MP के कलाकार ने बनाया रिकॉर्ड, 41 साल बाद 1500 की पेंटिंग बिकी करोड़ों में; जानें ऐसा क्या है इसमें खास और कौन हैं जनगढ़ सिंह श्याम

Jangarh Singh Shyam Painting: भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध गोंड चित्रकार जनगढ़ सिंह श्याम की एक कलाकृति ने भारतीय कला जगत में नया इतिहास रच दिया है। करीब 41 साल पहले भोपाल में जिस पेंटिंग की कीमत सिर्फ 1500 रुपये तय हुई थी, वही कलाकृति अब करोड़ों रुपये में नीलाम हुई है। इस पेंटिंग ने जनगढ़ सिंह श्याम की कला को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
1500 रुपये की पेंटिंग बनी करोड़ों की कलाकृति
साल 1985 में भोपाल स्थित भारत भवन में जनगढ़ सिंह श्याम की एक कलाकृति को महज 1500 रुपये में खरीदा गया था। उस समय प्रसिद्ध कला समीक्षक और भारत भवन के निदेशक जे. स्वामीनाथन ने उनकी प्रतिभा को पहचाना था।
बताया जाता है कि जब इस कलाकृति की कीमत 1500 रुपये तय हुई तो जनगढ़ सिंह श्याम इससे संतुष्ट नहीं थे। तब स्वामीनाथन ने कहा था कि यह सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक कलाकार की मेहनत, कल्पना और साधना का परिणाम है।
अब वही पेंटिंग मुंबई की नीलामी में करोड़ों रुपये की कीमत हासिल कर चुकी है। इस नीलामी को गोंड कला और भारतीय आदिवासी कला के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
पेंटिंग में दिखता है प्रकृति और जीवन का संदेश
नीलामी में शामिल की गई इस कलाकृति में गोंड कला की खास शैली दिखाई देती है। इसमें धरती, प्रकृति और जीवन के बीच संबंध को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है।
कलाकृति में एक विशाल वृक्ष और धरती के प्रतीक के रूप में नाग को दिखाया गया है। यह रचना प्रकृति के संरक्षण और जीवन के आधार के रूप में धरती के महत्व को दर्शाती है।
कौन थे जनगढ़ सिंह श्याम?
जनगढ़ सिंह श्याम का जन्म साल 1962 में मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के पाटनगढ़ गांव में हुआ था। वे गोंड समुदाय से ताल्लुक रखते थे और बचपन से ही प्रकृति, लोक परंपराओं और आदिवासी संस्कृति से जुड़े रहे।
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी कला को आगे बढ़ाया। उनकी प्रतिभा को 1980 के दशक में जे. स्वामीनाथन ने पहचाना और उन्हें भोपाल के भारत भवन से जोड़ा।
इसके बाद जनगढ़ सिंह श्याम ने पारंपरिक गोंड चित्रकला को दीवारों से निकालकर कागज और कैनवास तक पहुंचाया। उनकी खास शैली को आगे चलकर ‘जनगढ़ कलम’ के नाम से पहचान मिली।
गोंड कला को दिलाई वैश्विक पहचान
जनगढ़ सिंह श्याम की कलाकृतियां भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रदर्शित हुईं। उनकी कला पेरिस, टोक्यो और न्यूयॉर्क जैसे अंतरराष्ट्रीय कला केंद्रों तक पहुंची।
उन्होंने देवी-देवताओं, वन्यजीवों और प्रकृति को बारीक रेखाओं और बिंदुओं के माध्यम से अपनी अलग शैली में प्रस्तुत किया। उनकी कला ने आदिवासी संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
जापान में हुआ निधन, लेकिन कला आज भी जिंदा
साल 2001 में जापान के टोकामाची में जनगढ़ सिंह श्याम का निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र करीब 39 वर्ष थी। हालांकि, उनके जाने के वर्षों बाद भी उनकी कला लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रही है। करोड़ों रुपये में हुई इस नीलामी ने साबित कर दिया कि जनगढ़ सिंह श्याम की कला सिर्फ एक चित्र नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है।
Source: Nishaanebaz


