शराब घोटाला: पूर्व IAS अनिल टुटेजा ला हाई कोर्ट ले मिलीस राहत
Jharkhand Liquor Scam : रायपुर। झारखंड शराब घोटाला ले जुड़े मामला में पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा ला हाई कोर्ट ले बड़े राहत मिली हे। अदालत ह ओमन ला अग्रिम जमानत देवत हुए जांच एजेंसी मन के काम करे के तरीका ऊपर घलो सवाल उठाए हे। कोर्ट ह पूछीस कि जब टुटेजा पिछला डेढ़ साल ले जेल में रिहिन, त उही बखत ओमन ले पूछताछ काबर नहीं करे गीस। सिंगल बेंच ह आदेश जारी करत हुए किहिस कि अभी के तथ्य मन के आधार में टुटेजा ला सशर्त अग्रिम जमानत दिय जात हे। बता दन कि एसीबी अउ ईओडब्ल्यू ह ओमन के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अउ धोखाधड़ी के धारा मन के तहत केस दर्ज करे रिहिस।
का हे पूरा मामला: आरोप हे कि टुटेजा अउ दूसर मनखे मन ह झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल के आधार में अवैध शराब कारोबार ला बढ़ावा दे बर एक सिंडिकेट बनाय रिहिन। ए दौरान आबकारी नीति में बदलाव करके अपन करीबी ठेकेदार मन ला फायदा पहुँचाय गीस अउ करोड़ों रूपया के अवैध कमीशन कमाय गीस। हालांकि, टुटेजा कोति ले दायर याचिका में कहे गे हे कि ए मामला ओमन ला जबरदस्ती जेल में रखे के साजिस आय।
याचिका में का किहिन: याचिका में तर्क दिय गे हे कि जब कोनो एक मामला में जमानत मिलथे, त दूसरी एफआईआर दर्ज करके ओमन ला जेल में रखे के कोसिस करे जाथे। बचाव पक्ष ह ए घलो बताइस कि पिछला पांच साल में कतको जांच एजेंसी मन ह छापा मारिन, फेर टुटेजा के करा ले कोनो अवैध संपत्ति या नगदी नहीं मिलीस। संग ही, जांच एजेंसी मन करा अइसन कोनो पक्का सबूत घलो नहीं हे जो ओमन ला झारखंड के अधिकारी मन ले जोड़ सकय।
टुटेजा ला सशर्त ज़मानत: कोर्ट ह अपन आदेस में किहिस कि जांच एजेंसी मन ह अभी तक टुटेजा ला ए मामला में आरोपी नहीं बनाय हें, जबकि दूसर कई आरोपी मन ला पहिली ले जमानत मिल चुके हे। अइसन में ओमन ला जादा दिन तक हिरासत में रखना ठीक नहीं हे। जमानत देवत बखत अदालत ह कुछ शर्त घलो लगाय हे। टुटेजा ला 50 हजार रूपया के मुचलका अउ ओतके रकम के दो सॉल्वेंट श्योरिटी ऊपर रिहा करे के आदेस दिय गे हे। संग ही ओमन ला जांच में सहयोग करे अउ गवाह मन ला प्रभावित झन करे के हिदायत दिय गे हे।
ज़मानत के विरोध: जांच एजेंसी ह जमानत के विरोध करत हुए टुटेजा ला ए पूरा घोटाला के मास्टरमाइंड बताइस। ओमन के कहना रिहिस कि टुटेजा ह रायपुर में बइठ के झारखंड के अधिकारी मन के संग मिलके साजिस रचिन, जेकर ले सरकारी खजाना ला भारी नुकसान होइस। ए सब के बाद घलो, अदालत ह सबूत अउ परिस्थिति ला देखत हुए ओमन ला राहत प्रदान करिस।



