हलषष्ठी आज: पसहर चांउर अउ 6 किसम के भाजी के लगही भोग, सेहत बर घलो फायदेमंद
Halshashti 2026 : रायपुर। संतान के लंबी उमर, सुख अउ समृद्धि के कामना ले मनाए जाने वाला हलषष्ठी (खमरछठ) के परब आज 2 सितंबर ला प्रदेशभर मं परंपरागत ढंग ले मनाय जाही। ये दिन माताएं उपवास रखके पूजा-अर्चना करहीं अउ पसहर चांउर के संग छह किसम के खास भाजी के भोग लगाहीं। धार्मिक मान्यता के साथ-साथ ये पारंपरिक भोजन सेहत बर घलो फायदेमंद माने जाथे।
पसहर चांउर मं का खास बात हवय?
हलषष्ठी मं खाए जाने वाला पसहर चांउर बिना हल चलाए उगने वाला खास धान होथे। आम सफेद चांउर के मुकाबले एमा ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होथे, जेन ले खून मं शुगर तेजी ले बढ़े के संभावना कम रहिथे।
पसहर चांउर आमतौर पर बिना पॉलिश के रहिथे, एमा फाइबर के मात्रा घलो मिलथे। फाइबर पाचन क्रिया ला धीमा करे मं मदद करथे अउ ब्लड शुगर ला नियंत्रित रखे मं सहायक हो सकथे। एमा विटामिन-बी, आयरन अउ एंटीऑक्सीडेंट जइसन पोषक तत्व घलो पाए जाथे, जेन ले शरीर ला पोषण मिलथे।
छह भाजियों के खास महत्व
हलषष्ठी के दिन मुनगा, चेंच, कांदा, बोहार, कुम्हड़ा अउ अमारी जइसन छह किसम के भाजियों ला मिलाके बनाए के परंपरा हवय। ये भाजियां कई तरह के पोषक तत्व, फाइबर अउ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हो सकथें।
मुनगा अउ चेंच जइसन भाजियां शरीर मं इंसुलिन के कामकाज ला बेहतर बनाए मं मददगार हो सकथें। वहीं, भाजियों मं फाइबर के मात्रा होए ले पेट भरे के एहसास मिलथे अउ संतुलित खान-पान मं वजन अउ शुगर कंट्रोल रखे मं मदद मिल सकथे।
एमा मौजूद अलग-अलग पोषक तत्व शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता ला मजबूत बनाए मं घलो सहायक माने जाथें।
बिना मसाला अउ तेल के बनथे ये भोजन
हलषष्ठी के पारंपरिक भोजन के खासियत ये हवय कि एला सात्विक ढंग ले बनाए जाथे। पसहर चांउर ला भैंस के दूध, घी अउ सेंधा नमक के संग पकाए जाथे। वहीं छह भाजियों ला महुआ घी अउ सेंधा नमक मं बनाए के परंपरा हवय।
ए भोजन मं आम नमक, तेल अउ मसाला के इस्तेमाल नहीं करे जाथे। उबला अउ हल्का भोजन होए के कारण ये पचाय मं आसान हो सकथे।
कैंसर के खतरा कम करे मं भी मददगार?
पसहर चांउर अउ भाजियों मं पाए जाने वाले फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट अउ अलग-अलग प्राकृतिक पोषक तत्व शरीर के सेहत बर फायदेमंद हो सकथें। एक्सपर्ट के मुताबिक, सब्जियों से मिलने वाले कुछ फाइटोकेमिकल्स शरीर ला ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस ले बचाए मं मदद कर सकथें।
हालांकि, कोनो एक खाद्य पदार्थ ला कैंसर से बचाव या इलाज के पक्का साधन नहीं माने जा सकय। संतुलित आहार, नियमित स्वास्थ्य जांच अउ डॉक्टर के सलाह जरूरी हवय।
हलषष्ठी के ये पारंपरिक भोजन धार्मिक आस्था के संग छत्तीसगढ़ के खान-पान अउ स्थानीय जैव विविधता के झलक घलो दिखाथे।



