SI प्रमोशन मं हाईकोर्ट के फैसला, जॉइनिंग तारीख नइ बल्कि नियुक्ति साल ले गिनही 8 साल के सेवा
Chhattisgarh SI Promotion : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ह पुलिस विभाग मं सब इंस्पेक्टर ले इंस्पेक्टर पद मं प्रमोशन ले जुड़े एक अहम मामला मं फैसला सुनाय हवय। कोर्ट ह साफ कहिस कि प्रमोशन बर जरूरी 8 साल के अर्हकारी सेवा के गिनती कर्मचारी के वास्तविक जॉइनिंग तारीख ले नइ, बल्कि जऊन कैलेंडर साल मं कर्मचारी के फीडर कैडर मं नियुक्ति होइस, ओही साल ले होही। हाईकोर्ट के ए फैसला ले चार सब इंस्पेक्टर (रेडियो) अधिकारी मन ला राहत मिलिस अउ अब उनकर मामला 1 जनवरी 2025 ले इंस्पेक्टर (रेडियो) पद मं प्रमोशन बर विचार योग्य मानाय जाही।
चार SI अधिकारी मन दायर करे रहिन अपील
ए मामला ओम प्रकाश देवांगन, धर्मेश कुमार साहू, अपराजिता सिंह राणा अउ गौरव शुक्ला ले जुड़े हवय। चारों अधिकारी मन के नियुक्ति साल 2017 मं सब इंस्पेक्टर (रेडियो) के पद मं होइस, फेर सबो मन नवंबर 2017 मं अपन सेवा जॉइन करे रहिन। छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2021 के मुताबिक SI (रेडियो) ले इंस्पेक्टर (रेडियो) पद मं प्रमोशन बर 8 साल के अर्हकारी सेवा पूरा करना जरूरी हवय।
विवाद ए बात ला लेके रहिस कि 8 साल के सेवा के गिनती नियुक्ति के कैलेंडर साल ले होही कि कर्मचारी के असल जॉइनिंग तारीख ले।
2017 ला पहला साल माने के मांग
याचिकाकर्ता अधिकारी मन के कहना रहिस कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) मं अर्हकारी सेवा के गिनती के प्रावधान साफ हवय। नियम के मुताबिक जऊन कैलेंडर साल मं कर्मचारी फीडर कैडर मं नियुक्त होथे, ओही साल ला सेवा गिनती के पहिली साल माने जाना चाही।
अधिकारी मन तर्क दे रहिन कि उनकर नियुक्ति 2017 मं होइस, त 2017 पहिली साल, 2018 दूसर, 2019 तिसर अउ ए क्रम मं 2024 आठवां साल होही। ए हिसाब ले वो मन 8 साल के अर्हकारी सेवा पूरा कर चुके रहिन अउ 1 जनवरी 2025 ले इंस्पेक्टर (रेडियो) पद बर विचार के पात्र रहिन।
एकल पीठ ह पहिले खारिज कर दिस रहिस याचिका
ए मामला मं पहिली सुनवाई हाईकोर्ट के एकल पीठ मं होइस। एकल पीठ ह 10 अक्टूबर 2025 ला याचिका खारिज कर दिस रहिस। कोर्ट ह वास्तविक जॉइनिंग तारीख ला आधार बनावत कहिस कि चारों अधिकारी मन नवंबर 2017 मं सेवा जॉइन करे रहिन। ए कारण ले 8 साल के वास्तविक सेवा अक्टूबर-नवंबर 2025 के आसपास पूरा होही अउ वो मन 1 जनवरी 2026 ले प्रमोशन बर पात्र होही।
ए फैसला के खिलाफ चारों अधिकारी मन डिवीजन बेंच मं रिट अपील दायर करिन।
डिवीजन बेंच ह नियम के अलग तरीके ले व्याख्या करिस
