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Mohan Bhagwat Bilaspur Visit: मोहन भागवत बोले- स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा, लेकिन संघ उनसे बड़ा,संघ केवल हिंदुओं का नहीं, देश का है,पढ़ें पूरी खबर आरएसएस प्रमुख ने और क्या कहा

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Mohan Bhagwat Bilaspur Visit: मोहन भागवत बोले- स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा, लेकिन संघ उनसे बड़ा,संघ केवल हिंदुओं का नहीं, देश का है,पढ़ें पूरी खबर आरएसएस प्रमुख ने और क्या कहा

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42930-mohan-bhagwat-bilaspur-visit Mohan Bhagwat Bilaspur Visit: मोहन भागवत बोले- स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा, लेकिन संघ उनसे बड़ा,संघ केवल हिंदुओं का नहीं, देश का है,पढ़ें पूरी खबर आरएसएस प्रमुख ने और क्या कहा

बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा है, लेकिन संघ स्वयंसेवकों से बड़ा है। उन्होंने संघ की तुलना समुद्र से करते हुए कहा कि जिस तरह समुद्र की पहचान उसकी बूंदों से होती है, उसी तरह स्वयंसेवक संघ की पहचान हैं। संघ का उद्देश्य राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए पूरे समाज को संगठित करना है।

डॉ. मोहन भागवत ने गुरुवार को बिलासपुर के कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग को संबोधित हुए कहा कि संघ केवल हिंदुओं के भले के लिए काम करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य पूरे राष्ट्र का हित है। उन्होंने स्वयंसेवकों से शुद्ध सात्विक प्रेम और सद्भाव के आधार पर समाज को एकजुट करने का आह्वान किया।

भागवत ने कहा कि संघ के कार्यकर्ताओं को अपने आचरण और कार्यों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। संघ का काम किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं, बल्कि समाज में अपनत्व बढ़ाना है।

पहले उपेक्षा हुई, फिर विरोध और अब जय-जयकार: भागवत

RSS प्रमुख ने संघ की स्थापना के बाद के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि 1925 में स्थापना के बाद शुरुआती दौर में संघ की उपेक्षा हुई, फिर विरोध का सामना करना पड़ा और अब उसकी जय-जयकार हो रही है। उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि अनुकूल माहौल में भी उन्हें अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।

उन्होंने शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। स्वयंसेवकों को लक्ष्य देते हुए कहा कि पहले किसी अनजान व्यक्ति को परिचित बनाएं, फिर उससे मित्रता करें और इसके बाद उसे स्वयंसेवक बनाने का प्रयास करें।

H₂O के उदाहरण से समझाया संघ और स्वयंसेवकों का संबंध

मोहन भागवत ने पानी का उदाहरण देकर स्वयंसेवकों और संघ के संबंध को समझाया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु से पानी बनता है। इसी तरह स्वयंसेवकों से संघ बनता है। स्वयंसेवकों के बिना संघ की ताकत नहीं है।

उन्होंने स्वयंसेवकों से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों को समझने की अपील की। उनके मुताबिक, डॉ. हेडगेवार का व्यक्तित्व स्वयंसेवकों के लिए आदर्श है।

आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए, नफरत नहीं

RSS प्रमुख ने लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य केवल राजनीतिक हित साधना या समाज में नफरत फैलाना नहीं होना चाहिए। आंदोलन समाधान निकालने के लिए होने चाहिए और सभी गतिविधियां संवैधानिक तथा कानूनी सीमाओं के भीतर रहकर की जानी चाहिए।

उन्होंने स्वयंसेवकों से कहा कि किसी एक कार्यकर्ता की गलती से पूरे संगठन की छवि प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसलिए प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने व्यवहार और जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना चाहिए।

शताब्दी वर्ष में शाखाओं का विस्तार करें

भागवत ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान शुरू किए गए कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखना है। संपर्क बढ़ाने और नई शाखाएं शुरू करने के प्रयास लगातार होने चाहिए।

उन्होंने संघ के तीन आधार—शाखा, कुटुंब और अपनत्व—का उल्लेख करते हुए इन्हें मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ के आनुषांगिक संगठन स्वतंत्र और स्वावलंबी हैं। जरूरत पड़ने पर संघ उन्हें वैचारिक मार्गदर्शन देता है।

बौद्धिक वर्ग में क्षेत्र संघ चालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना, प्रांत संघ चालक टोपलाल वर्मा सहित संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

एक साल में 2,311 नई शाखाएं

बौद्धिक वर्ग से पहले संघ पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि पिछले एक साल में 2,311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं और अब शाखाओं की कुल संख्या बढ़कर 5,500 हो गई है।

बैठक में अलग-अलग क्षेत्रों में शाखाओं के विस्तार के प्रयोगों की जानकारी भी साझा की गई। रायपुर के कार्यकर्ताओं ने बताया कि पावभाजी बेचने वाले लोगों को जोड़ने के लिए रात में शाखा शुरू की गई। इसे रात्रि शाखा का पहला प्रयोग बताया गया। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने 10 अलग-अलग स्थानों पर नई शाखाएं शुरू करने की जानकारी दी।

बौद्धिक वर्ग में मीडिया और मोबाइल पर प्रतिबंध

कार्यक्रम में संघ से जुड़े सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और डॉक्टर भी शामिल हुए। बौद्धिक वर्ग में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध था। इसमें शामिल होने के लिए पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रवेशिका जारी की गई थी। कार्यक्रम स्थल में प्रवेश से पहले सदस्यों के मोबाइल फोन भी बाहर जमा करा लिए गए थे।

आज दो सत्रों में बैठकें, नेता और मंत्री भी होंगे शामिल

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को संघ की दो सत्रों में बैठकें निर्धारित हैं। पहले सत्र में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा, अगले वर्ष की रणनीति और युवा वर्ग को संघ से जोड़ने के प्रयासों पर चर्चा होनी है।

बैठक में RSS और भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे नैरेटिव को लेकर भी रणनीति पर विचार किया जाना है। दूसरे सत्र में संघ पदाधिकारियों के साथ भाजपा संगठन के पदाधिकारी, नेता और मंत्री भी शामिल हो सकते हैं।

इन बैठकों में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने, संगठन के विस्तार और आगामी गतिविधियों की दिशा तय करने पर ध्यान रहेगा।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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