होम › Technology › Bhadrapada Purnima 2026 : भाद्रपद पूर्णिमा पर क्यों रखा जाता है व्रत? राजा पृथु से जुड़ी है पौराणिक कथा, जानें पूजा और दान का महत्व
Technology

Bhadrapada Purnima 2026 : भाद्रपद पूर्णिमा पर क्यों रखा जाता है व्रत? राजा पृथु से जुड़ी है पौराणिक कथा, जानें पूजा और दान का महत्व

WhatsApp Facebook
Bhadrapada Purnima 2026 : भाद्रपद पूर्णिमा पर क्यों रखा जाता है व्रत? राजा पृथु से जुड़ी है पौराणिक कथा, जानें पूजा और दान का महत्व

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

40228-untitled Bhadrapada Purnima 2026 : भाद्रपद पूर्णिमा पर क्यों रखा जाता है व्रत? राजा पृथु से जुड़ी है पौराणिक कथा, जानें पूजा और दान का महत्व

Bhadrapada Purnima 2026 : धर्म डेस्क। हिंदू पंचांग में भाद्रपद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, स्नान, दान और कथा श्रवण की परंपरा है। कई घरों और मंदिरों में इस अवसर पर सत्यनारायण भगवान की कथा भी कराई जाती है। भाद्रपद पूर्णिमा की खासियत यह है कि इसके अगले दिन से पितृ पक्ष की शुरुआत होती है।

राजा पृथु ने क्यों रखा था पूर्णिमा व्रत?

पौराणिक कथा के अनुसार राजा पृथु धर्मपरायण और प्रजा के हित को सर्वोच्च मानने वाले राजा थे। राज्य में सुख-समृद्धि होने के बावजूद वह चाहते थे कि उनकी प्रजा पर भगवान की कृपा बनी रहे। इसी उद्देश्य से उन्होंने ऋषियों से ऐसे व्रत के बारे में पूछा, जिससे लोगों के जीवन में सुख-शांति बनी रहे। ऋषियों ने राजा पृथु को पूर्णिमा व्रत का महत्व बताया। उन्होंने भगवान विष्णु का स्मरण, पूजा, कथा श्रवण और जरूरतमंदों को भोजन व दान करने की सलाह दी।

राजा पृथु ने विधि-विधान से किया व्रत

ऋषियों की सलाह मानकर राजा पृथु ने पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान किया और भगवान विष्णु की पूजा की। इसके बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया तथा अन्न और वस्त्र का दान किया। पूरे दिन भगवान विष्णु का स्मरण करने के बाद उन्होंने शाम को विधि-विधान से पूजा कर अपने राज्य और प्रजा के कल्याण की प्रार्थना की।

धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा पृथु की श्रद्धा और सेवा से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें राज्य में सुख-समृद्धि तथा प्रजा के कल्याण का आशीर्वाद मिला। इसके बाद राजा नियमित रूप से पूर्णिमा का व्रत करने लगे।

भाद्रपद पूर्णिमा पर ऐसे करें पूजा

भाद्रपद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने और पूजा स्थल की सफाई करने की परंपरा है। भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर पीले फूल, फल और तुलसी अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र का जाप और व्रत कथा का श्रवण किया जाता है। इच्छानुसार घर में सत्यनारायण भगवान की कथा भी कराई जा सकती है। पूजा के अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा

पूर्णिमा की रात चंद्रमा के दर्शन के बाद उन्हें जल से अर्घ्य देने की परंपरा है। कई श्रद्धालु जल में दूध और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार कुछ लोग चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं।

पितृ पक्ष से भी है खास संबंध

भाद्रपद पूर्णिमा के अगले दिन से पितृ पक्ष शुरू होता है। इस दौरान पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। इसलिए भाद्रपद पूर्णिमा को पितृ पक्ष से पहले की महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ जरूरतमंदों को भोजन कराने और सामर्थ्य के अनुसार दान करने की भी परंपरा है।

Source: Nishaanebaz

Nishaanebaz
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
मूल लेख पढ़ें ↗
दोस्तों के साथ साझा करें
📰 सम्बन्धित समाचार

यह भी पढ़ें (सम्बंधित ख़बरे)