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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है? जानें महत्व, ग्रह दोष, बुरी नजर से बचाव की धार्मिक मान्यताएं

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Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है? जानें महत्व, ग्रह दोष, बुरी नजर से बचाव की धार्मिक मान्यताएं

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36721-raksha-bandhan-2026 Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर रक्षा सूत्र क्यों बांधा जाता है? जानें महत्व, ग्रह दोष, बुरी नजर से बचाव की धार्मिक मान्यताएं

नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। 2026 में रक्षाबंधन 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी या रक्षा सूत्र बांधकर उसकी सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती हैं। दूसरी ओर भाई बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है। धार्मिक परंपराओं में रक्षा सूत्र को शुभता और मंगलकामना से जुड़ा पवित्र धागा माना गया है।

क्या है रक्षा सूत्र का अर्थ?

‘रक्षा सूत्र’ का अर्थ ही रक्षा करने वाला सूत्र माना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधते समय ईश्वर से परिवार की सुरक्षा और कल्याण की प्रार्थना की जाती है। माना जाता है कि श्रद्धा और सकारात्मक भाव से बांधा गया यह धागा व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत करता है और उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का भाव बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं हैं, जिनका वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए। इनका महत्व मुख्य रूप से आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं में है।

नकारात्मक शक्तियों से बचाव की मान्यता

कई धार्मिक परंपराओं में रक्षा सूत्र को नकारात्मक प्रभावों और अशुभ शक्तियों से सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि राखी बांधने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है और मन में आत्मविश्वास का भाव मजबूत होता है। इसी वजह से रक्षाबंधन पर राखी बांधते समय भाई के उज्ज्वल भविष्य, सुख-शांति और सुरक्षित जीवन की प्रार्थना करने की परंपरा है।

बुरी नजर से सुरक्षा का विश्वास

कई परिवारों में रक्षा सूत्र को बुरी नजर से बचाव से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, शुभ धागा कलाई पर बांधने से नकारात्मक नजर का प्रभाव कम होता है। यही कारण है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में बच्चों और परिवार के सदस्यों की कलाई पर मौली या रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा भी देखने को मिलती है। यह परंपरा क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग-अलग रूपों में निभाई जाती है।

ग्रह दोष को लेकर क्या कहता है ज्योतिष?

ज्योतिषीय मान्यताओं में लाल, पीले या सूती रक्षा सूत्र को अलग-अलग ग्रहों और शुभ ऊर्जाओं से जोड़कर देखा जाता है। कुछ ज्योतिष परंपराओं में माना जाता है कि ऐसे शुभ धागे व्यक्ति के आत्मबल और मानसिक स्थिरता को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं। हालांकि ग्रह दोष, राहु-केतु के प्रभाव या रक्षा सूत्र से उससे जुड़े शारीरिक-मानसिक संकट दूर होने के दावे धार्मिक-ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

परिवार की सुख-शांति के लिए की जाती है प्रार्थना

रक्षाबंधन पर राखी बांधने की रस्म के दौरान बहन अक्सर भाई की आरती उतारती है, तिलक लगाती है और उसकी खुशहाली की कामना करती है। इसी तरह भाई भी बहन की सुरक्षा और सम्मान का संकल्प लेता है। यही वजह है कि रक्षा सूत्र को केवल धागा नहीं, बल्कि भरोसे और रिश्ते की जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है।

रक्षाबंधन का मूल संदेश क्या है?

रक्षाबंधन की सबसे बड़ी भावना भाई-बहन के बीच आपसी सम्मान, स्नेह और सहयोग है। धार्मिक मान्यताओं में राखी को संकटों से रक्षा का प्रतीक माना जाता है, जबकि सामाजिक स्तर पर यह त्योहार परिवार और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर देता है।

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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