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नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुले, दर्शन को उमड़ी भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति

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नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुले, दर्शन को उमड़ी भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति

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उज्जैन।धार्मिक नगरी उज्जैन में सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के विशेष अवसर पर भगवान नागचंद्रेश्वर के भक्तों का लंबे समय से चला आ रहा इंतजार खत्म हुआ। रविवार रात करीब 11:30 बजे श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खोलने की प्रक्रिया शुरू हुई। पूजन-अर्चन के बाद श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी ने भगवान नागचंद्रेश्वर का महाभिषेक और प्रथम पूजन किया। मंदिर के पट खुलते ही परिसर जय श्री नागचंद्रेश्वर के जयकारों से गूंज उठा।

 

भगवान के दुर्लभ दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंच गए। इसी दौरान भीड़ बढ़ने और करंट फैलने की अफवाह के चलते कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान कई श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई।

IMG-20260817-WA0014-225x300 नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुले, दर्शन को उमड़ी भीड़ में भगदड़ जैसी स्थिति

## साल में सिर्फ एक बार खुलता है मंदिर

 

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष पर भगवान नागचंद्रेश्वर का प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कपाट वर्ष में केवल एक बार नाग पंचमी के अवसर पर 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। यही वजह है कि नाग पंचमी पर देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

 

मंदिर में भगवान नागचंद्रेश्वर के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की प्राचीन प्रतिमाएं भी विराजमान हैं। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति की ओर से पहले से ही विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं।

 

## तीन चरणों में होगी विशेष पूजा

 

महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी के अनुसार, पूजन-अर्चन के बाद भगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए। सोमवार दोपहर 12 बजे अखाड़े की ओर से भगवान का विशेष पूजन किया जाएगा और दाल-बाटी का भोग लगाया जाएगा।

 

इसके बाद शाम 7:30 बजे पुजारी एवं पुरोहितों द्वारा भगवान नागचंद्रेश्वर का विशेष पूजन-अर्चन किया जाएगा। रात 12 बजे अंतिम विशेष पूजा के बाद मंदिर के कपाट फिर एक वर्ष के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

 

## 11वीं शताब्दी की अद्भुत प्रतिमा

 

भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा को करीब 11वीं शताब्दी की प्राचीन प्रतिमा बताया जाता है। इसमें भगवान नागचंद्रेश्वर सात फनों वाले नाग पर विराजमान हैं। प्रतिमा में भगवान शिव और माता पार्वती के साथ उनके वाहन नंदी और सिंह भी दिखाई देते हैं।

 

प्रतिमा में भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, सूर्य और चंद्रमा की आकृतियां भी अंकित हैं। मान्यता है कि यह प्रतिमा नेपाल से उज्जैन लाई गई थी और इस तरह की दुर्लभ प्रतिमा अन्यत्र देखने को नहीं मिलती।

 

## श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

 

श्रावण के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी को देखते हुए श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए। नागचंद्रेश्वर मंदिर में सामान्य और शीघ्र दर्शन की अलग व्यवस्था की गई।

 

महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी सामान्य और शीघ्र दर्शन की व्यवस्थाएं अलग रखी गईं। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा जूता स्टैंड, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और जगह-जगह पेयजल की व्यवस्था की गई है।

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Source: Ekhabri

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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