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Chhattisgarh High Court: बीमार माता-पिता को छोड़कर अलग रहने बीवी का दबाव मानसिक क्रूरता: हाई कोर्ट, पढ़ें पूरी खबर

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Chhattisgarh High Court: बीमार माता-पिता को छोड़कर अलग रहने बीवी का दबाव मानसिक क्रूरता: हाई कोर्ट, पढ़ें पूरी खबर

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36192-wife-pressure-to-live-separately-from-sick-parents-mental-cruelty-chhattisgarh-high-court Chhattisgarh High Court: बीमार माता-पिता को छोड़कर अलग रहने बीवी का दबाव मानसिक क्रूरता: हाई कोर्ट, पढ़ें पूरी खबर

Chhattisgarh High Court: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा है कि शादी के बाद पति या पत्नी पर पहले से मौजूद पारिवारिक जिम्मेदारियां समाप्त नहीं हो जातीं। यदि पत्नी बिना किसी उचित और ठोस कारण के पति पर उसके बीमार माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का लगातार दबाव बनाती है, तो परिस्थितियों के आधार पर ऐसा व्यवहार पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जा सकता है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा।

क्या है मामला

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ निवासी एक सिख युवक का विवाह 8 मार्च 2007 को पथलगांव निवासी महिला से हुआ था। विवाह के करीब डेढ़ साल बाद दोनों के बीच पारिवारिक विवाद शुरू हो गए।

पति का आरोप था कि उसके पिता गंभीर रूप से बीमार थे और उनकी तीन बार हार्ट सर्जरी हो चुकी थी। इसके बावजूद पत्नी लगातार उस पर अपने माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का दबाव बनाती रही। पति ने जब अलग रहने से इनकार किया तो पत्नी द्वारा उसके माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया।

परिवार और रिश्तेदारों के स्तर पर विवाद सुलझाने की कोशिश भी की गई। वर्ष 2018 में दोनों पक्षों के रिश्तेदारों की मौजूदगी में सामाजिक स्तर पर समझौते का प्रयास हुआ और पत्नी ने लिखित रूप से माफी भी मांगी। लेकिन पति का कहना था कि इसके बाद भी उसके व्यवहार में स्थायी सुधार नहीं हुआ।

लगातार विवाद से परेशान होकर पति ने डोंगरगढ़ फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की। सुनवाई के बाद 11 नवंबर 2024 को फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला देते हुए क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर कर दिया।

इसके बाद पत्नी ने हाई कोर्ट में अपील दायर की। हाई कोर्ट में पत्नी की ओर से आरोप लगाया गया कि पति अपनी मां के कहने पर उसे प्रताड़ित करता था। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति और उसके परिवार ने पेट्रोल पंप खोलने के नाम पर उसके मायके वालों से 50 लाख रुपयों की मांग की थी। पत्नी ने 2018 में लिखे गए माफी पत्र के संबंध में भी दावा किया कि उस पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराए गए थे।

हाई कोर्ट ने मामले में पेश किए गए गवाहों के बयान और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों की समीक्षा की। कोर्ट ने पाया कि पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

विशेष रूप से पत्नी के भाई और मामा ने अपनी गवाही में स्वीकार किया कि 2018 में लिखे गए माफी पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे पढ़ा गया था और हस्ताक्षर किसी दबाव या जबरदस्ती में नहीं किए गए थे। इस आधार पर हाई कोर्ट ने पत्नी की यह दलील स्वीकार नहीं की कि उससे जबरन माफी पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए थे।

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि विवाह के बाद पति या पत्नी को एक-दूसरे की पहले से चली आ रही पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह समाप्त करने का अधिकार नहीं मिल जाता।

पति का अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए माता-पिता से अलग रहने से इनकार करना परिस्थितियों में स्वाभाविक और उचित था। कोर्ट ने माना कि पत्नी द्वारा लगातार पति पर माता-पिता को छोड़कर अलग रहने का दबाव बनाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इस आधार पर हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और पत्नी की अपील खारिज कर दी।

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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