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2028 से नई गाड़ियों में V2V सिस्टम अनिवार्य; सड़क पर दौड़ रही हर गाड़ी की डिटेल मिलेगी, सरकार का बड़ा प्रस्ताव

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2028 से नई गाड़ियों में V2V सिस्टम अनिवार्य; सड़क पर दौड़ रही हर गाड़ी की डिटेल मिलेगी, सरकार का बड़ा प्रस्ताव

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नई दिल्ली। भारत में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और वाहनों को आपस में कनेक्ट करने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने नई गाड़ियों में Vehicle-to-Vehicle (V2V) Communication System अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। इसके जरिए सड़क पर चलने वाले वाहन रियल-टाइम में एक-दूसरे के साथ जरूरी जानकारी साझा कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य संभावित दुर्घटनाओं की पहले से चेतावनी देकर सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना है।

1 अक्टूबर 2028 से नई गाड़ियों में लागू करने का प्रस्ताव

मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। प्रस्ताव के मुताबिक 1 अक्टूबर 2027 से V2V सिस्टम से लैस वाहनों को AIS-230 मानक का पालन करना होगा, जबकि 1 अक्टूबर 2028 से L, M और N कैटेगरी के सभी नए वाहनों में AIS-230 के अनुरूप V2V सिस्टम लगाना अनिवार्य किया जा सकता है। इसमें दोपहिया, यात्री वाहन और कमर्शियल वाहन जैसी श्रेणियां शामिल हैं।

क्या है V2V कम्युनिकेशन सिस्टम?

V2V तकनीक वायरलेस कम्युनिकेशन के जरिए आसपास मौजूद वाहनों के बीच स्पीड, लोकेशन, दिशा और एक्सीलरेशन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करती है। इसका फायदा यह होगा कि कोई वाहन सड़क पर मौजूद संभावित खतरे की जानकारी दूसरे वाहनों तक तुरंत पहुंचा सकेगा। इस तरह ड्राइवर को खतरा नजर आने से पहले ही अलर्ट मिल सकता है।

हादसे से पहले मिलेगा अलर्ट

V2V सिस्टम की मदद से अचानक ब्रेक लगाने वाली गाड़ी, गलत दिशा से आ रहे वाहन, खतरनाक तरीके से लेन बदलने या नजदीक आती आपातकालीन गाड़ी जैसी परिस्थितियों की जानकारी साझा की जा सकेगी। खास बात यह है कि सामने मौजूद खतरा अगर किसी अन्य वाहन, सड़क के मोड़ या ट्रैफिक के कारण दिखाई नहीं दे रहा हो, तब भी कनेक्टेड वाहन चेतावनी प्राप्त कर सकता है।

AIS-230 तय करेगा तकनीकी मानक

V2V सिस्टम के लिए AIS-230 को भारत का तकनीकी मानक बनाया जा रहा है। इसमें रेडियो परफॉर्मेंस, फ्रीक्वेंसी स्टेबिलिटी, रिसीवर क्षमता, GNSS पोजिशनिंग, इलेक्ट्रिकल परफॉर्मेंस, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी, साइबर सिक्योरिटी और सेफ्टी कम्युनिकेशन जैसी आवश्यकताओं को शामिल किया गया है।

इमरजेंसी ब्रेक और गलत दिशा की भी मिलेगी जानकारी

प्रस्तावित सिस्टम में Emergency Brake Alert, Forward Collision Warning, Wrong-Way Driving Alert और Emergency Vehicle Alert जैसे सुरक्षा फीचर्स शामिल होंगे। इनका मकसद ड्राइवर को संभावित खतरे के बारे में पहले से जानकारी देना और दुर्घटना की संभावना को कम करना है। यह तकनीक भविष्य में Advanced Driver Assistance Systems (ADAS) के साथ मिलकर कनेक्टेड और स्मार्ट मोबिलिटी को बढ़ावा दे सकती है।

सरकार ने मांगे सुझाव

यह प्रस्ताव इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम (ITS) से जुड़ी टास्क फोर्स की सिफारिशों पर आधारित है। मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को सार्वजनिक सुझावों के लिए रखा है। अंतिम अधिसूचना जारी करने से पहले निर्धारित अवधि में प्राप्त सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा की जाएगी। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो भारत में कनेक्टेड वाहनों और स्मार्ट रोड सेफ्टी सिस्टम की दिशा में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।

Source: Asian News Bharat

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मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Asian News Bharat
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