होम Chhattisgarh अब बिना नोटिस नहीं हटा सकंय सरकारी जमीन से कब्जा! हाईकोर्ट हा सुनाइस फैसला, बुल्डोजर चलाए से पहली सोचे बर परही
Chhattisgarh

अब बिना नोटिस नहीं हटा सकंय सरकारी जमीन से कब्जा! हाईकोर्ट हा सुनाइस फैसला, बुल्डोजर चलाए से पहली सोचे बर परही

WhatsApp Facebook
अब बिना नोटिस नहीं हटा सकंय सरकारी जमीन से कब्जा! हाईकोर्ट हा सुनाइस फैसला, बुल्डोजर चलाए से पहली सोचे बर परही

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

High Court Ka Bada Faisla : बिलासपुर: सरकारी या रेलवे के जमीन से अवैध कब्जा हटाए ला लेके छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट हा एक बड़ अउ ऐतिहासिक फैसला सुनाए हे। अदालत हा साफ-साफ कहि दिस हे कि कोनो भी मानुस ला सरकारी या रेलवे के जमीन से बेदखल करे (हटाए) से पहली कानून के तहत साफ-साफ कारन बताते हुए नोटिस देना जरूरी हे।

बिना सही नोटिस दिए अगर कोनो ला हटाए जाही, त ओला न्याय के खिलाफ माने जाही। एकर साथे हाईकोर्ट हा दछिन पूरब मध्य रेलवे (SECR) कोति से दायर याचिका ला खारिज कर दिस।

का रीहिस पूरा मामला? (बुधवारी बाजार के लडाई)
ये मामला बिलासपुर के बुधवारी बाजार इलाका के आय। दछिन पूरब मध्य रेलवे (SECR) हा उहाँ के एक झन रहइया मनखे ला रेलवे के जमीन मा अवैध कब्जाधारी बतात हुए लोक परिसर अधिनियम 1971 के तहत हटाए के आदेश जारी कर दे रीहिस। ए आदेश के खिलाफ ओ मनखे हा जिला कोर्ट मा अपील करिस।

जिला कोर्ट हा रद्द कर दे रीहिस रेल्वे के आदेश: 15 मई 2026 के जिला कोर्ट हा पीड़ित मनखे के अपील ला स्वीकार करिस अउ रेलवे के हटाए वाले आदेश ला रद्द कर दिस। कोर्ट हा मामला ला फिर से बड़ अफ़सर करा भेजिस अउ कहिस कि नियम के धारा 4 के तहत साफ अउ सही नोटिस जारी करो, अउ ओकर बाद कानून के हिसाब से फैसला लेव।

रेलवे हा गिस हाईकोर्ट, फेर उहाँ घलो मिलिस झटका
जिला कोर्ट के ए फैसला के खिलाफ रेलवे हा बिलासपुर हाईकोर्ट मा चुनौती दिस। रेलवे कोति से वकील मन कहिन कि ओ मनखे ला पहली ही नोटिस देय जा चुके रीहिस अउ ओला अपन बात रखे के पूरा मौका घलो मिले रीहिस। एखर सेती मामला ला दोबारा अफ़सर मन करा भेजना समय के बरबादी आय।

हाईकोर्ट हा काबर खारिज करिस रेल्वे के अरजी:

हाईकोर्ट हा जम्मो कागजात अउ जिला कोर्ट के आदेश ला देखिस। कोर्ट हा पाइस कि रेलवे जऊन सुरू मा नोटिस दे रीहिस, ओमा हटाए के असली कारन अउ आधार साफ-साफ नहीं लिखे रीहिस। अदालत हा कहिस कि सिर्फ नाम के नोटिस थमा देना काफी नोहे, ओमा कारन घलो बताना जरूरी हे ताकि सामने वाला मनखे अपन बचाव मा सही बात कह सके।

‘प्राकृतिक न्याय’ के नियम ला समझना जरूरी हे
अपन फैसला मा हाईकोर्ट हा जोर देवत कहिस कि कुदरती न्याय (Natural Justice) के असली नियम एही आय कि कोनो भी मानुस के खिलाफ कड़क कारवाई करे से पहली ओला साफ कारन बताना चाही अउ ओकर जवाब सुने के पूरा मौका देना जरूरी हे। अगर नोटिस ही कानून के हिसाब से सही नहीं हे, त ओकर बाद करे गे हटाए के कारवाई घलो सही नहीं माने जा सकय।

का होही ए फैसला के असर?
हाईकोर्ट के ए बड़े फैसला के बाद अब सरकारी बिभाग अउ रेलवे जइसन बड़े एजेंसी मन ला अवैध कब्जा हटाए से पहली कानूनी नियम मन के कड़ाई से पालन करे बर परही। अब अफ़सर मन अपन मनमर्जी से बिना सही नोटिस दिए ककरो घलो घर या दुकान ला नहीं उजाड़ सकंय। ए फैसला हा साफ करथे कि कारवाई चाहे जऊन घलो हो, कानून अउ न्याय के नियम सबो बर बराबर हे।

🔴
OneCG एक्सक्लूसिव रिपोर्ट OneChhattisgarh.Com
दोस्तों के साथ साझा करें
Editor
लेखकEditor
📰 सम्बन्धित समाचार

यह भी पढ़ें (सम्बंधित ख़बरे)