता अऊ गिरोला मंदिर के वास्तविक स्थापना इतिहास अलग-अलग विषय आंय।
छोटे कुटिया ले भव्य मंदिर तक बदलिस मां के धाम के स्वरूप
स्थानीय श्रद्धालु मन के मुताबिक, आज जेन जगह म मां हिंगलाजिन माता के भव्य मंदिर बने हवय, ओकर पुराना स्वरूप काफी साधारण रहिस। पहिली इहां छोटे-छोटे झोपड़ी अऊ साधारण मंदिर हुआ करत रहिस। समय के संग श्रद्धालु मन के आस्था अऊ सहयोग ले मंदिर के निर्माण अऊ विस्तार होवत गीस। आज ये मंदिर अपन भव्य स्वरूप अऊ धार्मिक महत्व बर जाने जाथे। कुछ स्थानीय लोगन के कहना हवय कि पहिली माता के स्थान डीआरडीओ परिसर के भीतर रहिस। बाद म श्रद्धालु मन के सुविधा ला ध्यान म रखके वर्तमान स्थान म मंदिर के निर्माण कराए गीस। हालांकि, मंदिर के स्थापना, स्थान परिवर्तन अऊ मूल प्रतिमा के इतिहास के पुष्टि बर पुराने दस्तावेज अऊ मंदिर प्रबंधन ले जानकारी मिलना जरूरी हवय।
नवरात्रि म उमड़थे श्रद्धालु मन के भीड़, ओडिशा ले घलो पहुंचथें भक्त
मां हिंगलाजिन माता के दरबार म छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाका के संग पड़ोसी राज्य ओडिशा ले घलो श्रद्धालु मन दर्शन बर पहुंचथें। मंदिर के पुजारी के मुताबिक, इहां सालभर भक्त मन के आना-जाना लगे रहिथे। खास करके शारदीय अऊ चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर म धार्मिक माहौल अऊ उत्साह देखे बर मिलथे। नवरात्रि के पंचमी अऊ अष्टमी के दिन श्रद्धालु मन विशेष रूप ले माता के दर्शन अऊ पूजा-अर्चना बर पहुंचथें। माता के प्रति गहरी आस्था रखे वाले भक्त मन अपन परिवार के सुख-समृद्धि, शांति अऊ मंगलकामना बर प्रार्थना करथें।
बस्तर के धार्मिक अऊ सांस्कृतिक पहचान के हिस्सा आय मां हिंगलाजिन धाम
बस्तर अंचल अपन आदिवासी संस्कृति, धार्मिक परंपरा अऊ देवी-देवता मन के पूजा-पद्धति बर प्रसिद्ध हवय। गिरोला स्थित मां हिंगलाजिन माता के मंदिर घलो बस्तर के अइसने धार्मिक धरोहर मन म एक आय, जिहां पीढ़ी दर पीढ़ी आस्था अऊ पूजा के परंपरा चले आवत हवय। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, माता के प्रति श्रद्धालु मन के विश्वास कई पीढ़ी ले बने हवय। समय के संग मंदिर के स्वरूप भले बदल गे हवय, फेर माता के प्रति लोगन के आस्था आज घलो बने हवय। ये मंदिर सिरिफ पूजा-पाठ के स्थान नइ, बल्कि बस्तर के धार्मिक अऊ सांस्कृतिक विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्सा घलो आय।
धार्मिक धरोहर के इतिहास ला सहेजे के जरूरत
मां हिंगलाजिन माता के मंदिर ले जुड़े प्राचीन मान्यता, पूजा परंपरा अऊ स्थापना के इतिहास ला दस्तावेज के रूप म सहेजे के जरूरत हवय। मंदिर के पुराने इतिहास, प्रतिमा अऊ स्थान परिवर्तन ले जुड़े जानकारी के प्रमाणिक दस्तावेज तैयार होए ले आने वाले पीढ़ी मन ला ये धार्मिक धरोहर के बारे म अऊ बेहतर जानकारी मिल सकही। बस्तर के गिरोला म स्थित मां हिंगलाजिन माता के धाम आज घलो श्रद्धालु मन के आस्था अऊ विश्वास के प्रमुख केंद्र बने हवय।
पाकिस्तान के हिंगलाज शक्तिपीठ ले नाम के जुड़ाव के मान्यता अऊ बस्तर के पीढ़ियों पुराना पूजा परंपरा ये धाम ला खास पहचान देवत हवय।



