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Delhi HC on Saurabh Das-Ashutosh Ranka: 'आप Gen Z नहीं हैं… आप जेन जी नहीं हैं'.. जिस संगठन से जुड़े हैं, उसका असल उद्देश्य क्या है, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई फटकार तो वापस ली याचिका, पढ़ें पूरी खबर

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42783-ashutosh Delhi HC on Saurabh Das-Ashutosh Ranka: 'आप Gen Z नहीं हैं... आप जेन जी नहीं हैं'.. जिस संगठन से जुड़े हैं, उसका असल उद्देश्य क्या है, दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई फटकार तो वापस ली याचिका, पढ़ें पूरी खबर

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि वे ‘जेन जी’ (Gen Z) नहीं हैं।

साथ ही, पीस बॉन्ड के उल्लंघन पर नसीहत देते हुए कोर्ट ने विदेश में हो रही आगजनी और हिंसक घटनाओं का हवाला दिया। अदालत की कड़ी टिप्पणियों और नसीहत के बाद आखिरकार सीजेपी नेताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली।

एसईएम कोर्ट जाने की दी सलाह

जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब यह मामला पहले से ही स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में सुनवाई के लिए निर्धारित है, तो याचिकाकर्ता सीधे हाई कोर्ट क्यों चले आए। कोर्ट ने सलाह दी कि वे दोपहर 2 बजे एसईएम कोर्ट की कार्यवाही देखें और उसके बाद ही उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करें।

जस्टिस प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यदि शाम तक फैसला पक्ष में आ जाता है तो मामला वहीं खत्म हो जाएगा, अन्यथा वे कानून के मुताबिक उच्च अदालतों का रुख कर सकते हैं। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील ने लगातार यहीं राहत की गुहार लगाई।

बेल बॉन्ड और जंतर-मंतर जाने पर कोर्ट की नाराजगी

अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकील को याद दिलाया कि उनके मुवक्किल ने बेल बॉन्ड का उल्लंघन किया है, जिसके लिए कानून में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। जस्टिस प्रसाद ने टिप्पणी की, “11 अक्टूबर को आपका बेल बॉन्ड स्वीकार किया गया था। जब बॉन्ड तोड़ा जाता है, तो कानून के तहत कार्रवाई होती है, लेकिन अधिकारी आपको नोटिस देकर उदारता दिखा रहे हैं।”

इसके अलावा, अदालत ने उन्हें पहले ही डिनोटिफाई (बंद) किए जा चुके जंतर-मंतर जाने को लेकर भी आड़े हाथों लिया। अदालत ने विदेशों में हो रही हिंसा का जिक्र करते हुए कहा, “गलत या सही, आप वहां गए। जब आप बैरिकेड तोड़ते हैं, तो भीड़ में अन्य असामाजिक तत्वों के शामिल होने और माहौल बिगाड़ने की संभावना बढ़ जाती है। हम देख रहे हैं कि देश के बाहर क्या हो रहा है, किस तरह आगजनी जैसी घटनाएं हो रही हैं।”

‘आप जेन जी नहीं हैं’..

सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मौका तब आया जब अदालत ने ‘जेन जी’ आंदोलन का दावा करने वाले सौरभ दास और आशुतोष रांका को यह तमगा देने से इनकार कर दिया। अदालत ने जब उनकी उम्र पूछी तो पता चला कि सौरभ 27 और आशुतोष 32 साल के हैं। इस पर बेंच ने तंज कसते हुए कहा कि वे जेन जी नहीं हैं। कोर्ट ने आगे यह भी सवाल किया कि वे क्या करते हैं और जिस संगठन से जुड़े हैं, उसका असल उद्देश्य क्या है।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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OneChhattisgarh संपादकीय डेस्क
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