Chandkhuri Ravan Dahan: राम के ननिहाल चंदखुरी में दशमी नहीं, एकादशी को होता है रावण दहन, जानिए क्या है 100 साल पुरानी परंपरा

रायपुर। भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की नगरी कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के चंदखुरी में विजयादशमी का पर्व बाकी जगहों से बेहद अलग अंदाज में मनाया जाता है।
प्रदेशभर में जहां दशमी के दिन रावण दहन होता है, वहीं चंदखुरी में इसके अगले दिन यानी एकादशी (ग्यारस) को रावण का पुतला जलाया जाता है। सैकड़ों साल पुरानी यह परंपरा आज भी पूरी आस्था के साथ निभाई जा रही है।
जानें क्या है परंपरा
कौशल्या माता मंदिर के पुजारी रमेश शर्मा बताते हैं कि इस अनूठी परंपरा की शुरुआत आसपास के ग्रामीण इलाकों को जोड़ने के लिए हुई थी। पूर्व में यहां भव्य रामलीला का आयोजन होता था, जिसे देखने दूर-दराज से लोग आते थे।
ग्रामीण अपने गांवों में दशमी का पर्व मनाने के बाद अगले दिन चंदखुरी पहुंचते थे, ताकि वे यहां की रामलीला और रावण दहन का हिस्सा बन सकें। समय के साथ रामलीला का आयोजन तो बंद हो गया, लेकिन एकादशी को दशहरा मनाने की यह परंपरा आज भी कायम है।
स्थानीय मूर्तिकार चमन विश्वकर्मा बताते हैं कि उनके परिवार में रावण का पुतला बनाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। पिता के निधन के बाद अब वे खुद गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं के निर्माण के साथ दशहरे पर रावण का पुतला तैयार करते हैं।
साभार: Asian News Bharat


