Major Cultural Controversy Ahead of Bastar Dussehra: विश्व आदिवासी दिवस और बस्तर दशहरा से पहले विवाद; देवस्थल पूजा और ‘मुरिया दरबार’ के नाम पर तकरार
Major Cultural Controversy Ahead of Bastar Dussehra: जगदलपुर/बस्तर)। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व और 9 अगस्त को मनाए जाने वाले ‘विश्व आदिवासी दिवस’ से ठीक पहले बस्तर में आदिवासी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता को लेकर विवाद गहरा गया है। बुधवार को एक ही दिन घटी दो बड़ी घटनाओं ने जिला प्रशासन और स्थानीय आदिवासी समाज को सीधे आमने-सामने खड़ा कर दिया है।
पहली घटना जगदलपुर कलेक्ट्रेट के आस्था सभाकक्ष में आयोजित विश्व आदिवासी दिवस की तैयारी बैठक के दौरान हुई। प्रतापगंज पारा स्थित पारंपरिक देवस्थल पर पूजा-अर्चना की अनुमति न मिलने के विरोध में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। वहीं, दूसरी घटना बस्तर दशहरा 2026 के आधिकारिक कार्यक्रम व पूजा विधान कार्ड में वर्ष 1875 से आयोजित होने वाले ऐतिहासिक ‘मुरिया दरबार’ के स्थान पर ‘आम दरबार’ नाम प्रकाशित करने से जुड़ी है, जिसे समाज ने ऐतिहासिक भूल बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।
विवाद का मुख्य केंद्र जगदलपुर के प्रतापगंज पारा स्थित देवस्थल की जमीन भी है, जिसे पूर्व में सरकारी पार्किंग और बाद में दिगंबर जैन समाज को आवंटित कर दिया गया था। आदिवासी समाज का दावा है कि इस जमीन पर परंपरागत रूप से पूजा और बलि देकर इसे देवस्थल माना जाता रहा है, इसलिए इसका आवंटन रद्द कर समाज को सौंपा जाए। दूसरी ओर, बस्तर दशहरा की रूपरेखा में ‘मुरिया दरबार’ का नाम बदलने को लेकर मां दंतेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार पाढ़ी के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन देकर इसमें तत्काल संशोधन की मांग की गई है।
बुधवार को घटे दोनों प्रमुख घटनाक्रमों और उनसे जुड़े विवादित बिंदुओं की स्थिति इस प्रकार है:
| विवादित विषय | मुख्य विवाद व सामाजिक पक्ष | प्रशासनिक / तकनीकी स्थिति |
| प्रतापगंज पारा देवस्थल पूजा | आदिवासी दिवस की शुरुआत पारंपरिक पूजा से करने और सीमित संख्या में पुजारियों को अनुमति की मांग। | सुरक्षा व भूमि विवाद के कारण अनुमति न मिलने पर समाज ने बैठक का बहिष्कार किया। |
| ‘मुरिया दरबार’ का नामकरण | वर्ष 1875 से ‘बाहर रैनी’ के अगले दिन सिरहासार भवन में चलने वाली परंपरा का नाम बदलने पर विरोध। | मुख्य पुजारी के अनुसार सरकारी रूपरेखा में अक्सर ‘आम दरबार’ लिखा जाता है, सुधार की मांग। |
| देवस्थल भूमि आवंटन | पारंपरिक पूजा स्थल की भूमि जैन समाज को आवंटित करने का विरोध व निरस्तीकरण की मांग। | मामला कोर्ट और जिला प्रशासन के समक्ष विचाराधीन, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ रहा है। |
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