Modi Cabinet railway decision: मोदी कैबिनेट की बैठक में कटनी-पेंड्रा रोड चौथी और बिलासपुर-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन को मंजूरी, 10,783 करोड़ की परियोजनाओं से बदलेगा रेल नेटवर्क

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन के निर्माण समेत रेलवे की तीन प्रमुख मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं पर कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का है। इनसे पांच राज्यों में करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की क्षमता बढ़ाना, ट्रैफिक दबाव कम करना और माल परिवहन को अधिक गति देना है।
कटनी-पेंड्रा रोड और बिलासपुर-पेंड्रा रोड रेल लाइन से क्या बदलेगा?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद कटनी-पेंड्रा रोड रेल सेक्शन में चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड सेक्शन में तीसरी लाइन के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इन अतिरिक्त रेल लाइनों के बनने से इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी। यात्री ट्रेनों के साथ-साथ कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और स्टील जैसे माल की ढुलाई के लिए भी अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होंगे।
इसका सीधा फायदा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क को मिलने की उम्मीद है। खासकर पेंड्रा रोड और बिलासपुर क्षेत्र से जुड़े यात्रियों तथा माल परिवहन के लिए रेल क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकती है।
10,783 करोड़ रुपये की तीन प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने देश के व्यस्त रेल मार्गों पर मल्टी-ट्रैकिंग क्षमता बढ़ाने के लिए तीन प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें अतिरिक्त रेल लाइनें बिछाई जाएंगी।
प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं:-
1-खड़गपुर-बागडीही (झारसुगुड़ा):- 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन के निर्माण के लिए 6,528 करोड़ रुपये।
2-कटनी-पेंड्रा रोड:- चौथी रेल लाइन का निर्माण।
3- बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड:- तीसरी रेल लाइन का निर्माण।
4- अरक्कोनम-रेनिगुंटा:- 77 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी लाइन के लिए 1,936 करोड़ रुपये की मंजूरी।
5 राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा फायदा
इन रेल परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों को लाभ मिलने की उम्मीद है। करीब 4,790 गांवों की 56 लाख ग्रामीण आबादी को मुख्य रेल नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। रेल नेटवर्क के विस्तार से निर्माण और परिवहन क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होने की संभावना है।
सात हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर होंगे चार ट्रैक वाले
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि देश में करीब 11,000 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी रेल कॉरिडोर हैं। इन कॉरिडोर पर रेलवे का लगभग 40 फीसदी ट्रैफिक संचालित होता है। सरकार इन सात प्रमुख कॉरिडोर को चार-लेन यानी चार ट्रैक वाला रेल नेटवर्क बनाने की दिशा में काम कर रही है।
इस योजना में दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली के चार रूट शामिल हैं। ये मिलकर स्वर्णिम चतुर्भुज का निर्माण करते हैं। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-कोलकाता और दिल्ली-गुवाहाटी के तीन डायगोनल रूट भी इसमें शामिल हैं।
रेल मंत्री वैष्णव ने बताया कि इन सात कॉरिडोर पर करीब 2,000 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है, जबकि लगभग 5,000 किलोमीटर पर काम जारी है। शेष 4,000 किलोमीटर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक आसान होगी पहुंच
नई रेल लाइनों के निर्माण से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा समेत कई क्षेत्रों के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है। ओडिशा में तारातारिणी मंदिर और झारसुगुड़ा के पास स्थित प्राचीन श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर जाने वाले यात्रियों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
इसके अलावा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, विराटेश्वर मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खूंटाघाट बांध और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी।
27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता
इन रेल मार्गों का इस्तेमाल कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और स्टील जैसे भारी माल के परिवहन के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता है। अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद सालाना करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल का परिवहन संभव हो सकेगा।
इससे माल ढुलाई के लिए सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।रेल के जरिए अधिक माल परिवहन होने से लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और देश के परिवहन नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हर साल 12 करोड़ लीटर कच्चे तेल की होगी बचत
रेलवे के विस्तार से पर्यावरण को भी फायदा होने का अनुमान है। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से हर साल करीब 12 करोड़ लीटर कच्चे तेल के आयात की बचत हो सकती है। इसके अलावा करीब 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। सरकार ने इस पर्यावरणीय लाभ को करीब 2.48 करोड़ पौधे लगाने के बराबर माना है।
2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अतिरिक्त रेल लाइनों के निर्माण से यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी और मालगाड़ियों की आवाजाही भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।
खास तौर पर कटनी-पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन के निर्माण से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इस महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के साथ माल परिवहन, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
Source: Nishaanebaz


