विशेष संपादकीय : समता, समृद्धि, सेवा और संवेदना के साथ महाराजा अग्रसेन का समाज-दर्शन – संदीप अखिल
परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः।परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥ संक्षेप में इस श्लोक का आश्य है जिस तरह वृक्ष,
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