उद्घाटन के पहिली ही भारतमाला सड़क के हाल-बेहाल 6-लेन सड़क मा आईस 35 मीटर लम्बा दरार
Bharatmala Project Chhattisgarh : रायपुर: छत्तीसगढ़ मा रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत बनत भारतमाला परियोजना के सड़क निर्माण मा बड़े लापरवाही अउ भ्रष्टाचार के पोल खुल गे हे। ए 6-लेन एक्सप्रेस-वे अभी आम जनता के यातायात बर खुले घलो नइ हे अउ उद्घाटन ले पहिली ही सड़क मा कई फीट लंबी दरार मन आ गे हें। एनएच-130 सीडी के सरगी-बासनवाही सेक्शन मा कोंडागांव के पास करीब 35 मीटर तक सड़क बीच ले फट गे हे।
चौंकाए वाला बात ए हे कि एही रस्ता मा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के ‘ड्राइव टेस्ट’ के तैयारी चलत रिहिस। कांकेर जिला मा बासनवाही अउ मावलीपारा के बीच सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गे हे। ए बड़े लापरवाही सामने आए के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) हा आनन-फानन मा सीमेंट भर के दरार मन ला लुकाए-छिपाए के काम शुरू कर दे हे। ए सड़क के निर्माण भोपाल के दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड (डीबीएल) हा करे हे, जेकर लगे आने वाले 15 साल तक एखर रखरखाव अउ मरम्मत के जिम्मेदारी हे।
बारिश के देथ हें अजीबोगरीब बहाना
मामला मा एनएचएआई हा अजीबोगरीब तर्क देवत कहे हे कि लगातार होवत भारी बारिश के सेती सड़क के शोल्डर धंस गे हे, जेकर ले मुख्य लेन मा दरार आ गे हे। बताए बर देवब कि रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर मा छत्तीसगढ़ के 125 किलोमीटर हिस्सा के कुल लागत करीब 4,145 करोड़ रूपया हे। ए एक्सप्रेस-वे हा छत्तीसगढ़, ओडिशा अउ आंध्र प्रदेश ला जोड़त विशाखापट्टनम बंदरगाह तक सीधा व्यापारिक रस्ता उपलब्ध कराही।
अधिकारी मन के का कहना हे?
“सड़क मा आए दरार ला ठीक करे बर निर्माण कंपनी ला निर्देश दे दे गे हे। अभी के बर अस्थायी सुधार के काम चलत हे, अउ बारिश के मौसम सिराए के बाद स्थायी निर्माण कराए जाही।”
— शमशेर सिंह, परियोजना निदेशक (पीआईयू अभनपुर), एनएचएआई
का हे रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर?
रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर केंद्र सरकार के बड़े योजना ‘भारतमाला परियोजना’ के हिस्सा ए। एखर मकसद छत्तीसगढ़ ला आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम पोर्ट ले बढ़िया सड़क संपर्क देना, सामान के आवक-जावक ला तेज करना अउ व्यापार ला बढ़ावा देना ए। ए कॉरिडोर के तहत छत्तीसगढ़ मा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनाए जात हे, जेकर एनएच-130 सीडी (NH-130 CD) सरगी-बासनवाही सेक्शन मा उद्घाटन ले पहिली ही 35 मीटर लंबी दरार आ जाए ले निर्माण के गुणवत्ता अउ अधिकारी मन के निगरानी पर बड़े सवाल खड़े होगे हें।



