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Shardiya Navratri 2026: प्रयागराज के इस मंदिर में नहीं है मां दुर्गा की मूर्ति, पालने की पूजा से जुड़ी है अनोखी मान्यता

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Shardiya Navratri 2026: प्रयागराज के इस मंदिर में नहीं है मां दुर्गा की मूर्ति, पालने की पूजा से जुड़ी है अनोखी मान्यता

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41975-untitled Shardiya Navratri 2026: प्रयागराज के इस मंदिर में नहीं है मां दुर्गा की मूर्ति, पालने की पूजा से जुड़ी है अनोखी मान्यता

Shardiya Navratri 2026: प्रयागराज। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान देशभर के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित अलोपी देवी मंदिर भी आस्था का ऐसा ही प्रमुख केंद्र है, जहां माता की किसी पारंपरिक मूर्ति की पूजा नहीं की जाती। यहां मंदिर परिसर में स्थापित एक विशेष पालने को देवी का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। नवरात्रि के दिनों में माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मां सती से जुड़ी है मंदिर की पौराणिक मान्यता

प्रयागराज के अलोपीबाग क्षेत्र में संगम के नजदीक स्थित इस मंदिर को अलोपशंकरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर विचरण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के विभिन्न अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे थे। मान्यता है कि इसी स्थान पर माता सती के दाहिने हाथ का पंजा गिरकर अदृश्य हो गया था। इसी वजह से इस स्थान का नाम अलोपी पड़ा और मंदिर को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त हुआ।

मूर्ति नहीं, पालने की होती है पूजा

अलोपी देवी मंदिर की सबसे खास बात यहां की पूजा परंपरा है। मंदिर के मध्य भाग में बने चबूतरे पर एक कुंड स्थित है, जिसके ऊपर लाल कपड़े से ढका एक विशेष पालना रखा गया है। श्रद्धालु इसी पालने को माता का प्रतीक मानकर पूजा करते हैं। भक्त फूल, चुनरी और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर में विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं। श्रद्धालु दर्शन के लिए कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार, भक्त कुंड से जल लेकर पालने पर अर्पित करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं। आम दिनों में भी यहां श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि सोमवार और शुक्रवार को विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

मन्नत के लिए बांधते हैं लाल धागा

मंदिर से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हुए यहां लाल धागा बांधते हैं। मान्यता है कि इच्छा पूरी होने पर भक्त धागा खोलकर माता के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। हालांकि, ये धार्मिक आस्थाएं और परंपराएं हैं, जिनका पालन श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार करते हैं।

कैसे पहुंचें अलोपी देवी मंदिर?

प्रयागराज आने वाले श्रद्धालु सड़क, रेल और हवाई मार्ग से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। मंदिर शहर के अलोपीबाग क्षेत्र में स्थित है। प्रयागराज जंक्शन और शहर के बस अड्डों से टैक्सी या ऑटो के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। हवाई मार्ग से आने वाले यात्री प्रयागराज एयरपोर्ट से स्थानीय परिवहन की मदद ले सकते हैं।

अनोखी पूजा परंपरा और माता सती से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं के कारण अलोपी देवी मंदिर प्रयागराज के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर विशेष आस्था का केंद्र बना रहता है।

साभार: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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