निआव के नवा मिसाल: हत्या के कोसिस करइया ‘बेटी’ ल ‘महतारी’ ह करिस माफ, दिल्ली हाईकोर्ट ह सुनाइस सेवा के अनोखा सजा!
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ले एक अइसन फैसला आई हे, जेकर ले कानून के किताब म ‘दया अउ ममता’ के एक नवा कहानी लिखे गे हे। जस्टिस प्रतीक जालान के बेंच ह ‘हत्या के प्रयास’ (धारा 307) के गंभीर मामला ल न केवल खारिज करिस, बल्कि आरोपी ल जेल भेजे के बदला समाज सेवा करे के आदेश दे हे। कोर्ट ह मानिस कि रिसता मन के पवित्रता अउ छमा (माफी) के ताकत ह कतको बखत कानून के कड़ा धारा मन ले घलो बड़े होथे।
अनाथ लइका ल मिले रहिस महतारी के आँचर ये कहानी ममता अउ भरोसा के बीच के आय। एंटोनेट पामेला फर्नांडिस जब सिरिफ़ तीन महीना के अनाथ लइका रहिस, तब एक रिटायर्ड गुरुआइन (टीचर) अउ ओखर घरवाला ह ओला अपन बेटी बना के गोद ले रहिन। दसों बछर तक ओला सगी संतान कस पाले-पोसे गिस। फेर बछर 2019 म एक अनहोनी होगे, जब एंटोनेट ह प्रार्थना के बखत अपन ही गार्जियन (महतारी समान टीचर) ऊपर चाकू अउ लकड़ी के क्रॉस ले हमला कर दिस।
“द मर्चेंट ऑफ वेनिस” अउ कोर्ट के भावुक रुख सुनवाई के बखत जब पीड़िता (रिटायर्ड टीचर) ह कोर्ट म कहिस कि ओ ह अपन भावना मन ल किनारे रख के अपन ‘बेटी’ ल माफ कर दे हे, त कोर्ट घलो भावुक हो गे। जस्टिस जालान ह शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक के पंक्ति—“The quality of mercy is not strained” (दया के गुन ह दबाव म नई आय)—के हवाला देवत कहिन कि जहाँ आपसी माफी अउ रिसता मन के सम्मान होथे, उहाँ ट्रायल जारी रखना निआव के अपमान होही।
जेल नई, अब अस्पताल म करे बर परही ‘सेवा’ अदालत ह आरोपी एंटोनेट ल अइसने नई छोड़िस। सजा के रूप म ओला आने वाला चार महीना म सेंट स्टीफंस हॉस्पिटल म 30 कम्युनिटी सर्विस सेशन (सामुदायिक सेवा) पूरा करे के निर्देश दे गे हे। कोर्ट के ये फैसला ह संदेस देथे कि निआव के असली मतलब अपराधी ल खतम करना नई, बल्कि ओला सुधार के रिसता मन ल फिर ले जोड़ना आय।


