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Global Fashion Trend: ‘डिज़ाइन’ नहीं, रोज़मर्रा की पहचान थे मद्रास चेक्स और कूडाई; अब फिर से बने वैश्विक फैशन आइकॉन

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Global Fashion Trend: ‘डिज़ाइन’ नहीं, रोज़मर्रा की पहचान थे मद्रास चेक्स और कूडाई; अब फिर से बने वैश्विक फैशन आइकॉन

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Global Fashion Trend: दक्षिण भारत में बड़े होते हुए कुछ चीजें इतनी आम हुआ करती थीं कि उन पर अलग से ध्यान भी नहीं जाता था। लोकल मार्केट में हाथों में झूलती रंगीन प्लास्टिक तारों से बनी ‘कूडाई’ (टोकरी) हो या घर-घर में इस्तेमाल होने वाले मद्रास चेक्स के कपड़े—किराने के झोले, लंच बॉक्स, किचन टॉवल से लेकर बालकनी में सूखती लुंगी तक। ये किसी ‘डिजाइनर स्टूडियो’ की उपज नहीं थे, बल्कि रोज़मर्रा की आम जिंदगी की जरूरत थे।

लेकिन आज यही पारंपरिक पहचान पूरी दुनिया में फैशन और लग्जरी का नया प्रतीक बनकर उभर रही है। इंस्टाग्राम मूड बोर्ड्स, फैशन एडिटोरियल्स, लग्जरी रनवे और होम डेकोर में कूडाई और मद्रास चेक्स की वापसी यह साबित कर रही है कि असली लग्जरी हमेशा से हमारे अपने घरों और स्थानीय बाजारों में मौजूद थी।6_645cc1bb495f3 Global Fashion Trend: ‘डिज़ाइन’ नहीं, रोज़मर्रा की पहचान थे मद्रास चेक्स और कूडाई; अब फिर से बने वैश्विक फैशन आइकॉन

कूडाई (Koodai): सस्टेनेबिलिटी और फंक्शनल फैशन की मिसाल

तामिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में दशकों से इस्तेमाल होने वाली ‘कूडाई’ रंगीन चपटे प्लास्टिक के तारों से बुनी जाने वाली एक टोकरी है। यह हल्की, वॉटरप्रूफ और बेहद मजबूत होती है।

‘फंक्शनल फैशन’ के पिंटरेस्ट (Pinterest) ट्रेंड बनने से बहुत पहले कूडाई सब्जी मंडी से लेकर ऑफिस और मंदिर जाने तक का प्रमुख जरिया थी।

  • नए देसी ब्रांड्स का योगदान: ‘द मंजापाई कलेक्टिव’, ‘कूडाई कढ़ाई’, ‘मालगुडी’, ‘फाइलमोट’ और ‘कूडाईकाइंड’ जैसे आधुनिक लेबल इसे नया रूप देने के बजाय इसके सांस्कृतिक संदर्भ को पुनर्जीवित कर रहे हैं।

  • लंबी उम्र (Longevity): सस्टेनेबल फैशन के दौर में कूडाई की सबसे बड़ी ताकत इसकी मजबूती है। प्लास्टिक तार से बुने जाने के बावजूद एक कूडाई अनगिनत ट्रेंडी हैंडबैग्स से ज्यादा टिकाऊ साबित होती है।1774518827-2526 Global Fashion Trend: ‘डिज़ाइन’ नहीं, रोज़मर्रा की पहचान थे मद्रास चेक्स और कूडाई; अब फिर से बने वैश्विक फैशन आइकॉन

मद्रास चेक्स का ऐतिहासिक सफर: चेन्नै के तटों से आइवी लीग तक

मद्रास चेक्स की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। चेन्नई और आसपास के क्षेत्रों में सूती धागों से बुना गया यह हवादार कपड़ा शुरुआत में मुख्य रूप से मछुआरे और मजदूर पहना करते थे। पिट लूम पर हाथ से बुना और प्राकृतिक सब्जियों के रंगों (Vegetable Dyes) से रंगा जाने वाला यह कपड़ा ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए यूरोप और अमेरिका पहुंचा।

1950 के दशक में अमेरिका के प्रसिद्ध ‘ब्रूक्स ब्रदर्स’ जैसे ब्रांड्स ने इसे अपनाया और यह अमेरिका की आइवी लीग ड्रेसिंग (Ivy League Dressing) का अहम हिस्सा बन गया।

गिंगहैल और टार्टन से कैसे अलग हैं मद्रास चेक्स?

अक्सर लोग मद्रास चेक्स को अन्य चेक फैब्रिक समझ लेते हैं, लेकिन इनमें स्पष्ट अंतर है:

  • मद्रास चेक्स (Madras Checks): यह यार्न-डाइड कॉटन से बुना जाता है, जो हल्का, हवादार और वक्त के साथ और सॉफ्ट होता जाता है।

  • गिंगहैम (Gingham): यह दो रंगों की स्पष्ट सिमिट्री पर आधारित होता है।

  • टार्टन (Tartan): यह अधिक घना और स्कॉटिश विरासत से जुड़ा कपड़ा होता है।

  • प्लेड (Plaid): यह कई तरह के चेक पैटर्न्स की एक व्यापक श्रेणी (Umbrella Category) है।p0gqm1xs.jpg Global Fashion Trend: ‘डिज़ाइन’ नहीं, रोज़मर्रा की पहचान थे मद्रास चेक्स और कूडाई; अब फिर से बने वैश्विक फैशन आइकॉन

आधुनिक डिजाइनर्स और ‘ओरिजिनल मद्रास ट्रेडिंग कंपनी’ (OMTC)

आज के दौर में ‘नो ग्रे एरिया’, ‘निकोबार’, ‘द जोड़ी लाइफ’, ‘कार्तिक रिसर्च’, ‘ह्यूमेन’ और ‘इतुवाना’ जैसे भारतीय ब्रांड्स मद्रास चेक्स से कैंप-कॉलर शर्ट्स, रैप ड्रेसेज, ओवरसाइज़्ड सिल्हूट्स और प्री-स्टिच्ड लुंगी स्कर्ट्स बना रहे हैं।

न्यूयॉर्क और चेन्नई से संचालित ‘ओरिजिनल मद्रास ट्रेडिंग कंपनी’ (OMTC) इस पूरी यात्रा के चक्र को पूरा कर रही है। तीन पीढ़ियों से मद्रास फैब्रिक को वैश्विक मंच पर पहुंचा रहा यह ब्रांड अब चेन्नई में हाथ से बुनी कॉटन शर्ट्स, हुडीज और वेष्टि बनाकर दुनिया भर में भेज रहा है। एल्गोरिदम के दौर में कूडाई और मद्रास चेक्स की यह वापसी साबित करती है कि उपभोक्ता अब केवल ट्रेंड्स नहीं, बल्कि असली सांस्कृतिक संदर्भ (Context) और कहानियां चुन रहे हैं।

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Source: Nishaanebaz

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
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