CG High Court Promotion : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट एक मामला के सुनवाई करत कहिस कि अनारक्षित पद ला सिरिफ सामान्य वर्ग बर आरक्षित नइ मान सकय। अगर कोनो आरक्षित वर्ग के कर्मचारी वरिष्ठता अउ योग्यता के आधार मं अनारक्षित पद बर पात्र हे, त ओकर नाम ऊपर घलो विचार करना जरूरी हे।
रायपुर के काशीराम नगर मं रहइया 53 बछर के अलख राम ध्रुव लोक शिक्षण संचालनालय मं सहायक ग्रेड-1 के पद मं काम करत रहिन। वो अनुसूचित जनजाति वर्ग ले आथें। साल 2016 मं सहायक अधीक्षक के पद मं पदोन्नति बर विभागीय पदोन्नति समिति यानी डीपीसी बइठक होय रहिस। फेर अलख राम ध्रुव ला पदोन्नति प्रक्रिया मं शामिल नइ करे गीस। एला लेके वो हाईकोर्ट मं याचिका लगाइन।
अनारक्षित पद बर सब पात्र कर्मचारी के नाम ऊपर विचार
मामला के सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय के पीठ मं होइस। कोर्ट कहिस कि अनारक्षित पद कोनो एक सामान्य वर्ग बर आरक्षित नइ होथे। अगर आरक्षित वर्ग के कर्मचारी वरिष्ठता अउ योग्यता के आधार मं अनारक्षित पद बर पात्र हे, त ओकर नाम ऊपर घलो विचार होना चाही।
डीपीसी मं दू पद रहिस उपलब्ध
साल 2016 मं डीपीसी के बेरा सहायक अधीक्षक के दू पद खाली रहिस। एमा एक पद अनारक्षित रहिस अउ दूसर पद अनुसूचित जाति वर्ग बर रहिस। अलख राम ध्रुव के कहना रहिस कि वो वरिष्ठ होय के बाद घलो सिरिफ ए आधार मं पदोन्नति प्रक्रिया ले बाहर कर दे गीस कि अनुसूचित जनजाति वर्ग बर कोनो खाली पद नइ रहिस।
उनका मुताबिक, डीपीसी मं उनसे कनिष्ठ कर्मचारी मन के नाम ऊपर विचार करे गीस। वरिष्ठता सूची मं अलख राम ध्रुव, सुनील कुमार भूमरकर अउ शैलेश शर्मा ले वरिष्ठ रहिन। फेर सहायक अधीक्षक पद बर भूमरकर अउ शर्मा के नाम ऊपर विचार करे गीस।
90 दिन के भीतर नवा सिरे ले विचार के आदेश
राज्य सरकार के ओर ले सरकारी अधिवक्ता अखिलेश कुमार याचिका के विरोध करिन। उनका कहना रहिस कि अनुसूचित जनजाति वर्ग बर कोनो खाली पद नइ रहिस अउ 2016 मं उपलब्ध दुनों पद आरक्षण रोस्टर के हिसाब ले भरे गे रहिन।
मामला के सुनवाई के बाद हाईकोर्ट विभागीय पदोन्नति समिति के समीक्षा करे के आदेश देइस। कोर्ट कहिस कि अलख राम ध्रुव के सहायक अधीक्षक पद मं पदोन्नति बर नवा सिरे ले विचार करे जावय। ए प्रक्रिया ला 90 दिन के भीतर पूरा करे के घलो निर्देश देय गे हे।