लिफ्ट बनिस अफसर मन के जेल, इंद्रावती भवन मं आधा घंटा तक फंसे अफसर-कर्मचारी
Indravati Bhawan Lift : नवा रायपुर। नवा रायपुर के इंद्रावती भवन मं उस बखत अफरा-तफरी मच गे, जब भवन के एक लिफ्ट अचानक बीच मं ही बंद हो गे। लिफ्ट के भीतर करीब 7 से 8 अधिकारी-कर्मचारी फंस गे रहिन। करीब आधा घंटा तक ओमन लिफ्ट के भीतर बंद रहिन। काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट के दरवाजा खुलिस अउ भीतर फंसे सब्बो लोग बाहर निकल पाइन। राहत के बात ये रहिस कि घटना मं कोनो बड़े हादसा नइ होइस।
सरकारी भवन, फेर सुरक्षा भगवान भरोसे
इंद्रावती भवन कोनो सामान्य इमारत नइ हे। इहां सरकार के कई बड़े विभाग मन के दफ्तर संचालित होथें। रोज सैकड़ों कर्मचारी, अधिकारी अउ आम नागरिक अपन काम ले इहां पहुंचथें। अइसने महत्वपूर्ण सरकारी भवन मं लिफ्ट के अचानक बंद हो जाना केवल तकनीकी खराबी के मामला नइ, बल्कि भवन के सुरक्षा व्यवस्था ऊपर घलो सवाल खड़ा करत हे।
आज फंसे लोग आधा घंटा बाद सुरक्षित बाहर निकल आइन, फेर अगली बार स्थिति एतका आसान होही, ए बात के कोनो गारंटी नइ हे।
मेंटेनेंस बर लाखों रुपिया, फेर लिफ्ट बंद काबर?
सबले बड़ा सवाल लिफ्ट के रखरखाव ला लेके उठत हे। साल 2024-25 मं इंद्रावती भवन के लिफ्ट के व्यापक सालाना रखरखाव बर करीब 43.43 लाख रुपिया के टेंडर के मामला सामने आइस रहिस।
जब लिफ्ट के रखरखाव बर लाखों रुपिया खर्च करे के व्यवस्था हे, त फेर लिफ्ट बीच मं बंद काबर होइस? आखिर मेंटेनेंस के नाम मं हो का रहे हे? ये सवाल अब उठे लगे हे।
कागज मं जांच होवत हे या जमीन मं?
घटना के बाद ये सवाल घलो उठत हे कि लिफ्ट के नियमित जांच आखिर कब होइस? अगर जांच होइस, त खराबी पहिलीच काबर नइ पकड़ाय? अगर मेंटेनेंस एजेंसी जिम्मेदार हे, त ओकर कामकाज के निगरानी कोन करत हे?
अउ अगर नियमित जांच ही नइ होवत हे, त इंद्रावती भवन जइसने बड़े सरकारी भवन मं कर्मचारी अउ आम नागरिक मन के सुरक्षा आखिर कोन के भरोसे हे?
जिम्मेदारी तय होही कि मामला दब जाही?
सरकार अलग-अलग मामला मं अफसर मन के लापरवाही सामने आए के बाद जिम्मेदारी तय करे अउ कार्रवाई करे के बात कहत आए हे। फेर अब सवाल इंद्रावती भवन के लिफ्ट ला लेके हे। जिहां बइठके अधिकारी प्रदेश के प्रशासन चलाथें, उही भवन मं अधिकारी-कर्मचारी आधा घंटा तक लिफ्ट मं फंसे रहिन, त ए घटना के जिम्मेदारी आखिर कोन के होही?
हादसा नइ होइस, त मामला खत्म मान लेव?
सरकारी व्यवस्था मं अक्सर बड़े हादसा के बाद ही सुधार के बात सामने आवत हे। अगर ए घटना मं कोनो घायल नइ होइस, ए सोचके मामला ला खत्म मान लिही, त ये गंभीर लापरवाही हो सकथे।
लिफ्ट मं फंसे लोगन बर वो आधा घंटा घबराहट अउ परेशानी भरे रहिस। अगर बिजली या तकनीकी खराबी के चलते अउ ज्यादा समय तक लोग भीतर फंसे रहितिन, त स्थिति गंभीर हो सकत रहिस।
इंद्रावती भवन के सब्बो लिफ्ट के जांच जरूरी
घटना के बाद कर्मचारी मन के मांग हे कि इंद्रावती भवन मं चलत सब्बो लिफ्ट के तत्काल जांच कराए जाए। सिरिफ कागज मं मेंटेनेंस पूरा बताए के बजाय मौके मं लिफ्ट के वास्तविक स्थिति के जांच हो।
जिहां कोनो खराबी मिले, ओ लिफ्ट ला सुधार पूरा होय तक चलाना बंद करे के जरूरत हे। सरकारी कर्मचारी अउ आम नागरिक मन के सुरक्षा ला कोनो भी हालत मं लापरवाही के भरोसे नइ छोड़े जा सकय।
अगली बार हादसा के बाद अफसोस नइ, पहिलीच कार्रवाई हो
इंद्रावती भवन के ये घटना सरकार अउ जिम्मेदार विभाग बर चेतावनी जइसन हे। आधा घंटा तक अधिकारी-कर्मचारी के लिफ्ट मं फंसे रहना ये बताथे कि लिफ्ट के सुरक्षा व्यवस्था के गंभीरता ले समीक्षा करे के जरूरत हे।
अब जरूरत सिरिफ बयान या खानापूर्ति के नइ, बल्कि भवन के सब्बो लिफ्ट के सुरक्षा जांच, नियमित मेंटेनेंस अउ लापरवाही बर जिम्मेदारी तय करे के हे, ताकि अगली बार कोनो बड़े हादसा के बाद अफसोस करे के नौबत न आवय।



