CG हाईकोर्ट के बड़े टिप्पणी: अपन मर्जी ले देह व्यापार करना अपराध नइ, तीन महिला मन के बरी होए के फैसला बरकरार
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ह देह व्यापार ले जुड़े एक मामला म महत्वपूर्ण फैसला सुनाए हवय। हाईकोर्ट ह तीन महिला मन ला बरी करे के फैसला ला बरकरार रखत राज्य शासन के अपील खारिज कर दिस। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच ह कहिस कि सिरिफ अपन मर्जी ले देह व्यापार म शामिल होए के आधार म अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के धारा 4 के तहत अपराध साबित नइ होवय। कोर्ट ह साफ करिस कि धारा 4 के तहत अपराध साबित करे बर ये जरूरी हवय कि आरोपी ह जानबूझकर कोनो दूसर व्यक्ति के देह व्यापार ले होवत कमई के सहारा अपन जीवनयापन करत रहिस। बिना ये बात साबित करे, कोनो व्यक्ति ला ये धारा के तहत दोषी नइ ठहराए जा सकय।
तीन महिला मन ला सुनाए गे रहिस दू-दू साल के सजा
मामला कोरबा जिला के आय, जिहां साल 2014 म तीन महिला मन ला देह व्यापार ले जुड़े आरोप म दू-दू साल के कठोर कारावास अऊ 500-500 रुपिया जुर्माना के सजा सुनाए गे रहिस। एकर बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट कोरबा ह 28 अगस्त 2014 के धारा 4 के आरोप ले महिला मन ला बरी कर दिस। राज्य शासन ह ये फैसला ला चुनौती देत छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट म अपील दाखिल करे रहिस। अब हाईकोर्ट ह शासन के अपील खारिज करके महिला मन के पक्ष म आए बरी करे के फैसला ला बरकरार रखे हवय।
2013 म पुलिस ह मारे रहिस छापा
मिले जानकारी के मुताबिक, 11 जुलाई 2013 के पुलिस ला सूचना मिले रहिस कि कोरबा के महाराणा प्रताप नगर स्थित एक मकान म देह व्यापार कराए जात हवय। सूचना के आधार म पुलिस ह मकान म छापेमारी करिस अऊ मामला म नौ झन आरोपी मन के खिलाफ प्रकरण दर्ज करिस। तीन महिला मन ऊपर अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के धारा 6 अऊ 7 के तहत आरोप तय करे गे रहिस। ट्रायल कोर्ट ह महिला मन ला धारा 6 अऊ 7 के आरोप ले बरी कर दिस, फेर धारा 4 के तहत दोषी ठहराए रहिस। बाद म धारा 4 के आरोप ले घलो महिला मन ला बरी करे के फैसला सामने आइस, जेला राज्य शासन ह हाईकोर्ट म चुनौती दिस।
हाईकोर्ट कहिस- दूसर के कमई ऊपर जीवनयापन करे के सबूत जरूरी
मामला के सुनवाई करत हाईकोर्ट ह कहिस कि तीनों महिला मन ऊपर अइसन कोनो आरोप नइ रहिस कि उनमन ह दूसर महिला के देह व्यापार ले होए कमई ले पइसा लेवत रहिन या दलाल के रूप म काम करत रहिन। कोर्ट के मुताबिक, धारा 4 के तहत अपराध साबित करे बर जरूरी कानूनी तत्व मौजूद होना चाही। जब अभियोजन पक्ष ह ये साबित नइ कर सकिस कि महिला मन ह दूसर के देह व्यापार के कमई ऊपर जानबूझकर जीवनयापन करत रहिन, त उनला ये धारा के तहत दोषी ठहराना उचित नइ हे।
अपन मर्जी ले देह व्यापार करना अपने आप म अपराध नइ- हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ह सुप्रीम कोर्ट के फैसला के उल्लेख करत कहिस कि कोनो वयस्क व्यक्ति के अपन मर्जी ले देह व्यापार म शामिल होना अपने आप म अपराध नइ आय। कोर्ट ह ये बात ऊपर घलो जोर दिस कि महिला मन ला सिरिफ देह व्यापार म शामिल होए के आधार म अपराधी मानके सजा देना या प्रताड़ित करना उचित नइ हे। हालांकि, देह व्यापार ले जुड़े दलाली, शोषण, जबरदस्ती देह व्यापार कराना अऊ कानून म प्रतिबंधित दूसर गतिविधि मन ऊपर कानूनी कार्रवाई के प्रावधान लागू रहिथे।
राज्य शासन के अपील खारिज, महिला मन ला राहत
जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच ह मामला के तथ्य अऊ कानूनी प्रावधान मन के समीक्षा करे के बाद राज्य शासन के अपील खारिज कर दिस। हाईकोर्ट ह तीनों महिला मन ला धारा 4 के आरोप ले बरी करे के फैसला ला सही मानत बरकरार रखिस। ये फैसला ह साफ करथे कि कोनो व्यक्ति ला अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के धारा 4 के तहत दोषी ठहराए बर सिरिफ देह व्यापार म शामिल होना काफी नइ हे, बल्कि दूसर के देह व्यापार ले होवत कमई ऊपर जानबूझकर जीवनयापन करे के सबूत होना जरूरी हवय।
कानूनी अधिकार अऊ महिला मन के सम्मान ला लेके महत्वपूर्ण फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के ये फैसला ला देह व्यापार ले जुड़े मामला मन म कानूनी प्रावधान के सही व्याख्या अऊ महिला मन के अधिकार के नजरिया ले महत्वपूर्ण माने जा सकथे। कोर्ट के टिप्पणी ले ये बात सामने आथे कि स्वेच्छा ले देह व्यापार म शामिल वयस्क व्यक्ति अऊ शोषण या अवैध कारोबार चलाए वाले व्यक्ति के कानूनी स्थिति म अंतर हवय। अइसन मामला मन म आरोप साबित करे बर ठोस सबूत अऊ संबंधित कानून के जरूरी शर्त मन के पालन करना जरूरी हवय।



