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बिलासपुर हाई कोर्ट के बड़का फैसला: बिना कउनो ठोस कारन के पति ले अलग रहइया पत्नी ला नइ मिलय गुजारा भत्ता

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बिलासपुर हाई कोर्ट के बड़का फैसला: बिना कउनो ठोस कारन के पति ले अलग रहइया पत्नी ला नइ मिलय गुजारा भत्ता

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बिलासपुर। भरण-पोषण (गुजारा भत्ता) ला लेके बिलासपुर हाई कोर्ट ह एक ठन बहुते महत्वपूर्ण फैसला सुनाय हे। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के सिंगल बेंच ह साफ कहिस हे कि जदि कउनो पत्नी ह बिना कउनो ठोस अऊ वाजिब कारन के अपन पति ले अलग रहत हे, त ओहा भरण-पोषण के अधिकारी नइ राहय। हाई कोर्ट ह पत्नी के याचिका ला खारिज करत हुए परिवार न्यायालय के फैसला ला सही ठहराय हे।

हाई कोर्ट ह अपन ऐतिहासिक फैसला म किहिस कि न्याय के आधार सिरिफ बिहाव के संबंध नइ, बल्कि आपसी आचरण घलो होही। जदि मेहरारू ह अपन मर्जी ले ससुराल अऊ पति ला छोड़ के अलग रहत हे, त ओला मासिक गुजारा भत्ता नइ दिये जाय।

पत्नी ह लगाय रहिस दहेज प्रताड़ना के आरोप ए मामला म पत्नी ह अपन पति अऊ ससुराल वाला मन ऊपर दहेज बर तंग करे के आरोप लगाय रहिस। ओकर कहना रहिस कि बिहाव के चार दिन बादे ओकर ले कार अऊ 10 लाख रुपिया के मांग करे गिस अऊ ओला मार-पीट के संग मानसिक रूप ले घलो प्रताड़ित करे गिस। ए मामला म ओहा एफआईआर दर्ज कराय बर घलो अर्जी दे रहिस, जेला निचली अदालत ह खारिज कर दे रहिस।

कोर्ट ह काबर खारिज करिस याचिका? मामला के सुनवाई के बखत कोर्ट ह पाइस कि जब पति ह ‘हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9’ के तहत साथ रहे बर याचिका लगाय रहिस, तब पत्नी करा वापस घर जाय के मउका रहिस। पर ओहा वापस नइ गिस। हाई कोर्ट ह किहिस कि ‘दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(4)’ म स्पष्ट लिखे हे कि जदि पत्नी बिना कउनो पर्याप्त कारन के अलग रहत हे, त ओहा भरण-पोषण के हकदार नइ होवय। परिवार न्यायालय के फैसला म कउनो गलती नइ पावत हुए हाई कोर्ट ह ओला बरकरार राखिस।

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OneCG एक्सक्लूसिव रिपोर्ट OneChhattisgarh.Com
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