छत्तीसगढ़ में अवैध कॉलोनी काटीस त होही 7 साल के जेल, प्लॉट बसाए के पहली जांचव कागजात
छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से कॉलोनी बसाएइया मन ऊपर सरकार अउ जिला प्रशासन ह कड़ा कार्रवाई करे के तैयारी कर ले हे। बिना जरूरी अनुमति के जमीन ला छोटे-छोटे टुकड़ा (प्लॉट) में बांट के बेचेइया मन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे जा सकत हे। नियम के गंभीर उल्लंघन पाए जाय पर कॉलोनाइजर ला 3 ले 7 साल तक के जेल अउ कम से कम 1 लाख रुपिया जुर्माना हो सकत हे।
प्रशासन ह आम जनता ला घलो सचेत रहे के सलाह दे हे। प्लॉट या मकान बिसाए (खरीदे) के पहली केवल विज्ञापन अउ कॉलोनाइजर के बात पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकत हे। लेइया मन ला रजिस्ट्रेशन, विकास अनुमति अउ पास होए ले-आउट जइसे कागजात जरूर देखना चाही।
कॉलोनी बनाए बर रजिस्ट्रेशन जरूरी नगरपालिका परिषद अउ नगर पंचायत क्षेत्र में कॉलोनी विकसित करे बर तय प्रक्रिया ला पूरा करना जरूरी हे। कतको मनखे जमीन ला छोटे-छोटे भूखंड में बांट के बेचना चाहथे, त ओला कॉलोनाइजर के रूप में पंजीयन कराना पड़ही। इही मेर मकान या अपार्टमेंट बना के बेचेइया बिल्डर मन करा घलो जरूरी पंजीयन प्रमाण-पत्र होना चाही। बिना रजिस्ट्रेशन अउ अनुमति के कॉलोनी बसाए पर संबंधित निकाय कार्रवाई कर सकत हे। यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 अउ कॉलोनाइजर नियम के तहत लागू करे गे हे।
अवैध कॉलोनी पर होही बड़ कार्रवाई नियम के मुताबिक अवैध रूप ले जमीन के व्यपवर्तन (डायवर्जन) कराए या बिना अनुमति के कॉलोनी विकसित करे पर मामला ला गंभीर माने जाही। अधिनियम के धारा 339-ग के तहत दोषी पाए जाय पर 3 ले 7 साल तक के जेल के प्रावधान हे। एकरे संग कम ले कम 1 लाख रुपिया जुर्माना घलो लगाए जा सकत हे। कोर्ट ह परिस्थिति के आधार पर प्रभावित मनखे ला मुआवजा दे के आदेश घलो दे सकत हे। ओकर सेती सिर्फ जमीन के रजिस्ट्री हो जाय ले कोई कॉलोनी पूरी तरह वैध नई हो जाय।
5 साल तक मान्य रहिथे कॉलोनाइजर के पंजीयन कॉलोनाइजर ला मिले पंजीयन प्रमाण-पत्र 5 साल बर मान्य रहिथे। फेर पंजीयन मिले के बाद घलो ओ ह अपन मर्जी ले प्लॉट नई बेच सके। हर एक कॉलोनी बर सक्षम अधिकारी ले अलग ले विकास अनुमति लेना जरूरी होथे। स्वीकृति में कॉलोनी के ले-आउट, रद्दा (सड़क), नाली, पानी अउ बिजली जइसे सुविधा मन के जानकारी शामिल रहिथे। एकर उद्देश्य यहे हे कि मनखे मन ला प्लॉट बेचे के बाद जरूरी सुविधा बर भटके बर झन पड़े।
EWS बर 15 प्रतिशत जमीन के प्रावधान आवासीय कॉलोनी मन में आर्थिक रूप ले कमजोर वर्ग (EWS) बर घलो व्यवस्था करे गे हे। नियम के अनुसार कुल जमीन के 15 प्रतिशत हिस्सा ए वर्ग बर आरक्षित रखना जरूरी हे। एकर अलावा कॉलोनी के कुछ भूखंड संबंधित नगरपालिका करा बंधक रखे जाथे। ए भूखंड विकास काम पूरा होवत तक सुरक्षा के रूप में रखे जाथे। ए व्यवस्था ले कॉलोनाइजर ऊपर रद्दा, पानी, नाली अउ दूसर सुविधा मन ला पूरा करे के दबाव बने रहिथे।
प्लॉट बिसाए के पहली का-का जांचव जिला प्रशासन ह ग्राहक मन ले कहे हे कि जमीन बिसाए के पहली संबंधित नगरीय निकाय ले पूरा जानकारी ले लेव। कॉलोनाइजर के पंजीयन प्रमाण-पत्र वैध हे कि नई, एकर पुष्टि सबसे पहली करना चाही। ओकर बाद कॉलोनी के विकास अनुमति अउ पास ले-आउट जांचना जरूरी हे। ग्राहक मन ला ए घलो देखना चाही कि जे प्लॉट ला लेवत हें, ओ नगरपालिका करा बंधक त नई हे। एकर अलावा कॉलोनी में मंजूर विकास काम सचमुच पूरा होए हे या सिर्फ कागज में दिखाए गे हे, एकर जानकारी घलो ले लेव।
सिर्फ सस्ता प्लॉट देख के फैसला झन करव अवैध कॉलोनी मन में कतको बेर कम दाम अउ आसान किस्त के लालच दे के प्लॉट बेच दे जाथे। बाद में रद्दा, बिजली, पानी, नक्शा पास कराए अउ मकान बनाए के अनुमति ला लेके ग्राहक मन परेशानी में फंस जाथें। अइसन मामला में बछर (साल) तक कानूनी विवाद चल सकत हे। ओकर सेती जमीन बिसावत बेरा हड़बड़ी करे के बजाय कागजात के सरकारी स्तर पर जांच कराना सुरक्षित तरीका हे। सूरजपुर जिला प्रशासन ह घलो कॉलोनाइजर अउ बिल्डर मन ला नियम के पालन करे बर कहे हे। प्रशासन ह साफ कहे हे कि नियम तोड़े पर कड़ा कार्रवाई करे जाही।



