होम Chhattisgarh Barsur Twin Ganesha Temples Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बारसूर में दुनिया का इकलौता मंदिर जहां जुड़वा हैं गणेश, बाणासुर से जुड़ा है दिलचस्प किस्सा
Chhattisgarh

Barsur Twin Ganesha Temples Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बारसूर में दुनिया का इकलौता मंदिर जहां जुड़वा हैं गणेश, बाणासुर से जुड़ा है दिलचस्प किस्सा

WhatsApp Facebook
Barsur Twin Ganesha Temples Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बारसूर में दुनिया का इकलौता मंदिर जहां जुड़वा हैं गणेश, बाणासुर से जुड़ा है दिलचस्प किस्सा

For latest updates, join our official groups:

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

38893-barsur-twin-ganesh-temple-chhattisgarh-history Barsur Twin Ganesha Temples Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बारसूर में दुनिया का इकलौता मंदिर जहां जुड़वा हैं गणेश, बाणासुर से जुड़ा है दिलचस्प किस्सा

रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक नगरी बारसूर अपने भीतर कई अनसुलझे रहस्य और प्राचीन इतिहास समेटे हुए है। इंद्रावती नदी के तट पर बसा यह वही स्थान है, जो दुनिया के इकलौते जुड़वा गणेश मंदिर (Twin Ganesh Temple Barsur) के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां बालू पत्थरों से निर्मित भगवान गणेश की दो विशालकाय प्रतिमाएं एक ही स्थान पर स्थापित हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

मंदिर की विशेषता और जुड़वा प्रतिमाओं का रहस्य

बारसूर के इस प्राचीन गणेश मंदिर में दो मूर्तियां हैं, जो इसे दुनिया में सबसे अलग बनाती हैं। यहां स्थापित मुख्य बड़ी मूर्ति की लंबाई लगभग साढ़े सात फीट है। इसके ठीक पास में लगभग साढ़े पांच फीट लंबी दूसरी प्रतिमा मौजूद है। इसे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा भी माना जाता है।

लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर एक ही मंदिर में दो-दो मूर्तियां क्यों और कैसे स्थापित हुईं? इसका जवाब जुड़ा है पौराणिक राजा बाणासुर के इतिहास से।

राजा बाणासुर और उनकी बेटी उषा की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस नगर का नाम असुर राज बाणासुर के नाम पर ही ‘बारसूर’ पड़ा था। बाणासुर की एक पुत्री थी जिसका नाम उषा था। उषा की परम सहेली और उनके मंत्री की पुत्री चित्रलेखा थीं। दोनों ही भगवान गणेश की अनन्य भक्त थीं, लेकिन आसपास कोई गणेश मंदिर न होने के कारण वे मन ही मन उनकी आराधना करती थीं।

जब राजकुमारी उषा ने अपनी यह इच्छा अपने पिता बाणासुर को बताई, तब राजा ने अपनी बेटी और उसकी सहेली के लिए गणेश जी की इन दो भव्य मूर्तियों का निर्माण करवा दिया। तभी से मान्यता है कि यहाँ जो भी भक्त सच्चे मन से आता है, गणपति उसकी हर मनोकामना पूरी करते हैं।

अनिरुद्ध और उषा के प्रेम प्रसंग से जुड़ा महायुद्ध

बाणासुर भगवान शिव का परम भक्त था और उसने कठिन तपस्या कर शिव से अपने राज्य की रक्षा का वरदान मांगा था। साथ ही उसने यह भी इच्छा जताई थी कि वह किसी ऐसे शक्तिशाली राजा से युद्ध करना चाहता है, जो उसके बराबर का हो।

38894-barsur-twin-ganesh-temple-chhattisgarh-history-01 Barsur Twin Ganesha Temples Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बारसूर में दुनिया का इकलौता मंदिर जहां जुड़वा हैं गणेश, बाणासुर से जुड़ा है दिलचस्प किस्सा

एक दिन राजकुमारी उषा को सपने में एक राजकुमार दिखा जिससे उसे प्रेम हो गया। चित्रलेखा ने अपनी जादुई शक्तियों से भगवान कृष्ण के पोते अनिरुद्ध को पहचान लिया और उन्हें जादुई रूप से बाणासुर के महल में ले आई।

जब बाणासुर को इस प्रेम प्रसंग का पता चला, तो उसने गुस्से में आकर अनिरुद्ध को बंदी बना लिया। इसके बाद भगवान कृष्ण और बाणासुर के बीच बारसूर में एक भयंकर और घमासान युद्ध हुआ।

युद्ध के दौरान जब श्रीकृष्ण बाणासुर का वध करने वाले थे, तब भक्त की रक्षा के लिए स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए। बाणासुर को अपनी गलती का अहसास हुआ, उसने क्षमा मांगी और अंततः उषा व अनिरुद्ध का विवाह संपन्न हुआ।

Source: Nishaanebaz

Nishaanebaz
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
मूल लेख पढ़ें ↗
दोस्तों के साथ साझा करें
📰 सम्बन्धित समाचार

यह भी पढ़ें (सम्बंधित ख़बरे)