सेना के पैदल टुकड़ी मा अब महिला मन के होही एंट्री; सेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी बोलिन- हमन तैयार हन, बस समाज के सहमति के राह देखत हन’
Indian Army : नई दिल्ली : भारतीय सेना ह अब माई लोगन ला इन्फैंट्री यानी पैदल सेना मा सामिल करे बर पूरा तैयारी कर ले हे। सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ह कहिन कि सेना ह महिला मन ला ये बड़ जिम्मेदारी दे बर तैयार हे, बस अब समाज ला घलो अपन सोच बदले बर परही। ओ मन साफ कहिन कि महिला मन ला ‘कमजोर’ समझे के सोच ले अब बाहिर निकलना होही, काबर कि सेना के लछ्य (लक्ष्य) जेंडर न्यूट्रल होना हे।
काबिलियत हे असली पैमाना
मीडिया ले गोठबात करत जनरल द्विवेदी ह कहिन कि अगर पुरुष अउ महिला सैनिक मन के मानक (Standard) अउ काम करे के छमता एक बरोबर हे, अउ हमर समाज एला स्वीकार करे बर तैयार हे, त महिला मन ला कल के कल ‘कॉम्बैट रोल’ (लड़ाई के मैदान) मा भेज जा सकत हे। ओ मन कहिन कि सेना मा प्रदर्शन ही सबले बड़े पैमाना आय, कोनो ला अलग नजर ले नइ देखे जाय।
सेना मा महिला मन के संख्या बढ़ही
अअभी के समय मा भारतीय सेना मा करीब 8,000 महिला अधिकारी काम करत हें। एनडीए (NDA) मा अभी 60 महिला कैडेट हें अउ हर बछर 20 नवा महिला मन ला सामिल करे जावत हे। ओतकेच नइ, टेरिटोरियल आर्मी ला घलो महिला मन बर खोल दे गे हे। सेना के लछ्य हे कि 2032 तक महिला मन के भरती ला 12 गुना तक बढ़ाय जाय।
चुनौती अउ नवा तैयारी
सेना अध्यक्ष ह बताइन कि महिला अउ पुरुष बर एक बरोबर नियम होना जरूरी हे, पर मेडिकल अउ ऑपरेशनल कारन ले एला लागू करना अतका सहज नइ हे। धीरे-धीरे महिला मन ला पहले सपोर्टिंग आर्म्स, फेर कॉम्बैट आर्म्स अउ ओखर बाद स्पेशल फोर्सेस मा मौका दिये जाही। ये ह एक बड़े सामाजिक बदलाव के शुरुआत आय।
आत्मनिर्भर भारत कोति बढ़त कदम
जनरल द्विवेदी ह ये घलो बताइन कि आज सेना मा जेतका गोला-बारूद उपयोग होथे, ओखर 90% ले जादा हिस्सा हमर देश मा ही बनत हे। ये ह आत्मनिर्भर भारत के डहर मा एक बहुत बड़े कदम आय। संग मा ‘भैरव बटालियन’ अउ ‘दिव्यास्त्र बैटरी’ जइसे नवा यूनिट घलो बनाय गे हें, जे मन आधुनिक ड्रोन तकनीक ले सेना ला अउ मजबूत करही।
