आदिवासी जमीन के रजिस्ट्री मं अब होही बारीकी ले जांच, साय सरकार के सख्त निर्देश
Tribal Land Registration : रायपुर। छत्तीसगढ़ मं आदिवासी जमीन ला गैर-आदिवासी के अप्रत्यक्ष कब्जा मं जाए ले रोकाय बर सरकार ह अब कड़ाई शुरू कर देहे। अब अइसन मामला के जांच होही, जिहां आदिवासी जमीन ला सीधे गैर-आदिवासी के नाम मं खरीदे के बजाय ओकर नौकर, नातेदार, परिचित या दूसर मनखे के नाम मं रजिस्ट्री कराए गे होही।
जांच के दौरान अगर जमीन के असली कब्जा, उपयोग या ओकर ले मिलत आर्थिक फायदा गैर-आदिवासी मनखे ला मिलत मिलही, त नियम के मुताबिक कार्रवाई करे जा सकही। संदिग्ध मामला मं जांच पूरा होय तक जमीन ला आगू दूसर के नाम मं हस्तांतरित करे ऊपर रोक घलो लगाय जा सकही।
आदिवासी जमीन के अप्रत्यक्ष हस्तांतरण ऊपर नजर
छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ह आदिवासी जमीन के सुरक्षा ला लेके शासन ला पत्र लिखे रहिस। आयोग ह बताइस कि कानून मं प्रावधान होय के बाद घलो कई इलाका ले आदिवासी जमीन के सीधे अउ घुमावदार तरीका ले हस्तांतरण के शिकायत मिलत रहिस।
खास करके अइसन मामला ला गंभीर मानत जांच करे के बात कही गे हे, जिहां गैर-आदिवासी मनखे अपन नौकर, नातेदार, परिचित या दूसर के नाम मं जमीन खरीदथे, फेर जमीन ऊपर कब्जा, उपयोग या आर्थिक फायदा खुद उठाथे।
कलेक्टर मन ला जांच करे के निर्देश
महानिरीक्षक पंजीयन, छत्तीसगढ़ ह प्रदेश के कलेक्टर मन ला पत्र जारी करके अइसन मामला मं जरूरी कार्रवाई करे के निर्देश देहे। जिला प्रशासन ला आदिवासी जमीन के सीधे या अप्रत्यक्ष हस्तांतरण के मामला के जांच करे बर कहे गे हे।
संग मं अइसन पुराना मामला मन के घलो पड़ताल होही, जिहां आदिवासी ले जमीन दूसर मनखे के नाम मं खरीदे गे हो, लेकिन जमीन के असली नियंत्रण या आर्थिक फायदा गैर-आदिवासी के हाथ मं हो।
संदेह होय त जमीन के आगू हस्तांतरण रुक सकही
अगर कऊनो रजिस्ट्री या नामांतरण मं नियम टूटे के आशंका रहिथे, त जांच पूरा होय तक संबंधित जमीन ला आगू दूसर के नाम मं करे ऊपर नियमानुसार रोक लगाए जा सकही। ए कदम ले जांच के बीच जमीन के हस्तांतरण या ओकर स्वरूप बदले के कोशिश ला रोके मं मदद मिलही।
रजिस्ट्री के कागज-पत्तर के होही बारीकी ले जांच
शासन ह पंजीयन अधिकारी मन के जिम्मेदारी घलो तय करे हे। रजिस्ट्री बर पेश करे जाए वाले दस्तावेज मन के पंजीयन अधिनियम के धारा 34 अउ 35, संग मं पंजीयन नियम के नियम 19 अउ 35 के मुताबिक जांच करे के निर्देश देहे।
पंजीयन अधिकारी मन ला जरूरी कागज-पत्तर, जमीन के सही पहचान, खरीदार अउ विक्रेता के जानकारी, संग मं गवाह मन के पहचान ला नियमानुसार जांचे बर कहे गे हे।
कानून के खिलाफ हस्तांतरण मिलिस त जमीन वापस हो सकथे
जांच मं अगर ये बात सामने आथे कि आदिवासी जमीन ला कानून के खिलाफ दूसर के हाथ मं सौंपे गे हे अउ ओकर ऊपर गैर-आदिवासी के अप्रत्यक्ष कब्जा या नियंत्रण हे, त नियमानुसार कार्रवाई हो सकही।
अइसन मामला मं जमीन ला फेर ले मूल आदिवासी खातेदार के नाम मं बहाल करे के कार्रवाई के प्रावधान घलो हे। सरकार के ये कदम के मकसद आदिवासी जमीन के खरीद-बिक्री मं अपनाए जा रहे घुमावदार या बेनामी तरीका ऊपर रोक लगाना अउ आदिवासी खातेदार मन के जमीन के अधिकार ला सुरक्षित रखना हे।



