राष्ट्रपति भवन के न्योता पाती मा छाइस बस्तर के 300 साल पुरना ‘झिटकू-मिटकी’ कला
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कला अउ संस्कृति ला देस भर मा भारी बड़े पहचान मिले हे। बस्तर के करीब 300 साल पुरना लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ अब राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के खास न्योता पाती (निमंत्रण पत्र) के हिस्सा बन गे हे। राष्ट्रपति भवन कोती ले भेजे जात ‘एट होम’ (At Home) आमंत्रण पत्र मा बस्तर के पारंपरिक कला ला सामिल करे गे हे।
ए न्योता पाती मा झिटकू-मिटकी के कहानी ला बस्तर के नामी पिटवा कला अउ ढोकरा (बेल मेटल) शिल्प के जरिया ले देखाय गे हे। ए पहिली पल्ट ए कि बस्तर के ए लोककला ला देस के सबले बड़े अउ नामी आयोजन के न्योता पाती मा जगा मिले हे।
बस्तर के संस्कृति ला मिलिस देस भर मा मंच
झिटकू-मिटकी के कहानी बस्तर के लोक परंपरा अउ जनजातीय संस्कृति ले जुड़े हे। ए ह खाली एकठान मया के कहानी नो हे, भलुक बस्तर के समाज, रीति-रिवाज अउ मया-पिरीत ला देखाये के एकठो ऐतिहासिक लोकगाथा ए।
ढोकरा कला मा झिटकू-मिटकी के रूप-रंग ला अब्बड़ दिन ले बनाये जात हे। बस्तर के कलाकार मन अपन मेहतन अउ पारंपरिक तरीका ले ए कलाकृति ला बनाथें। अब राष्ट्रपति भवन के न्योता पाती मा जगा मिले ले ए कलाकार मन ला अउ ओंकर कला ला नवा पहचान मिलही।
करीब तीन सौ साल पुरना ए मया के कहानी
झिटकू-मिटकी के लोकगाथा करीब 300 साल पुरना माने जाथे। बस्तर के गाँव-गाँव मा आज घलो ए कहानी ला लोकगीत अउ कला के धुन मा याद करे जाथे।
ए गाथा मा मया, त्याग अउ सामाजिक सोच के झलक मिलथे। एही पाए के बस्तर के मनखे मन बर झिटकू-मिटकी खाली कहानी नो हे, भलुक ओंकर सांस्कृतिक सुवासा अउ धरोहर ए।
राष्ट्रपति ला घलो दे गे रिहिस ए कलाकृति
कुछू दिन पहिले राष्ट्रपति भवन मा रखे गे एकठो कार्यक्रम मा छत्तीसगढ़ कोती ले झिटकू-मिटकी के ढोकरा कलाकृति राष्ट्रपति ला भेंट करे गे रिहिस।
अब ओही कला ला स्वतंत्रता दिवस के सरकारी न्योता पाती मा सामिल करे गे हे। एकर ले साफ समझ आथे कि बस्तर के पारंपरिक कला अब राज्य के सीमा ले बाहिर निकल के देस के सांस्कृतिक पहचान बनत जावत हे।
कलाकार अउ छत्तीसगढ़ बर गरब के बेरा
ए उपलब्धि ले बस्तर के कलाकार मन मा भारी उत्साह अउ उमंग हे। ओंकर कहना हे कि राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे ए कला आवे वाला पीढ़ी ला अपन परंपरा ले जोड़े मा मदद करही।
प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप घलो एला छत्तीसगढ़ बर भारी गरब के बात बताइन। ओमन कहिन कि झिटकू-मिटकी के लोकगाथा बस्तर के पहिचान ए अउ एला देस भर मा सम्मान मिलना पूरा छत्तीसगढ़ बर गरब के बात ए।
पूरा देस देखही बस्तर के कला के रूप-रंग
राष्ट्रपति भवन के न्योता पाती मा बस्तर के कला ला सामिल करना खाली एकठो सम्मान नो हे, भलुक ए ह पूरा देस मा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक धरोहर ला नवा पहचान देवाये के मौका घलो ए।
बस्तर के माटी ले जुड़े ए कला अब स्वतंत्रता दिवस जइसे राष्ट्रीय परब के जरिया ले पूरा देस के आघू मा अपन अगाध पहचान बनाही।



