फ्रांस में हिंसा-आगजनी के बाद कर्फ्यू की तैयारी, राष्ट्रपति ने गृह मंत्री का इस्तीफा ठुकराया

नई दिल्ली: फ्रांस में महंगाई, सरकारी सेवाओं की खराब हालत और बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई। पेरिस, लियोन और मार्सेई समेत कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट हुई। हालात संभालने के लिए प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने संवेदनशील इलाकों में सीमित समय के लिए कर्फ्यू लगाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, देशभर में 2,400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
गृह मंत्री ने दिया इस्तीफा
हिंसा के बाद गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। मैक्रों ने उन्हें सुरक्षा व्यवस्था संभालने और हिंसा रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा है। साथ ही, हिंसा से पहले खुफिया जानकारी जुटाने और तैयारियों में हुई चूक की जांच के निर्देश दिए हैं।
पुलिस की रणनीति पर उठे सवाल
गृह मंत्री नुनेज ने माना कि शनिवार को कुछ बड़े शहरों में हालात काबू से बाहर हो गए थे। उनके मुताबिक, उस दिन 60 हजार पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी तैनात थे, फिर भी कई जगह हिंसक भीड़ को रोकना मुश्किल हुआ। उन्होंने कहा कि तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने वाले समूहों से निपटने के लिए पुलिस की रणनीति बदलनी होगी।
ऐतिहासिक इमारत को नुकसान
रविवार को भी कई शहरों में उपद्रव जारी रहा। मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में 19वीं सदी की सिटी हॉल इमारत में आग लग गई, जिससे उसकी छत ढह गई। मार्सेई में प्रशासन ने सोमवार दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक प्रदर्शनों और सार्वजनिक जमावड़ों पर रोक लगा दी।
सरकार के सामने आर्थिक चुनौती
हिंसा ऐसे समय हुई है, जब फ्रांस सरकार बजट से जुड़े अहम फैसलों और देश पर बढ़ते कर्ज के दबाव से जूझ रही है। महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार अब कर्फ्यू, पुलिस की नई रणनीति और जांच के जरिए हालात नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
साभार: Asian News Bharat


