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UP Paper Leak Law: पेपर लीक पर यूपी का कानून केंद्र से ज्यादा सख्त! राज्य में उम्रकैद का प्रावधान, केंद्र में अधिकतम 10 साल की सजा

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UP Paper Leak Law: पेपर लीक पर यूपी का कानून केंद्र से ज्यादा सख्त! राज्य में उम्रकैद का प्रावधान, केंद्र में अधिकतम 10 साल की सजा

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UP Paper Leak Law: लखनऊ। देशभर में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने नया कानून लागू कर दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून अब पूरे देश में लागू होने की प्रक्रिया में है। हालांकि, इस बीच उत्तर प्रदेश का पहले से लागू पेपर लीक विरोधी कानून चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि राज्य का कानून सजा के मामले में केंद्र के कानून से कहीं अधिक सख्त माना जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्र का नया कानून लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश का कानून प्रभावहीन हो जाएगा या दोनों कानून समानांतर रूप से लागू रहेंगे।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ केंद्र का कानून

पेपर लीक, परीक्षा में धांधली और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं पर लगाम लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नया कानून बनाया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून कानूनी रूप से प्रभावी हो गया है। गजट अधिसूचना जारी होने के बाद इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।

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इस कानून के तहत प्रश्नपत्र लीक करने, परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से परीक्षा प्रभावित करने या संगठित तरीके से परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।

यूपी में पहले से लागू है अधिक सख्त कानून

UP Paper Leak Law: उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2024 में सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए अलग कानून लागू किया था। राज्य सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और पेपर लीक माफिया पर कठोर कार्रवाई करना था।

यूपी के इस कानून में संगठित अपराध के रूप में पेपर लीक करने वालों के लिए आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा दोषियों पर करोड़ों रुपये तक का आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। यही कारण है कि सजा के मामले में उत्तर प्रदेश का कानून केंद्र के नए कानून से अधिक कठोर माना जा रहा है।

दोनों कानूनों में क्या है अंतर?

दोनों कानूनों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है, लेकिन सजा और दंड के प्रावधानों में अंतर देखने को मिलता है।

  • केंद्र का कानून – अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद और आर्थिक दंड।
  • उत्तर प्रदेश का कानून – गंभीर मामलों में आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान।

यानी, जहां केंद्र ने कठोर सजा का प्रावधान किया है, वहीं उत्तर प्रदेश ने इसे और अधिक सख्त बनाते हुए उम्रकैद तक की व्यवस्था की है।

क्या केंद्र का कानून लागू होने के बाद यूपी का कानून खत्म हो जाएगा?

UP Paper Leak Law: कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा जरूरी नहीं है। भारतीय संविधान में कई ऐसे विषय हैं, जिन पर केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। यदि किसी राज्य के कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त है और वह केंद्र के कानून से प्रत्यक्ष रूप से टकराव की स्थिति में नहीं है, तो वह राज्य में लागू रह सकता है।हालांकि, यदि किसी मामले में दोनों कानूनों के बीच कानूनी विवाद उत्पन्न होता है, तो उसका अंतिम निर्णय न्यायालय की व्याख्या और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर होगा।

पेपर लीक पर सरकारों की बढ़ती सख्ती

पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के कई बड़े मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी और सरकारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। इसी वजह से केंद्र और राज्य सरकारें लगातार कानूनों को और अधिक कठोर बनाकर पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसने की कोशिश कर रही हैं।

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अभ्यर्थियों को मिलेगी अधिक सुरक्षा

UP Paper Leak Law: विशेषज्ञों का मानना है कि नए कानूनों के लागू होने से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता मजबूत होगी। इससे लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास भी बढ़ेगा।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र और उत्तर प्रदेश के कानूनों के बीच समन्वय किस प्रकार स्थापित होता है और भविष्य में पेपर लीक के मामलों में किस कानून के तहत कार्रवाई की जाती है।

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Source: Nishaanebaz

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Nishaanebaz
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