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हरतालिका तीज व्रत 2026: 14 या 15 सितंबर, कब मनाई जाएगी हरतालिका तीज, जानें क्या कहता है पंचाग

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हरतालिका तीज व्रत 2026: 14 या 15 सितंबर, कब मनाई जाएगी हरतालिका तीज, जानें क्या कहता है पंचाग

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हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रखा जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और विधि-विधान से पूरे शिव परिवार की उपासना करती हैं। इस बार तीजा के व्रत किए जाने को लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई है, लोगों में यह संदेह है कि यह निर्जला व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा कि 15 सितंबर को। तो आइए जानतें है पूजा का सही दिन और मुहूर्त… 

 

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 08 मिनट से होगी, जो 14 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को ही रखा जाएगा।

 

हरतालिका तीज पूजन मुहूर्त

हरतालिका तीज की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 05 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगा।

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 32 मिनट से लेकर सुबह 5 बजकर 19 मिनट तक है।

अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।

 

मिट्टी से बनाएं शिवलिंग

 

हिंदू मान्यता के अनुसार इस व्रत में मिट्टी के बने शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। माता पार्वती ने बालू और शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग बनाकर महादेव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।

 

हरतालिका तीज पूजा विधि

हरतालिका तीज की पूजा के लिए प्रातःकाल का समय बेहद उत्तम माना जाता है लेकिन अगर सुबह पूजा कर पाना संभव नहीं है तब प्रदोष काल में पूजा की जा सकती है। तीज की पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद बालू से निर्मित भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्ति एक पीले वस्त्र पर स्थापित करें। फिर उसकी विधि विधान पूजा करें। पूजा के समय हरतालिका तीज की व्रत कथा भी जरूर सुनें। दिन भर निर्जला व्रत रहें और रात्रि जागरण करे, फिर अगले दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करें। इसके बाद अपना व्रत खोल लें।

 

हरतालिका तीज के नियम

इस व्रत में अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता है। हालांकि बीमार या गर्भवती महिलाएं फलाहार ले सकती हैं।

व्रत की रात सोने से बचना चाहिए क्योंकि इस रात जागरण करने का विशेष महत्व माना जाता है।

तीज की रात मंदिर में अखंड दीया जलाना चाहिए।

महिलाओं को इस दिन 16 शृंगार करना चाहिए।

धार्मिक मान्यता है कि अगर एक बार हरतालिका तीज का व्रत शुरू कर दिया जाए तो उसे बीच में छोड़ना नहीं चाहिए।

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Source: Ekhabri

Ekhabri
मीडिया पार्टनर साभार (Syndicated) Ekhabri
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