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छत्तीसगढ़ के स्कूल मं अब रंग बताही कि लईका मन का खाही

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छत्तीसगढ़ के स्कूल मं अब रंग बताही कि लईका मन का खाही

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रायपुर। छत्तीसगढ़ मं लइका मन के खान-पान ल लेके चिंता बढ़त जात हे। एक तरफ कुपोषण के समस्या अभी बने हवय, त दूसर डहर जंक फूड, मीठा पेय अउ ज्यादा कैलोरी वाला खाना के चलते मोटापा के खतरा घलो बढ़त दिखत हे। एही ला ध्यान मं रखत राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ह स्कूल मन मं शुगर-कैलोरी बोर्ड लगाए के अनुशंसा करे हवय। ए बोर्ड मं लाल, पीला अउ हरा रंग के जरिए लइका मन ल समझाय जाही कि कोन खाना सेहत बर ठीक हे अउ कोन चीज कम खाना चाही।

आंकड़ा बतावत हे बढ़त चिंता

सरकारी NFHS-5 के आंकड़ा के मुताबिक छत्तीसगढ़ मं 5 बछर ले कम उमर के 4 फीसदी लइका ओवरवेट पाए गे रहिन। NFHS-4 मं ये आंकड़ा 2.9 फीसदी रहिस। यानी कुछ बछर मं छोटे लइका मन मं ज्यादा वजन के समस्या बढ़े हे। हालांकि ये आंकड़ा स्कूल जाए वाले लइका मन के मौजूदा मोटापा के सीधा आंकड़ा नइ हे, फेर कम उमर ले वजन बढ़े के खतरा के संकेत जरूर देथे।

वहीं राज्य मं कुपोषण के चुनौती घलो बने हवय। NFHS-5 के हिसाब ले 5 बछर ले कम उमर के 31.3 फीसदी लइका अंडरवेट पाए गे रहिन।

एक डहर कुपोषण, दूसर डहर मोटापा

छत्तीसगढ़ मं बच्चा मन के पोषण के स्थिति एके किसम के नइ हे। कुछ लइका कम वजन अउ कुपोषण ले जूझत हें, त कुछ मं ज्यादा कैलोरी अउ गलत खान-पान के कारण वजन बढ़े के खतरा हवय। ए स्थिति मं सिरिफ पेट भरना काफी नइ हे, बल्कि थारी मं का परोसे जात हे, ये घलो जरूरी होगे हे।

लाल, पीला अउ हरा रंग देही संकेत

प्रस्तावित बोर्ड ट्रैफिक सिग्नल के तीर मं काम करही। लाल रंग वाले खाना मं ज्यादा शक्कर, नमक, वसा या कैलोरी होही, जेला कम खाए के चेतावनी रहिही। पीला रंग सीमित मात्रा मं खाए के संकेत देही। वहीं हरा रंग पौष्टिक अउ बेहतर विकल्प के जानकारी देही।

ए तरीका ले लइका मन ल लंबा-चौड़ा पोषण चार्ट पढ़े के जरूरत नइ पड़ही। रंग देखके घलो वोमन समझ सकही कि कोन चीज रोज खाए ल ठीक हे अउ कोन चीज कम करना चाही।

स्कूल मं जंक फूड पर लगही लगाम

आयोग ह स्कूल परिसर मं जंक फूड के बिक्री ल नियंत्रित करे के घलो अनुशंसा करे हे। मीठा पेय, पैकेट वाला स्नैक्स अउ ज्यादा कैलोरी वाले खाना के बढ़त चलन ल लेके चिंता जताय गे हे।

हालांकि सिरिफ जंक फूड के बिक्री रोक देय ले समस्या पूरा नइ सुलझही। लइका मन के आदत बदलना संग-संग पालक मन ल घलो सही खान-पान के बारे मं जागरूक करना जरूरी होही।

थारी मं बढ़ही छत्तीसगढ़ी खाना

स्कूल अउ छात्रावास मन मं पौष्टिक भोजन के साथ स्थानीय छत्तीसगढ़ी खान-पान ल बढ़ावा देय के बात कही गे हे। आश्रम शाला, पोटा केबिन, प्रयास विद्यालय अउ एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय घलो ए पहल के दायरा मं रखे के अनुशंसा करे गे हे।

स्थानीय अउ पौष्टिक खाना ल बच्चा मन के रोज के भोजन मं शामिल करे ले स्वाद के संग सेहत के घलो ध्यान रखे जा सकही।

स्कूल बनही सेहत के पाठशाला

आयोग ह हर स्कूल मं ईट राइट क्लब बनाए अउ विद्यार्थी मन ल स्वास्थ्य दूत बनाए के सुझाव देहे। प्रार्थना सभा मं पोषण अउ सही खान-पान के जानकारी देय, पालक-शिक्षक बैठक मं बच्चा मन के भोजन ऊपर चर्चा करे अउ बेहतर पोषण बर काम करे वाले पालक मन ल ‘पेरेंट्स ऑफ द मंथ’ के रूप मं प्रोत्साहित करे के बात घलो कही गे हे।

असली चुनौती आदत बदले के

स्कूल के दीवार मं लाल-पीला-हरा बोर्ड लगा देना आसान हे, फेर असली चुनौती लइका मन के रोज के आदत बदले के हे। अगर स्कूल के बाहिर अउ आसपास जंक फूड आसानी ले मिलत रहिही, त सिरिफ बोर्ड के रंग ले कितना असर होही, ये सवाल बने रहिही।

एखर बर स्कूल मं बोर्ड लगाए के संग भोजन के गुणवत्ता, जंक फूड के बिक्री अउ बच्चा मन के पोषण स्थिति ऊपर लगातार नजर रखना जरूरी होही।

छत्तीसगढ़ मं बच्चा मन के पोषण के तस्वीर साफ बतावत हे कि चुनौती दू डहर के हे। एक डहर कुपोषण अउ कम वजन, त दूसर डहर बढ़त वजन अउ गलत खान-पान। ए स्थिति मं जरूरत ए बात के हे कि लइका मन ल सिरिफ पेट भरना नइ, बल्कि सेहत के हिसाब ले खाना चुनना सिखाय जाए।

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OneCG एक्सक्लूसिव संपादकीय रिपोर्ट OneChhattisgarh.Com
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