हाई कोर्ट के बड़े फैसला : घरवाली ला माफ करके संग में रहे के बाद पुराना बात बर नहीं मिले तलाक, फैमिली कोर्ट के आदेश रद्द
Bilaspur High Court : बिलासपुर, 21 जनवरी 2026: बिलासपुर हाई कोर्ट ह पति-पत्नी के झंझट ला लेके एक बहुत बड़े अउ जरूरी फैसला सुनाए हे। कोर्ट ह साफ कह दीस हे कि अगर पति ह अपन घरवाली के पुराना गलती मन ला माफ करके ओकर संग लंबा समय तक रह चुके हे, त वो ह बाद में ओही पुराना बात या आरोप मन ला आधार बना के तलाक (Divorce) नहीं मांग सकय। जस्टिस संजय के. अग्रवाल अउ जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल के बेंच ह जांजगीर फैमिली कोर्ट के ओ फैसला ला पलट दीस हे, जेमा पति ला तलाक के मंजूरी दे दे गे रिहिस।
का हे पूरा मामला?
ये मामला जांजगीर-चांपा अउ बलौदाबाजार के एक जोड़ा के आय, जेकर बिहाव साल 2003 में होय रिहिस। बिहाव के 5 साल बाद साल 2008 में पत्नी ह अपन पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना के केस दर्ज कराए रिहिस। फेर, कोर्ट ह पति ला ए मामला में बरी कर दीस। साल 2010 में जब पति के सरकारी शिक्षक के पद में नौकरी लगिस, त वो ह अपन बड़े दिल देखात हुए घरवाली ला माफ कर दीस अउ दूनों झन फेर ले संग में रहे लगिन।
7 साल संग रहे के बाद फेर मांगिस तलाक
अचरज के बात ये हे कि दूनों झन साल 2010 ले 2017 तक, यानी लगभग 7 साल तक बढ़िया संग में रिहिन। फेर एकर बाद पति ह अचानक फैमिली कोर्ट में तलाक बर अरजी लगा दीस। पति ह अपन घरवाली ऊपर ‘मानसिक क्रूरता’ अउ ‘चरित्र’ ऊपर सवाल उठात हुए पुराना बात मन ला फेर उधालिस। जांजगीर के फैमिली कोर्ट ह पति के बात ला मान लिस अउ तलाक के आदेश दे दीस। एकर खिलाफ पत्नी ह हाई कोर्ट में गुहार लगाइस।
हाई कोर्ट ह काबर रद्द करिस तलाक?
हाई कोर्ट के बेंच ह सुनवाई के बखत कहिस कि जब पति ह अपन घरवाली के पुराना व्यवहार ला माफ कर दीस अउ ओकर संग 7 साल तक घर बसाईस, त एकर मतलब ये हे कि वो ह जम्मो विवाद ला खत्म मान डरे रिहिस। कानून के हिसाब से एक बार माफ कर दे के बाद ओही बात ला लेके फेर कोर्ट नहीं जाय जा सके। कोर्ट ह कहिस कि पति अब पुराना केस मन ला ढाल बना के तलाक नहीं ले सकय। ए आधार पर हाई कोर्ट ह पत्नी के अर्जी ला स्वीकार कर लीस अउ ओकर घर ला उजड़े ले बचा लीस।



