पहिली हमन ला गोली मारो, फेर बंधक बनाओ, का आय ए बोधघाट परियोजना, जेकर बर 50 साल ले रार मचाय हें आदिवासी मन
bodhghat project bastar : दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ के बस्तर म कतको बछर ले अटके बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना ला फिर से सुरू करे के सरकारी कोसिस ह एक बार फिर बड़ जन-आक्रोश ला जनम दे दे हे। दंतेवाड़ा जिला के बारसूर कना हितलकुडुम गांव म बड़ महापंचायत म हजारों आदिवासी मन ह साफ चेतावनी दे हें कि ‘पहले हमन ला गोली मारो, फिर बांध बनाओ’।
ए परियोजना ले प्रभावित होय वाले 56 गांव के रहइया मन ह दो टूक कह दे हें कि वो मन कूनो घलो कीमत म अपन जमीन, जंगल अउ कतको बछर पुराना पूजनीय धार्मिक थल मन ला बूड़न नहीं देवें। 18 ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि मन ए रैली म अपन पारंपरिक देवी-देवता अउ धार्मिक परतीक मन के संग विरोध जताए बर पहुंचे राहिन।
का आय बोधघाट परियोजना?
बोधघाट बहुउद्देशीय परियोजना दंतेवाड़ा जिला म बारसूर कना इंद्रावती नदी म बने बर तय एक जलविद्युत अउ सिंचाई परियोजना आय। एकर परिकल्पना पहली बार साल 1979 म करे गे राहिस, जेकर मुख्य उद्देस्य पूरा बस्तर संभाग म बिजली उत्पादन अउ सिंचाई के सुबिधा ला बढ़ाना राहिस। हालांकि, बड़ पैमाना म होय वाले बिस्थापन, घने जंगल मन के बूड़े अउ पचरा (पर्यावरण) ला होय वाले भारी नुकसान के सेती ए प्रोजेक्ट ह पाछू के 50 बछर ले अटके राहिस। हाल ही म राज्य सरकार कोति ले एकर सर्वे फिर सुरू करे के खबर ह बस्तर के ए सबले पुराना बिबाद ला फिर ले जिंदा कर दे हे।
बिनास के योजना के आरोप
बिरोध करत लोगन मन के दावा हे कि ए बड़ बांध के बने ले दंतेवाड़ा, बीजापुर, बस्तर अउ नारायणपुर जिला के कतको गांव पूरा तरीका ले तबाह हो जाहीं। अनुमान के मुताबिक, ए परियोजना के सेती 16,000 हेक्टेयर ले जादा के वन भूमि जलमग्न हो जाही अउ हजारों आदिवासी मन ला बेघर होना पड़ही। महापंचायत म सामिल होय बीजापुर के बिधायक बिक्रम मंडावी ह सरकार ला घिरत हुए कहिस कि एक कोति बिकास के गोठ होवत हे, त दूसर कोति बस्तर ला उजाड़े के तैयारी करे जात हे। ओ मन दावा करिन कि ए परियोजना ले 50,000 ले जादा लोगन मन सीधे तौर पर प्रभावित होहीं।
ए आंदोलन अउ ग्रामीण मन के मांग:
ग्रामीण मन ह राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ला एक ज्ञापन सउंप के अपन आपत्ति दरज कराए हें।
आरोप हे कि पेसा (PESA) कानून अउ वन अधिकार अधिनियम के तहत बिना ग्राम सभा मन के लिखित सहमति के चोरी-छिपे तरीका ले सर्वे के काम ला फिर सुरू कर दे गे हे।
बोधघाट संघरस समिति ह मांग करे हे कि जब तक परियोजना के पूरा जानकारी गांव वाले मन के संग साझा नहीं करे जाय, तब तक जम्मो काम ला तुरंत रोके जाय।
आदिवासी मन ह पेसा नियम 2022 के तहत संसाधन योजना अउ प्रबंधन समिति मन के प्रावधान ला लागू करे के घलो मांग उठाए हें।
आदिवासी मन के मुताबिक, एहा सिरिफ जमीन या मुआवजा के मुददा नो हे, बल्कि ओ मन के सांस्कृतिक पहचान अउ पुरखा मन के विरासत ला बचाए के लड़ाई आय।


