बिना लैब जांच के तहसील भवन ला खतनाक बताइन, अब तोड़े के तइयारी, 11.50 करोड़ के खेल के आरोप
CG News : रायपुर। रायपुर के शास्त्री चौक म बने पुराना तहसील दफ्तर भवन ला लेके बड़हन विवाद खड़ा होगे हे। लोक निर्माण विभाग (PWD) ह ए इमारत ला जर्जर बताके ओला ढहाए के तइयारी सुरू कर दे हे। सबले बड़ सवाल ए उठत हे कि जेन्ते भवन ला तोड़े के बात कहे गिस, ओकर कोनो आफीशियल इंजीनियरिंग लैब ले स्ट्रक्चरल जांच तक नई कराए गिस अउ न कोनो वैज्ञानिक फिजिबिलिटी टेस्ट होइस। एकर बाद घलो सोझ कत कूट (डिसमेंटलिंग) के प्रस्ताव बनाके 11.50 करोड़ रूपिया के नवा भवन बर प्रशासनिक मंजूरी घलो ले लीस। अब आरोप लागत हे कि ए मामला सिरिफ सुरक्षा के नई हे, बल्कि करोड़ों रूपिया के निर्माण बजट के खेल ले जुड़े हे।
तय होगे इमारत के किस्मत: कागज-दस्तावेज के मुताबिक PWD के उप अभियंता, एसडीओ अउ कार्यपालन अभियंता ह संग म जाके देख-रेख करिन अउ भवन ला बेकार घोसित कर दिन। रिपोर्ट म डीपीसी खराब होए, सीलन, भितिया मन म टूट-फूट अउ भवन के जुन्ना होए के हवाला दे गे हे।
पर चकित करे मज्जा के बात ए हे कि अतका बड़हन कारबाही सिरिफ आंखी म देखके (विजुअल निरीक्षण) आगे बढ़ा दे गिस। कहुं भी ए बात के जिकर नई हे कि भवन के नेव (नींव), वजन सहे के छमता, स्ट्रक्चरल मजबूती या सामान मन के जांच कोनो विशेषज्ञ संस्था ले कराए गे होय।
112 साल जुन्ना बताए के आधार का हे?
PWD के रिपोर्ट म भवन ला बछर 1914 के बने यानी 112 साल पुराना बताए गे हे। दावा हे कि एहा अंग्रेज मन के जमाना के इमारत ए अउ ईंटा-चूना ले बने हे।
पर सवाल ए उठत हे कि भवन के उमिर तय करे के आधार का हे? का कोनो राजस्व रिकॉर्ड, नगर निगम के कागज, निर्माण रजिस्टर या कोनो सरकारी सरटीफिकेट हे? दस्तावेज म अइसन कोनो सुबूत नई मिले हे। आरोप हे कि अफसर मन ह अपन मनमर्जी ले भवन ला “112 साल पुराना” घोसित कर दिन।
धरोहर बचाए के जगा तोड़े के हबबड़ी काबर?
जानकार मन के मानना हे कि अंग्रेज जमाना के कतकोन इमारत मन आज घलो मजबूती ले ठाढ़े हें अउ वैज्ञानिक रेट्रोफिटिंग (सुधार) करके ओला कतकोन बछर तक सुरक्षित रखे जा सकत हे। अइसन म सवाल उठत हे कि का ए भवन ला हेरिटेज स्ट्रक्चर मानके बचाए के कोनो विचार करे गिस?
का कोनो आर्किटेक्ट, हेरिटेज जानकार या संरक्षण एजेंसी ले सलाह लीस? कागज बताथें कि अइसन कोनो कोसिस नई भिस। एकर उलटा संचो-संच फाइला आगे बढ़िस, भवन तोड़े के संस्तुति होइस अउ नवा माडर्न तहसील दफ्तर बर 11.50 करोड़ रूपिया के मंजूरी घलो मिल गे।
प्रमाण पत्र घलो साफ कर दिस रस्ता: कार्यपालन अभियंता अउ कलेक्टर दफ्तर कोति ले जारी सरटीफिकेट म साफ लिखे हे कि भवन के अब कोनो दूसर विभाग ला जरूरत नई हे अउ एला तोड़े जाना जरूरी हे।
याने प्रशासनिक स्तर म घलो इमारत ला हटाए के पूरा रस्ता साफ कर दे गे हे। पर इहां घलो बड़ सवाल एहे हे कि का जनता के संपत्ति अउ ऐतिहासिक धरोहर के फैसला सिरिफ विभागीय नोटशीट अउ सरटीफिकेट के भरोसा म लिए जा सकत हे?
RTI के कागज मन ले मचिस हड़कंप: ए मामला म छत्तीसगढ़ नागरिक कल्याण समिति के सचिव अविनाश साहू ह RTI के जरिया कागज मन ला निकारिस हे। ओकर आरोप हे कि पूरा काम म कतकोन गंभीर गड़बड़ी हे।
ओ मन के कहना हे कि जदि भवन 100 साल ले जादा जुन्ना हे त ओला तोड़े बर विशेष नियम अपनाए जाना रिहिस। पर इहां न कोनो लैब रिपोर्ट हे, न तकनीकी जांच, न कोनो आजाद विशेषज्ञ के राय। सिरिफ तीन अफसर मन के रिपोर्ट के आधार म करोड़ों रूपिया के नवा निर्माण प्रस्ताव ला आगे बढ़ा दे गिस।
अब उठत हे ए 5 बड़हन सवाल:
-
लोक निर्माण विभाग संभाग क्रमांक-1 ला तहसील भवन के जांच करे के आदेश कब जारी होइस?
-
भवन ला जादा जर्जर बताए बर कोनो लैबोरेटरी या तकनीकी औजार के रिपोर्ट कहां हे?
-
भवन ला 112 बछर पुराना बताए के सरकारी सुबूत का हे?
-
कलेक्टर रायपुर ह कोन से नियम के तहत डिसमेंटल सरटीफिकेट जारी करिन?
-
का कोनो हेरिटेज या स्ट्रक्चरल विशेषज्ञ ले अलग से राय लीस?
सवाल सिरिफ भवन के नई, सिस्टम के घलो हे: पूरा मामला अब सिरिफ एक पुराना तहसील भवन के नई रह गे हे। सवाल सरकारी संपत्ति के देखरेख, तकनीकी पारदर्शिता अउ करोड़ों रूपिया के निर्माण मंजूरी के तरीका ऊपर उठत हे।
बिना वैज्ञानिक जांच के अतका बड़हन कारबाही संदेह पैदा करत हे। अब देखना ए हे कि सरकार एकर ककरो ले स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाथे या फिर अंग्रेज जमाना के ए इमारत सोझ बुलडोजर के भेंट चढ़ जाही।



