Meta की सुपरइंटेलिजेंस लैब में बढ़ी हलचल: बड़े पैकेज पर हायर इंजीनियरों ने शुरू किया इस्तीफा देना

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आज की डिजिटल दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सबसे तेज़ी से उभरने वाला क्षेत्र है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां इस क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश कर रही हैं। इन्हीं में से एक है Meta (Facebook की पैरेंट कंपनी), जिसने हाल ही में Meta Superintelligence Lab की शुरुआत की थी। इस लैब का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए शक्तिशाली और उपयोगी AI सिस्टम विकसित करना था। लेकिन जिस उम्मीद से यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, अब वह कई चुनौतियों से घिरता नज़र आ रहा है।

मुख्य भाग

1. Meta की महत्वाकांक्षा और हायरिंग रणनीति

मार्क जुकरबर्ग ने इस सुपरइंटेलिजेंस लैब को दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों से सजाने का सपना देखा था। इसके लिए उन्होंने OpenAI, Google और Apple जैसी दिग्गज कंपनियों से टॉप इंजीनियर्स और AI वैज्ञानिकों को करोड़ों के पैकेज पर हायर किया। कई इंजीनियर्स को 10 लाख डॉलर (लगभग 8.8 करोड़ रुपये) से अधिक की सैलरी दी गई। इस हायरिंग को लेकर Meta लंबे समय तक सुर्खियों में रहा।

2. लैब के लक्ष्य

Meta Superintelligence Lab का लक्ष्य केवल चैटबॉट्स या छोटे AI टूल्स बनाना नहीं था, बल्कि ऐसे AI मॉडल विकसित करना था जो इंसानी बुद्धिमत्ता के करीब हों। इन्हें “फ्यूचर AI” कहा जा रहा था, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला सकते थे।

3. इस्तीफों की शुरुआत

हालांकि, हाल के दिनों में इस लैब से इंजीनियर्स के इस्तीफों की खबरें सामने आ रही हैं। इनमें से सबसे बड़ा नाम है AI वैज्ञानिक ऋषभ अग्रवाल, जिन्होंने 10 लाख डॉलर से ज्यादा के पैकेज को ठुकरा दिया। उनके इस्तीफे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतनी बड़ी सैलरी और संसाधनों के बावजूद इंजीनियर्स नौकरी क्यों छोड़ रहे हैं।

4. संभावित कारण

काम का दबाव और लक्ष्य की जटिलता: सुपरइंटेलिजेंस तैयार करना आसान नहीं है। प्रोजेक्ट का पैमाना इतना बड़ा है कि वैज्ञानिकों को भविष्य की अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है।

कंपनी की रणनीति से असहमति: कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार कई इंजीनियर्स Meta की कार्यशैली और रिसर्च की दिशा से संतुष्ट नहीं हैं।

प्रतिस्पर्धा और बेहतर अवसर: आज OpenAI, Google DeepMind और Anthropic जैसी कंपनियां भी AI में बड़े मौके दे रही हैं। कई विशेषज्ञ वहां जाने में ज़्यादा सुरक्षित और सफल करियर मानते हैं।

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