डोंगरगढ़ माता मंदिर के सालाना आय 17 करोड़ रुपिया, लेकिन पुजारी मन के कम वेतन ऊपर सवाल
Temple Priest Salary Issue : रायपुर। सुप्रीम कोर्ट म एक ठन पीआईएल (जनहित याचिका) दायर करे गे हे, जेन ह भक्त अउ भगवान ला लेके हे। ए याचिका म मंदिर के पुजारी मन ला मिले वइया मानदेय (दरमहा) ऊपर बड़का सुवाल उठाए गे हे। मतलब ये कि मंदिर मन के कमाई तो करोड़ों म हे, सरलग अड़बड़ जादा हे, पर ओकर तुलना म उहां दिन-रात सेवा करे वइया पुजारी मन ला बहुते कम पइसा मिलथे। छत्तीसगढ़ के सबले नामी अउ संसो के बड़े केंद्र डोंगरगढ़ के माता बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट के कमाई अउ उहां के पुजारी मन के दरमहा म घलो अइसनेच बड़का अंतर सामने आए हे।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिला के डोंगरगढ़ म विराजमान मां बम्लेश्वरी के मंदिर ह मनखे मन के आस्था के सबले बड़ केंद्र हे। परधानमंत्री नरेंद्र मोदी घलो इहां आके माता के दरस कर चुके हें। मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर ट्रस्ट ला परदेस के सबले अमीर मंदिर ट्रस्ट मन म गिने जाथे। बताए जाथे कि ए ट्रस्ट के साला आनी कमाई करीब साढ़े 17 करोड़ रुपिया हे। पर, ए सब के बीच बड़का बात ये हे कि मंदिर म सेवा दे वइया पुजारी मन ला सिरिफ 6 ले 9 हजार रुपिया तक च मानदेय दिए जावत हे।
कम दरमहा ऊपर उठे लागिस सुवाल
मंदिर ट्रस्ट म लगभग 350 कर्मचारी मन बूता (काम) करथें, जेम करीब 27 पुजारी सामिल हें। पुजारी मन के कहना हे कि दिनभर पूजा-पाठ, आरती अउ धार्मिक काम म सेवा दे के बाद घलो ओमन ला एतका कम पइसा मिलथे, जेकर से परिवार के पेट पालना अउ गुजारा करना घलो गरु (मुश्किल) हो गे हे। कुछ पुजारी मन ला तो रोज के हिसाब ले सिरिफ 200 ले 300 रुपिया च मिल पाथे। कानून के जानकार मन के कहना हे कि यदि कोनो संस्था नियमित रूप ले कर्मचारी मन ले काम लेथे, त ओला न्यूनतम वेतन अधिनियम (Minimum Wages Act) के नियम मन के पालन करना चहिए।
कइसने होथे ट्रस्ट के बड़का कमाई?
ट्रस्ट के कमाई के साधन घलो बहुते बड़े-बड़े हें। जेम श्रद्धालु मन के चढ़ावा-दान, रोपवे के टिकट, मंदिर परिसर के दुकान मन के भाड़ा, धर्मशाला के कमाई अउ विज्ञापन सामिल हें। बताए जाथे कि सिरिफ रोपवे ले च हर साल करीब 4 करोड़ रुपिया के कमाई होथे। हालांकि, ए बात ऊपर ट्रस्ट के कहना हे कि मंदिर के देख-रेख, नवां निर्माण, प्रसाद के ब्यवस्था, धार्मिक आयोजन अउ सबो कर्मचारी मन के दरमहा म बड़का रकम खरच घलो होथे।
का कहना हे ट्रस्ट प्रबंधन के?
ए पूरा मामला म ट्रस्ट प्रबंधन के अपन पच्छ हे। ओमन के कहना हे कि पुजारी मन ला सिरिफ मानदेय च नहीं मिले, बल्कि ओमन ला अउ घलो कई ठन सुबिधा अउ कमाई के मौका मिलते। ट्रस्ट के मुताबिक, आरती अउ पूजा के बखत जेन दक्छिणा (दक्षिणा) मिलते, ओला पुजारी मन च रखथें। एकर अलावा मंदिर परिसर के बाहर धार्मिक अनुष्ठान अउ पूजा-पाठ कराके घलो पुजारी मन अतरिकत कमाई कर लेथें। नवरात्रि जैसे बड़े मेला अउ आयोजन म घलो पुजारी मन ला बिसेस लाभ मिले के बात कहे जावत हे।
PIL के बाद देसभर म बहस तेज
सुप्रीम कोर्ट म याचिका दायर होए के बाद अब देसभर म मंदिर के पुजारी मन के दरमहा अउ ओमन के सामाजिक सुरक्षा ला लेके बहस सरलग तेज हो गे हे। कतको राज मन म पुजारी मन ला नियमित दरमहा, पेंशन अउ श्रमिक अधिकार देके मांग उठत रही हे। डोंगरगढ़ के ए मामला म घलो श्रम कानून के तहत न्यूनतम वेतन तय करे के मांग करे जावत हे। याचिका म मांग करे गे हे कि पुजारी मन ला घलो श्रमिक (मजदूर) मानके ओमन ला कानून के तहत सही वेतन मिलना चहिए।



