Google Analytics Meta Pixel

संविधान के पालन करो या भारत छोड़ो! सुप्रीम कोर्ट के मेटा अउ व्हाट्सएप ला आखिरी चेतावनी: ‘डेटा साझा नई चलय

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

नई दिल्ली। डेटा प्राइवेसी अउ यूजर मन के अधिकार ला लेके सुप्रीम कोर्ट ह मेटा (Meta) अउ व्हाट्सएप (WhatsApp) ला बड़का फटकार लगाय हे। कोर्ट ह साफ कह दे हे कि अगर भारत में धंधा करना हे, त इहां के संविधान अउ नियम मन के पालन करे बर पड़ही। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ह कंपनी मन ला लिखित में हलफनामा (Affidavit) दे बर कहे हे कि ओ मन यूजर के डेटा ला ककरो संग साझा नई करहीं।

‘डेटा शेयरिंग बंद करो, नई त केस खारिज’ अदालत ह मेटा के ओ याचिका में सुनवाई करत रिहिस, जेमा कंपनी ह CCI कोति ले लगाय गे 213 करोड़ रुपिया के जुरमाना ला चुनौती दे रिहिस। CJI सूर्यकांत ह दो टूक कहिन, “हमला लिखित में भरोसा देव कि डेटा साझा नई करे जाही। अगर अइसन हलफनामा नई आय, त हम तुमन के अर्जी ला तुरंते खारिज कर देबो।” कोर्ट ह जोर देके कहिस कि कोनो भी कंपनी ला देश के मनखे मन के अधिकार के कीमत में व्यापार करे के आजादी नई दे जा सकय।

प्राइवेसी पॉलिसी में उठिस सवाल: ‘भोला-भाला मनखे ला भरमाय बंद करो’ सुनवाई के बखत सुप्रीम कोर्ट ह व्हाट्सएप के प्राइवेसी पॉलिसी ला ‘भ्रामक’ बताइस। कोर्ट ह कहिस कि पॉलिसी के भासा अतका कठिन हे कि कोनो साधारण मनखे, गरीब बुढ़वा दाई या कम पढ़े-लिखे मनखे ओला समझ नई सकय। अदालत ह कहिस कि निजता के अधिकार सबले ऊपर हे अउ कोनो भी डिजिटल प्लेटफॉर्म ला संविधान के घेरा में रहके ही काम करे बर पड़ही।

डेटा के कमाई ऊपर घलो बहस सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अउ जस्टिस बागची ह डेटा के ‘मौल’ (Value) ऊपर घलो सवाल उठाइन। कोर्ट ह कहिस कि यूजर के डेटा ह खाली जानकारी नई आय, बल्कि ये ह पइसा आय। कंपनी मन ये डेटा के उपयोग विज्ञापन ले कमाई करे बर करथें। अइसन में बिना मनखे के मर्जी के ओकर डेटा के इस्तेमाल करना बिल्कुल गलत हे।

You May Have Missed