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा अउ जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के डिवीजन बेंच ह मामले मं नियम 6(2) के व्याख्या करिस। कोर्ट ह कहिस कि नियम मं अर्हकारी सेवा के गिनती ओही कैलेंडर साल ले करे के बात हवय, जेमं कर्मचारी फीडर कैडर मं प्रवेश करथे।
ए हिसाब ले कर्मचारी के वास्तविक जॉइनिंग तारीख ला अलग ले आधार बनाके प्रमोशन के पात्रता ला आगे नइ बढ़ाय जा सकय। मतलब, अगर कर्मचारी के नियुक्ति 2017 मं होइस, त 2017 ला पहिली साल माने जाही, भले कर्मचारी ह ओ साल के बाद के महीना मं काम जॉइन करे हो।
2024 ला आठवां साल माने गिस
कोर्ट ह चारों अधिकारी मन के सेवा के गिनती ए तरह ले करे हवय—2017 पहिली साल, 2018 दूसर, 2019 तिसर, 2020 चौथा, 2021 पांचवां, 2022 छठवां, 2023 सातवां अउ 2024 आठवां साल।
ए हिसाब ले चारों अधिकारी मन 1 जनवरी 2025 तक 8 साल के अर्हकारी सेवा पूरा कर चुके माने गिन गे। हाईकोर्ट ह कहिस कि एकल पीठ ह सिरिफ वास्तविक जॉइनिंग तारीख के आधार मं पात्रता तय करे रहिस, जऊन नियम के सही व्याख्या नइ रहिस।
एकल पीठ के आदेश ला निरस्त करिस कोर्ट
डिवीजन बेंच ह 10 अक्टूबर 2025 के एकल पीठ के आदेश ला निरस्त कर दिस। चारों अधिकारी मन के रिट अपील ला स्वीकार करत राज्य सरकार अउ संबंधित विभाग ला उनकर प्रमोशन के मामला मं विचार करे के निर्देश दिस।
कोर्ट ह साफ करिस कि चारों अधिकारी मन ला 1 जनवरी 2025 ले इंस्पेक्टर (रेडियो) पद मं प्रमोशन बर पात्र मानके उनकर मामला देखे जाना चाही।
DPC मं रखे जाही प्रमोशन के मामला
हाईकोर्ट ह ये घलो कहिस कि चारों अधिकारी मन के मामला विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC के सामने रखे जाना चाही। प्रमोशन के आखिरी फैसला बाकी जरूरी पात्रता, रिक्त पद, वरिष्ठता अउ सेवा रिकॉर्ड ला देखके करे जाही।
याचिकाकर्ता मन के ओर ले ये बात घलो बताय गे रहिस कि इंस्पेक्टर (रेडियो) के 7 पद खाली रहिस अउ वरिष्ठता सूची के आधार मं वो मन प्रमोशन के दायरा मं आवत रहिन। अब विभाग ला हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक उनकर मामला मं विचार करना होही।
सीधे प्रमोशन नइ, बल्कि विचार के पात्रता
हाईकोर्ट ह साफ कर दिस कि चारों अधिकारी मन ला सीधे प्रमोशन देय के आदेश नइ दे गे हवय। कोर्ट ह सिरिफ ए मानिस कि वो मन 1 जनवरी 2025 ले प्रमोशन बर विचार योग्य रहिन।
अब DPC ह वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, बाकी पात्रता शर्त अउ उपलब्ध रिक्त पद ला देखके फैसला करही। अगर अधिकारी मन सबो निर्धारित शर्त पूरा करथें, त नियम के मुताबिक उनला प्रमोशन के परिणामी लाभ घलो मिल सकही।
हाईकोर्ट के ए फैसला ला पुलिस विभाग समेत सरकारी कर्मचारियन के प्रमोशन से जुड़े मामला मं महत्वपूर्ण मानाय जा सकथे। खासकर अइसन मामला मं, जिहां नियुक्ति के साल अउ वास्तविक जॉइनिंग तारीख के बीच अर्हकारी सेवा के गिनती ला लेके विवाद होथे।



