माता रुक्मिणी आश्रम पहुंचे गणेश मिश्रा, शिक्षा व्यवस्था सुधारने पर जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने बस्तर प्रवास के दौरान डिमरापाल स्थित माता रुक्मिणी आश्रम पहुंचकर पद्मश्री धर्मपाल सैनी से मुलाकात की। इस दौरान जनजातीय बच्चों की शिक्षा, खेल प्रतिभाओं के विकास, आश्रम की प्रशासनिक व्यवस्थाओं और संस्थागत आवश्यकताओं को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। गणेश मिश्रा ने आश्रम से जुड़ी समस्याओं के निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
माता रुक्मिणी आश्रम वर्ष 1976 से बस्तर क्षेत्र में जनजातीय बच्चों की शिक्षा, खेल और सामाजिक उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। आश्रम की व्यवस्थाओं और संचालन से संबंधित विभिन्न समस्याओं की जानकारी मिलने के बाद राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर पद्मश्री धर्मपाल सैनी से संस्थान की वर्तमान स्थिति और आवश्यकताओं पर चर्चा की।
मुलाकात के दौरान आश्रम की कार्यकारिणी, सचिव पद के प्रभार, आश्रम से संबद्ध विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों तथा वित्त एवं शिक्षा विभाग से संबंधित लंबित स्वीकृतियों के विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। गणेश मिश्रा ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और प्रतिभा विकास के लिए काम करने वाली संस्थाओं का सुचारू संचालन जरूरी है। ऐसी संस्थाओं की समस्याओं का नियमानुसार और समयबद्ध निराकरण किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर उपस्थित स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सत्येन्द्र बंजारे और आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त गणेश शोरी को आश्रम की नियमावली के अनुरूप संबंधित मामलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से आश्रम से संबद्ध शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता, प्रशासनिक विषयों और लंबित स्वीकृतियों के संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने को कहा गया, ताकि संबंधित विभागों के समन्वय से समस्याओं का स्थायी समाधान किया जा सके।
गणेश शंकर मिश्रा ने जनजातीय बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनकी खेल प्रतिभाओं को निखारने में पद्मश्री धर्मपाल सैनी के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि लगभग पांच दशकों से माता रुक्मिणी आश्रम बस्तर के जनजातीय समाज के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ऐसे संस्थान दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार करने के लिए जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना आवश्यक है। छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047 के विकास लक्ष्यों को हासिल करने में समाजसेवी संगठनों और शैक्षणिक संस्थाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि बस्तर जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा और मानव संसाधन विकास से जुड़े नवाचारों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। शासन की योजनाओं और सामाजिक संस्थाओं के प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय से बच्चों के सर्वांगीण विकास के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
गणेश मिश्रा ने आश्वस्त किया कि माता रुक्मिणी आश्रम के जनसेवा एवं कल्याणकारी कार्यों के सुचारू संचालन और संस्थागत समस्याओं के निराकरण के लिए शासन-प्रशासन के स्तर पर हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
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साभार: Ekhabri


