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Chemistry Nobel Prize 2026: एक अणु के दो चेहरे, एक ज्यादा असरदार! फ्रांस-जापान के वैज्ञानिकों को मिला केमिस्ट्री नोबेल, जानें क्या है मिरर इमेज का रहस्य

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Chemistry Nobel Prize 2026: एक अणु के दो चेहरे, एक ज्यादा असरदार! फ्रांस-जापान के वैज्ञानिकों को मिला केमिस्ट्री नोबेल, जानें क्या है मिरर इमेज का रहस्य

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41483-chemistry-nobel-prize-2026 Chemistry Nobel Prize 2026: एक अणु के दो चेहरे, एक ज्यादा असरदार! फ्रांस-जापान के वैज्ञानिकों को मिला केमिस्ट्री नोबेल, जानें क्या है मिरर इमेज का रहस्य

स्टॉकहोम। 2026 का नोबेल पुरस्कार रसायन विज्ञान फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों को असममित कार्बनिक संश्लेषण में उनके महत्वपूर्ण काम के लिए सम्मानित किया गया है।

उनके शोध ने उस लंबे समय से चले आ रहे सवाल को समझने में मदद की कि रासायनिक प्रतिक्रियाएं किसी अणु की एक खास ‘मिरर इमेज’ को दूसरी के मुकाबले कैसे प्राथमिकता दे सकती हैं।

यह खोज सिर्फ सैद्धांतिक रसायन विज्ञान तक सीमित नहीं है। अणुओं के इन दो दर्पण-प्रतिबिंब रूपों को नियंत्रित करने की क्षमता दवाओं के निर्माण और फार्मास्युटिकल रिसर्च के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी अणु के दो मिरर-इमेज रूप शरीर में अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं।

क्या है अणुओं की ‘मिरर इमेज’ की गुत्थी?

इसे आसान भाषा में समझें तो कुछ अणु ऐसे होते हैं जिनके दो रूप एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब जैसे होते हैं। जैसे हमारा बायां और दायां हाथ दिखने में एक-दूसरे के प्रतिबिंब होते हैं, लेकिन उन्हें एक-दूसरे के ऊपर पूरी तरह फिट नहीं किया जा सकता।

रसायन विज्ञान में ऐसे अणुओं को chiral molecules कहा जाता है और उनके दोनों रूपों को enantiomers कहा जाता है। समस्या यह है कि दोनों रूपों में परमाणुओं की संरचना समान हो सकती है, लेकिन शरीर के अंदर उनका व्यवहार अलग हो सकता है।

दवाएं बनाने में क्यों महत्वपूर्ण है यह खोज?

फार्मास्युटिकल उद्योग में किसी दवा के अणु का सही मिरर-रूप तैयार करना बेहद अहम हो सकता है। किसी एक रूप का चिकित्सकीय प्रभाव उपयोगी हो सकता है, जबकि दूसरा रूप कम प्रभावी या अलग प्रभाव वाला हो सकता है।

कागन और सोआई के काम ने ऐसी रासायनिक प्रतिक्रियाओं को समझने और नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराया, जिससे दवा निर्माण और नई रासायनिक सामग्री तैयार करने की दिशा में मदद मिली है।

करीब एक सदी पुरानी वैज्ञानिक पहेली

इस खोज का एक बड़ा पहलू यह है कि यह homochirality से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे सवाल पर रोशनी डालती है। जीवित दुनिया में कई महत्वपूर्ण जैविक अणु दो संभावित मिरर-इमेज रूपों में से मुख्य रूप से एक ही रूप में पाए जाते हैं।

वैज्ञानिक लंबे समय से यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि रासायनिक प्रक्रियाएं आखिर एक रूप को दूसरे पर कैसे प्राथमिकता देती हैं। कागन और सोआई के शोध ने इस दिशा में महत्वपूर्ण जवाब उपलब्ध कराया।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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