दूसरा बिहाव से जनम ले बेटा घलो अनुकंपा नियुक्ति के हकदार : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
Compassionate Appointment Chhattisgarh : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ह अनुकंपा नियुक्ति के एक जरूरी मामला म बड़ा फैसला देहे। कोर्ट ह साफ कहिस कि सरकारी कर्मचारी के दूसरी बिहाव ले जनम ले बेटा घलो अनुकंपा नियुक्ति पाय बर पात्र दावेदार हो सकथे। फेर, अगर एके श्रेणी म दू बेटा अनुकंपा नियुक्ति बर पात्र हवंय, त बड़े बेटा ला पहिली प्राथमिकता देय जाही। ये फैसला जस्टिस संजय के. अग्रवाल के पीठ ह सुनाए हे।
का हे पूरा मामला?
मुंगेली जिला के शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल धर्मपुरा म प्यून के पद म काम करइया ईश्वर सिंह क्षत्रिय के 29 सितंबर 2016 ला सेवा के दौरान निधन हो गे रहिस। मृतक के दू बिहाव होय रहिस। पहिली पत्नी उषा बाई ले बड़े बेटा जितेंद्र सिंह अउ दूसरी पत्नी मिलाउकिन बाई ले छोटे बेटा राजकुमार हे।
पिता के निधन के बाद दुनों बेटा ह अनुकंपा नियुक्ति बर शिक्षा विभाग म आवेदन करे रहिन। सरकारी रिकॉर्ड म दूसरी पत्नी के नाम दर्ज होय के आधार म मुंगेली के जिला शिक्षा अधिकारी ह छोटे बेटा राजकुमार ला अनुकंपा नियुक्ति दे दे रहिस।
बड़े बेटा ह हाईकोर्ट म लगाइस याचिका
छोटे बेटा ला नौकरी मिले के बाद बड़े बेटा जितेंद्र सिंह ह डीईओ के आदेश ला चुनौती देत हाईकोर्ट म याचिका लगाइस। ओकर कहना रहिस कि जब दुनों बेटा पात्र हवंय, त बड़े बेटा के दावा ला प्राथमिकता मिलना चाही।
मामला के सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ह छत्तीसगढ़ सरकार के 2013 के अउ संशोधित सर्कुलर के प्रावधान देखिस। कोर्ट ह पाइस कि एके श्रेणी म दू दावेदार होय के स्थिति म प्राथमिकता तय करे के स्पष्ट नियम नइ हे।
बड़े बेटा ला पहिली प्राथमिकता
हाईकोर्ट ह पटना हाईकोर्ट के राज किशोर बनाम बिहार राज्य मामला के हवाला देत कहिस कि जब दू भाई अनुकंपा नियुक्ति बर पात्र हवंय, त ज्येष्ठता के सिद्धांत के आधार म बड़े भाई ला पहिली प्राथमिकता मिलना चाही।
कोर्ट ह ये घलो साफ करिस कि अगर बड़े भाई पात्र नइ होय, या नौकरी लेय से इंकार कर देय, त छोटे भाई के दावा ऊपर विचार करे जा सकथे।
30 दिन म नवा फैसला के निर्देश
हाईकोर्ट ह मुंगेली के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 7 अगस्त 2019 ला छोटे बेटा राजकुमार ला दिए गए अनुकंपा नियुक्ति के आदेश ला रद्द कर देहे। कोर्ट ह डीईओ ला निर्देश देहे कि 30 दिन के भीतर नियम के मुताबिक ज्येष्ठता के आधार म पूरा मामला के नवा सिरे ले विचार करके फैसला लेवय।
ये फैसला अनुकंपा नियुक्ति के ऐसे मामलामन म महत्वपूर्ण मानक तय करथे, जिहां एके परिवार के दू दावेदार नौकरी बर पात्र होथें।



