बस्तर मं अंधत्व योजना के जांच के बीच नोडल पद ले डॉ. सरिता ल हटाइन
Bastar Blindness Control Scheme : जगदलपुर। बस्तर जिला मं अंधत्व नियंत्रण योजना ला लेके चलत विभागीय जांच के बीच स्वास्थ्य विभाग ह एक बड़े प्रशासनिक फैसला करे हे। महारानी अस्पताल जगदलपुर के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सरिता निर्मल (थॉमस) ला राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम (NPCB&VI) के नोडल अधिकारी के पद ले हटा दे गे हे।
CMHO बस्तर ह आगामी आदेश तक नेत्र विभाग के जिम्मेदारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. संजय प्रसाद ला सौंपे हे। अब डॉ. सरिता अपन मूल पद मं नेत्र चिकित्सक के रूप मं काम करहीं।
खरीदी अउ इंसेंटिव ला लेके शिकायत
डॉ. सरिता के खिलाफ विभागीय स्तर मं 10 बिंदु के शिकायत सामने आए हे। एमा अंधत्व नियंत्रण योजना के तहत चश्मा खरीदी, दवई के स्थानीय खरीदी अउ बिना ऑपरेशन करे इंसेंटिव लेहे के आरोप लगाए गे हवंय।
शिकायत मं ये दावा घलो करे गे हे कि लाइफ लाइन एक्सप्रेस मं ऑपरेशन करे के नाम ले लंबे समय तक इंसेंटिव लेवत रहिन। हालांकि, इन आरोप के सही-गलत के अंतिम फैसला विभागीय जांच पूरा होए के बाद ही होही।
स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ह उठाइस सवाल
छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ह डॉ. सरिता के खिलाफ आए शिकायत के मामला ला स्वास्थ्य संचालनालय अउ राज्य कार्यक्रम अधिकारी के सामने रखिस। संघ के प्रदेश महामंत्री कन्नूर हनुमंत राव अउ प्रांतीय संयोजक गौतम रात्रे ह उच्च अधिकारी मन ला ज्ञापन सौंपके निष्पक्ष जांच के मांग करे रहिन।
संघ के कहना रहिस कि नोडल अधिकारी के पास वित्तीय रजिस्टर, सरकारी दस्तावेज अउ काम के बंटवारा ले जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार रहिथे। ए स्थिति मं जांच चलत बेरा नोडल पद मं बने रहना जांच के प्रक्रिया ला प्रभावित कर सकथे।
नवंबर 2025 ले शुरू होइस विभागीय कार्रवाई
मामला मं विभागीय कार्रवाई नवंबर 2025 ले शुरू होइस। 6 नवंबर ला CMHO बस्तर ह डॉ. सरिता ला अलग-अलग बिंदु मं स्पष्टीकरण अउ कारण बताओ नोटिस जारी करे रहिस।
एखर बाद 28 अप्रैल 2026 ला राज्य कार्यक्रम अधिकारी ह 10 सूत्रीय शिकायत ऊपर जांच करके अभिमत सहित रिपोर्ट मांगे रहिस। 21 मई ला बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक ह तीन सदस्यीय जांच समिति बनाइस।
अब मूल पद मं डॉक्टर करहीं काम
10 सितंबर 2026 ला CMHO बस्तर ह डॉ. सरिता ला नोडल प्रभार ले अलग करे के आदेश जारी करिस। अब अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के जिम्मेदारी सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ला दे गे हे।
फिलहाल विभागीय जांच के नतीजा के इंतजार हे। जांच पूरा होए के बाद ही ये साफ होही कि शिकायत मं लगाए गे वित्तीय खरीदी अउ इंसेंटिव संबंधी आरोप सही हवंय या नइ, अउ ए मामला मं आगे का कार्रवाई होही।



