वर्क फ्रॉम होम ले मानसिक सेहत म बदलाव, आईटी कर्मचारी मन ऊपर रिसर्च म खुलासा
Work From Home Mental Health : रायपुर। कोरोना के समय शुरू होए वर्क फ्रॉम होम अब कई नौकरी म काम करे के एक आम तरीका बन गे हवय। घर ले काम करे के असर कर्मचारी मन के मानसिक, शारीरिक अउ भावनात्मक सेहत ऊपर घलो पड़त हवय। रायपुर म आईटी सेक्टर के कर्मचारी मन ऊपर करे गे एक रिसर्च म वर्क फ्रॉम होम ले खासकर महिला कर्मचारी मन के मानसिक स्वास्थ्य म बदलाव के बात सामने आय हवय।
महिला मन म डिप्रेशन के स्तर म करीब 20 फीसदी कमी
रिसर्चर डॉ. पूर्ति नागेश के मुताबिक, वर्क फ्रॉम होम के दौरान महिला कर्मचारी मन म डिप्रेशन के स्तर म करीब 20 फीसदी तक कमी देखे गे। ऑफिस जाए के जरूरत नहीं रहिस, फेर घर के जिम्मेदारी अउ नौकरी दुनों ल एक संग संभाले के दबाव बने रहिस।
ए स्थिति के असर हर महिला ऊपर एक जइसन नहीं रहिस। कुछ महिला मन ल ऑफिस आने-जाने के तनाव कम होए के फायदा मिलिस, त कुछ मन ल घर अउ काम के बीच संतुलन बनाय म मानसिक थकान महसूस होइस।
400 से ज्यादा आईटी कर्मचारी ऊपर अध्ययन
डॉ. पूर्ति नागेश के अध्ययन म आईटी सेक्टर के 400 से ज्यादा कर्मचारी मन ल शामिल करे गे। रिसर्च म रिमोट वर्किंग के मानसिक स्वास्थ्य ऊपर पड़ने वाले असर के अलग-अलग पहलू मन के अध्ययन करे गे।
अध्ययन म सामाजिक जुड़ाव, कनेक्टिविटी अउ आध्यात्मिक उपचार जइसन कारक मन के घलो मानसिक स्वास्थ्य ऊपर असर के बात सामने आय।
घर ऑफिस बनिस तो अकेलापन बढ़िस
वर्क फ्रॉम होम के एक दूसर पहलू सामाजिक दूरी घलो रहिस। ऑफिस म सहकर्मी मन संग आम बातचीत, चाय के समय बतियाना अउ आमने-सामने संवाद होवत रहिस, फेर घर ले काम करे म ए मौका कम हो गे।
ए ले कुछ कर्मचारी मन ल अकेलापन महसूस होइस। टीम संग जुड़ाव कम होए के असर भावनात्मक सेहत ऊपर घलो पड़िस। घर अउ ऑफिस के काम के बीच सीमा साफ नहीं रह पाय, ए ले काम के दबाव बढ़े के स्थिति बने रहिस।
एक तिहाई कर्मचारी मन ल वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर लगिस
रिमोट वर्किंग ऊपर करे गे अलग-अलग अध्ययन मन म करीब 33 फीसदी कर्मचारी मन माने हवंय कि घर ले काम करे ले निजी जिंदगी अउ नौकरी के बीच संतुलन बेहतर बने हवय।
समय अउ जगह के आजादी के कारण कर्मचारी मन अपन निजी जरूरत के हिसाब ले काम ल व्यवस्थित कर पाथें। ए वजह ले वर्क फ्रॉम होम के फायदा अउ नुकसान दुनों पहलू सामने आथें।
हाइब्रिड मॉडल ल मानथें संतुलित विकल्प
अध्ययन के मुताबिक, पूरी तरह ऑफिस या पूरी तरह घर ले काम करे के बजाय हाइब्रिड मॉडल कई कर्मचारी मन बर ज्यादा संतुलित तरीका साबित हो सकत हवय। ए म कुछ दिन ऑफिस म काम अउ कुछ दिन घर ले काम करे के व्यवस्था रहिथे।
कुल मिलाके, वर्क फ्रॉम होम ले कर्मचारी मन ल समय अउ आने-जाने के तनाव म राहत मिल सकत हवय, फेर सामाजिक जुड़ाव, काम अउ घर के सीमा अउ मानसिक थकान जइसन चुनौती मन ल नजरअंदाज नहीं करे जा सकय।



