विधानसभा मा अविश्वास प्रस्ताव के गरमा-गरम माहौल, कवासी लखमा अउ रामविचार नेताम के बीच तीर-कमान कस चलिस शब्द बाण!
chhattisgarh assembly no confidence motion : रायपुर, 17 जुलाई 2026 : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र मा अविश्वास प्रस्ताव ला लेके सत्ता पक्ष अउ विपक्ष के बीच जोरदार बहस छिड़ गे हे। एक कोति कृषि मंत्री रामविचार नेताम ह कोंग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव ला इतिहास के सबले कमजोर अउ लचर प्रस्ताव बतात हुए सायराना अंदाज मा तंज कसिस, तो दूसर कोति कवासी लखमा ह जल-जंगल-जमीन अउ पूंजीपति मन के डर ला लेके सरकार ला कटघरा मा खड़ा कर दीस। सदन मा जातिवाद अउ बस्तर-सरगुजा के आदिवासी मन के हक ला लेके दूनो डहर ले बहस के पारा भारी चढ़ गे हे।
‘विपक्ष ला मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं’— रामविचार नेताम के सायराना हमला
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ह अविश्वास प्रस्ताव के पुरजोर विरोध करत कहिन कि छत्तीसगढ़ मा अब तक कतको अविश्वास प्रस्ताव आइस, लेकिन ये सबले लचर, दिशाहीन अउ औचित्यहीन हे। ओमन तंज कसिस कि विपक्ष के बीच आपस मा ही कोनो तालमेल नहीं हे, ओकर मन के बीच बस कुर्सी के दौड़ चलत हे। नेताम ह सदन मा फिल्मी अउ सायराना अंदाज मा कहिन कि मैं तो रास्ते से जा रहा था, भेल-पूरी खा रहा था, सरकार के काम गिना रहा था, अब विपक्ष को मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं।
जातिवाद फैलाए के आरोप— ‘ST-SC मुख्यमंत्री-मंत्री मन से विपक्ष ला तकलीफ हे’
बहस तब अउ जादा गरमा गे जब मंत्री रामविचार नेताम ह विपक्ष ऊपर सीधा आरोप लगाइस कि छत्तीसगढ़ के गांव के आदिवासी बेटा आज मुख्यमंत्री बने हे, तो विपक्ष ला तकलीफ होवत हे। ओमन कहिन कि सरकार मा आज केदार कश्यप, रामविचार नेताम, दयालदास बघेल अउ गुरु खुशवंत जैसे अनुसूचित जनजाति अउ जाति के नेता मंत्री बने हैं, ए बात ले कोंग्रेस परेशान हे। ए बात ऊपर कोंग्रेस के विधायक मन ह कड़ा ऐतराज जताइस अउ हंगामा करत कहिन कि मंत्री ह सदन मा जात-पात फैलाए के काम झन करंय। कोंग्रेस ह साफ कहिस कि अविश्वास प्रस्ताव कोनो व्यक्ति या जाति के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकार के खराब काम-काज के खिलाफ आय।
सदन मा ‘ब्रह्मा, विष्णु, महेश’ के एंट्री, नेताम ह सीएम ला कहिस देवतुल्य
मंत्री नेताम ह अपन भासन मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अउ गृहमंत्री अमित शाह के काम ला भगवान कस बताइस। ओमन आगे कहिन कि सदन मा आज तीन बड़े नेता मौजूद हैं, जेमा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्पीकर डॉ. रमन सिंह अउ नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत शामिल हैं। नेताम ह ए तीनों नेता मन ला ‘ब्रह्मा, विष्णु अउ महेश’ के संज्ञा दे डालीस अउ कहिस कि जब सदन मा तीन-तीन देव बैठे हैं, तब अइसन अविश्वास प्रस्ताव लाना समझ से परे हे।
‘नक्सलवाद तो खतम होगे, पर अब पूंजीपति मन के डर हे’— कवासी लखमा के पलटवार
विपक्ष कोति ले मोर्चा संभालत कवासी लखमा ह सरकार ऊपर करारा हमला बोलिस। लखमा ह कहिस कि प्रदेश मा भले आदिवासी मुख्यमंत्री हे, लेकिन आज आदिवासी मन ला अपन न्याय अउ जल-जंगल-जमीन बर सड़क मा लड़ाई लड़े बर मजबूर होना पड़त हे। बस्तर से लेके सरगुजा तक आदिवासी मन ला ओकर जंगल से बेदखल करे जावत हे। लखमा ह सरकार ला घेरते हुए कहिस कि सरकार ह प्रदेश से नक्सलवाद ला समाप्त कर दीस, एकर बर सरकार ला बधाई अउ आभार, लेकिन नक्सलवाद के खतम होए के बाद अब आदिवासी मन के मन मा पूंजीपति अउ उद्योगपति मन के डर बैठ गे हे। खदान अउ विस्थापन के नाम मा सिर्फ आदिवासी मन ला ही उजाड़े जावत हे।



