होम Technology BRICS Summit: कौन सा तोहफा लेकर भारत आ रहे शी जिनपिंग? Rare Earth Minerals पर बदल सकता है ग्लोबल गेम
Technology

BRICS Summit: कौन सा तोहफा लेकर भारत आ रहे शी जिनपिंग? Rare Earth Minerals पर बदल सकता है ग्लोबल गेम

WhatsApp Facebook
BRICS Summit: कौन सा तोहफा लेकर भारत आ रहे शी जिनपिंग? Rare Earth Minerals पर बदल सकता है ग्लोबल गेम

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

38434-brics-summit-xi-jinping-modi-meeting-rare-minerals-deal BRICS Summit: कौन सा तोहफा लेकर भारत आ रहे शी जिनपिंग? Rare Earth Minerals पर बदल सकता है ग्लोबल गेम

नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों नेताओं की मुलाकात 12 सितंबर की शाम हो सकती है। इस बैठक में भारत-चीन संबंधों के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

इस मुलाकात की खास बात यह है कि 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत हो सकती है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक जिनपिंग की यात्रा के दौरान भारत और चीन के बीच दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति को लेकर समझौते पर भी बात आगे बढ़ सकती है।

12 सितंबर को मोदी-जिनपिंग की मुलाकात की संभावना

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 12 सितंबर की शाम द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है। इससे एक दिन पहले, यानी 11 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की बात कही जा रही है।

भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ गया था।

इस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। वहीं चीन ने बाद में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी। इसके बाद लंबे समय तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध बना रहा और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हुए। हालांकि, इसके बाद दोनों देशों ने रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में कई प्रयास किए हैं।

दुर्लभ खनिजों पर समझौते की तैयारी?

शी जिनपिंग की भारत यात्रा से जुड़ा एक अहम मुद्दा दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति भी हो सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन पहले हुई बातचीत में भारत को दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति का भरोसा दे चुका है।

अब सूत्रों का कहना है कि BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में इस संबंध में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि, यह अभी संभावना के तौर पर ही सामने आया है।

दुर्लभ खनिजों में भारत की स्थिति क्या है?

भारत में दुनिया के करीब 6 फीसदी दुर्लभ खनिज होने का अनुमान है और इस मामले में भारत तीसरे स्थान पर बताया जाता है। हालांकि, देश में इन खनिजों का अभी पर्याप्त दोहन नहीं हो पाया है।

भारत सरकार ने कुछ समय पहले नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन शुरू किया है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण और दुर्लभ खनिजों की खोज तथा उनके संसाधनों के विकास को बढ़ावा देना है।

सरकार के मुताबिक, भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में करीब 7.23 मिलियन टन दुर्लभ खनिजों की मौजूदगी का पता लगाया है।

क्या होते हैं दुर्लभ खनिज?

दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में कुल 17 तत्व शामिल हैं। इनमें स्कैडियम, सैमरियम, डिस्प्रोसियम, टर्बियम, इट्रियम, गैडोलिनियम और ल्यूटेटियम जैसे तत्व शामिल हैं। इन खनिजों के वैश्विक संसाधनों और आपूर्ति श्रृंखला में चीन की बड़ी भूमिका है।

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में इन दुर्लभ खनिजों की उपलब्धता का करीब 80 फीसदी हिस्सा चीन में है। इसी वजह से कई देश इनकी आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर हैं। यदि भारत और चीन के बीच प्रस्तावित समझौता होता है, तो इससे भारत के लिए इन महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को लेकर स्थिति बेहतर हो सकती है।

रूस भी भारत की मदद के लिए तैयार

दुर्लभ खनिजों को लेकर रूस ने भी भारत के साथ सहयोग की इच्छा जताई है। रूस का कहना है कि वह भारत को इन खनिजों की खोज में मदद करने के लिए तैयार है। यह काम तकनीकी रूप से जटिल माना जाता है और रूस की कंपनियों के पास इस क्षेत्र में विशेषज्ञता होने की बात कही गई है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि रूस इस मामले में भारत को सहयोग देने के लिए तैयार है।राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में भी दुर्लभ खनिजों से जुड़े सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है।

Source: Nishaanebaz

Nishaanebaz
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
मूल लेख पढ़ें ↗
दोस्तों के साथ साझा करें
📰 सम्बन्धित समाचार

यह भी पढ़ें (सम्बंधित ख़बरे)