होम National Javelin Missile Make in India: भारत में बनेगा टैंकों की धज्जियां उड़ाने वाला महा-हथियार, टाटा की हो गई डील, जानें क्यों चर्चा में है जैवलिन मिसाइल
National

Javelin Missile Make in India: भारत में बनेगा टैंकों की धज्जियां उड़ाने वाला महा-हथियार, टाटा की हो गई डील, जानें क्यों चर्चा में है जैवलिन मिसाइल

WhatsApp Facebook
Javelin Missile Make in India: भारत में बनेगा टैंकों की धज्जियां उड़ाने वाला महा-हथियार, टाटा की हो गई डील, जानें क्यों चर्चा में है जैवलिन मिसाइल

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

37544-india-javelin-missile-tata-lockheed-martin-raytheon-deal Javelin Missile Make in India: भारत में बनेगा टैंकों की धज्जियां उड़ाने वाला महा-हथियार, टाटा की हो गई डील, जानें क्यों चर्चा में है जैवलिन मिसाइल

Javelin Missile Make in India: नई दिल्ली। यूक्रेन की जंग में रूसी टैंकों के परखच्चे उड़ाने वाली अमेरिका की लेजेंड्री जैवलिन मिसाइल अब सीधे मेक इन इंडिया के तहत हमारे देश में बनने जा रही है। 4 किलोमीटर दूर से दुश्मन को खुद ढूंढकर तबाह करने वाला यह महा-हथियार जब भारतीय जांबाज जवानों के हाथों में होगा।

भारत की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और अमेरिका की दिग्गज रक्षा कंपनियों- रेथियॉन (Raytheon) और लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) के संयुक्त उद्यम जैवलिन जॉइंट वेंचर (JJV) के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। इस डील के तहत जैवलिन ऑल-अप राउंड (AUR) का को-प्रोडक्‍शन भारत में ही किया जाएगा।

भारत में असेंबली और कॉम्पोनेन्ट निर्माण की योजना

लॉकहीड मार्टिन के अनुसार, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (TASL) को भविष्य में भारत के भीतर मिसाइल के को-प्रोडक्‍शन के लिए मुख्य भारतीय साझेदार के रूप में चुना गया है. दोनों पक्ष अब भारत में एक ऐसी अत्याधुनिक फैसिलिटी स्थापित करने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं, जहां जैवलिन मिसाइल की अंतिम असेंबली, इंटीग्रेशन और कुछ प्रमुख घटकों का निर्माण स्वदेशी स्तर पर किया जाएगा। यह रणनीतिक कदम भारत की सैन्य ताकत को मजबूती देने के साथ-साथ मेक इन इंडिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत 292 करोड़ की डील

इस को-प्रोडक्‍शन समझौते से ठीक पहले, भारतीय सेना ने अमेरिका के साथ 292 करोड़ रुपये का एक महत्वपूर्ण गवर्मेंट टू गवर्मेंट (G2G) समझौता अंतिम रूप दिया है. इसके तहत सेना के लिए लगभग 60 जैवलिन मिसाइल सिस्टम का अधिग्रहण किया जा रहा है। यह खरीदारी भारतीय सेना की छठी इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट विंडो के तहत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमाओं पर त्वरित जवाबी कार्रवाई और इन्फेंट्री (पैदल सेना) की एंटी-आर्मर क्षमताओं को तत्काल मजबूत करना है।

क्यों घातक है यह मिसाइल

जैवलिन दुनिया का सबसे उन्नत मैन-पोर्टेबल (कंधे पर रखकर दागे जाने वाला) एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका फायर-एंड-फॉरगेट मैकेनिज्म है।

• खुद सूंघकर निशाना साधती है मिसाइल: इसमें लगे इमेजिंग इंफ्रारेड सीकर की वजह से मिसाइल दागे जाने के बाद अपने टारगेट (टैंक या बंकर) को खुद ट्रैक करती है। सैनिक को मिसाइल लॉन्च करने के बाद उसे गाइड नहीं करना पड़ता, जिससे वह तुरंत छिप सकता है या अपनी स्थिति बदल सकता है।

• 4 किलोमीटर तक सटीक वार: यह 2.5 से 4 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों, बंकरों और यहां तक कि कम ऊंचाई पर उड़ रहे हेलीकॉप्टरों को पलक झपकते ही नष्ट कर सकती है।

• कमांड लॉन्च यूनिट (CLU): इस सिस्टम में एक रियूजेबल CLU होता है जो सैनिक को दिन और रात दोनों समय बेहतरीन सर्विलांस और सटीक निशाना लगाने की क्षमता देता है।

स्वदेशी कार्यक्रम और तत्काल सुरक्षा का सही संतुलन

भारत वर्तमान में अपनी स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) सिस्‍टम भी विकसित कर रहा है। जब तक स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह परिपक्व और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए तैयार नहीं हो जाता, तब तक जैवलिन का भारत में बनना और सेना में शामिल होना एक बेहतरीन स्टॉप-गैप (अंतरिम) व्यवस्था प्रदान करेगा।

Source: Nishaanebaz

Nishaanebaz
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
मूल लेख पढ़ें ↗
दोस्तों के साथ साझा करें
📰 सम्बन्धित समाचार

यह भी पढ़ें (सम्बंधित ख़बरे)