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महंगाई के ‘मिसाइल’ अटैक! ईरान जंग ले कैसे बिगड़ही भारत के GDP के गणित; का पेट्रोल-डीजल के दाम फिर लगाही आगी?

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Iran Israel War 2026 : नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहरात जुद्ध के बादर ह भारत के आर्थिक सेहत बर चिंता बढ़ा दे हे। ईरान अउ इजराइल के बीच बढ़त टकराव के सेती अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) के कीमत ह अचानक उछल के 94 डॉलर प्रति बैरल ला पार कर गे हे। जानकार मन के मानना हे कि यदि ये तनाव लंबा खिंचिस, त भारत में महंगाई अउ विकास दर (GDP) के आंकड़ा मन ऊपर एखर बड़का असर पड़ सकथे।

महंगाई ऊपर सीधा प्रहार: 0.50% तक बढ़ सकथे बोझ
भारत ह अपन जरूरत के 85% ले जादा कच्चा तेल विदेस ले मंगवाथे। अइसन में तेल के कीमत में कोनो भी बढ़ोत्तरी सीधा हमर बजट ला बिगाड़ देथे।

HDFC बैंक के अनुमान: बैंक के इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता के मुताबिक, यदि कच्चा तेल के औसत कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल रहिथे, त महंगाई 0.20% बढ़ सकथे। फेर यदि स्थिति अउ बिगड़िस, त ये उछाल 0.50% ले जादा घलो हो सकथे।

जेब ऊपर असर: अब पेट्रोल अउ डीजल के भाव ह हमर महंगाई के आंकड़ा (CPI) में जादा असर डारथे। तेल के दाम में थोड़किन घलो बदलाव आम आदमी के जेब ऊपर अब पहिली ले जादा भारी पड़ही।

GDP अउ ग्रोथ ऊपर ‘ब्रेक’ लगे के डर
तेल के बढ़त कीमत ह सिर्फ महंगाई नई, बल्कि देश के विकास के रफ्तार ला घलो धीमा कर सकथे।

RBI के विश्लेषण: भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, यदि कच्चा तेल के दाम 10% बढ़थे, त देश के रियल GDP ग्रोथ में 0.15% के गिरावट आ सकथे।

सप्लाई में बाधा: बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस के मानना हे कि जादा दिन तक तनाव रहे ले सामान के आवाजाही (Supply Chain) प्रभावित होही, जेखर ले आर्थिक तरक्की कम हो जाही।

का पेट्रोल-डीजल होही महंगा?
सबले बड़े सवाल ये हे कि का हमर बर तेल महंगा होही?

राहत के उम्मीद: जानकार मन के कहना हे कि सरकार अभी तुरंत पेट्रोल-डीजल के दाम नई बढ़ाही, ताकि जनता ला राहत मिल सकय। एखर घाटा ला सरकारी तेल कंपनी मन अपन मार्जिन कम करके झेल सकथें।

सरकार के दखल: यदि कच्चा तेल 90 डॉलर के ऊपर टिके रहिथे, त सरकार ला टैक्स (Excise Duty) कम करे के जरूरत पड़ सकथे।

रुपया घलो हो सकथे कमजोर
भारत के आधा कच्चा तेल ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के रस्ता ले आथे, जउन ह जुद्ध के सेती सबले जादा खतरा में हे। यदि तेल महंगा होथे, त भारत ला विदेस ला जादा पैसा दे बर पड़ही, जेखर ले डॉलर के मुकाबला रुपया अउ कमजोर हो सकथे।

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