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Election Commission: चुनाव आयोग के सपोर्ट में 124 पूर्व अधिकारी, बोले- जीत पर ईमानदार, हार पर धांधली वाला नहीं हो सकता सिस्टम

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Election Commission: चुनाव आयोग के सपोर्ट में 124 पूर्व अधिकारी, बोले- जीत पर ईमानदार, हार पर धांधली वाला नहीं हो सकता सिस्टम

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41871-election-commission Election Commission: चुनाव आयोग के सपोर्ट में 124 पूर्व अधिकारी, बोले- जीत पर ईमानदार, हार पर धांधली वाला नहीं हो सकता सिस्टम

नई दिल्ली। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही बहस के बीच भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और अन्य सेवाओं के 124 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने चुनावी व्यवस्था के समर्थन में खुला पत्र जारी किया है। पत्र में चुनाव प्रक्रिया पर लगाए जाने वाले धांधली के आरोपों के लिए विश्वसनीय सबूत पेश करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर व्यवस्था को ईमानदार और हारने पर धांधली वाला बताना उचित नहीं है।

EVM से लेकर स्ट्रांग रूम तक के सुरक्षा इंतजामों का हवाला

पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में कहा कि भारत की चुनावी व्यवस्था में समय के साथ कई बदलाव हुए हैं। पहले बूथ कैप्चरिंग, मतपेटियों में गड़बड़ी और चुनावी हिंसा जैसी चुनौतियां सामने आती थीं, लेकिन अब चुनाव प्रक्रिया में कई स्तरों पर सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। इनमें मतदान केंद्रों पर राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंट, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की सीलिंग, स्ट्रांग रूम की सुरक्षा और वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) के सत्यापन जैसे प्रावधान शामिल हैं।

पत्र के जरिए अधिकारियों ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने और धांधली के आरोपों को प्रमाणित करने के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की। उनका कहना है कि नागरिकों को सवाल पूछने का अधिकार है, लेकिन गंभीर आरोपों के समर्थन में प्रमाण भी होने चाहिए।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का दिया उदाहरण

पत्र में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का भी उल्लेख किया गया है। पूर्व अधिकारियों ने दावा किया कि इस चुनाव में दोबारा मतदान की जरूरत नहीं पड़ी और मतदान का प्रतिशत 1951 के बाद सबसे अधिक रहा। उन्होंने चुनावी नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) केंद्र में सरकार चलाने के बावजूद विभिन्न राज्यों में चुनाव हार चुकी है। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी।

पूर्व अधिकारियों के अनुसार, इन उदाहरणों से यह तर्क सामने आता है कि चुनावी व्यवस्था को केवल किसी एक दल की जीत या हार के आधार पर निष्पक्ष अथवा पक्षपाती नहीं ठहराया जाना चाहिए।

SIR को मतदाता सूची दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताया

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का बचाव करते हुए पूर्व अधिकारियों ने कहा कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन बनाए रखने के लिए इसकी जरूरत है। पत्र में बिहार में पुनरीक्षण के दौरान लगभग 22 लाख मृत मतदाताओं और करीब 7 लाख दोहरी प्रविष्टियों की पहचान किए जाने का उल्लेख किया गया है। साथ ही, लगभग 21.5 लाख नए मतदाताओं को सूची में शामिल किए जाने की बात भी कही गई है।

अधिकारियों ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि मतदाता सूची में मौजूद गलतियों और दोहराव को दूर करना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। हालांकि, SIR की प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर उठने वाले सवालों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

नोटिस, सुनवाई और अपील जैसे प्रावधानों का उल्लेख

खुले पत्र में पूर्व अधिकारियों ने SIR के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की भी चर्चा की। इनमें संबंधित मतदाताओं को नोटिस देना, सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराना, अपील की व्यवस्था और राजनीतिक दलों के बूथ-लेवल एजेंटों की भागीदारी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा हुई है और इसमें अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया है।

कंवल सिब्बल समेत कई पूर्व अधिकारियों के हस्ताक्षर

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और पूर्व IAS अधिकारी आरडी कपूर, समीरेंद्र चटर्जी, गोपाल कृष्ण, विवेक भारद्वाज तथा नवनीत सहगल सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की संस्थागत संरचना और उसकी स्वतंत्रता से जुड़े सुरक्षा उपायों का समर्थन किया।

पत्र के अंत में पूर्व अधिकारियों ने कहा कि चुनावी व्यवस्था की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आरोपों की जांच तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होनी चाहिए। उनका तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखने के लिए नतीजों से अलग हटकर व्यवस्था का निष्पक्ष आकलन जरूरी है।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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